Micro Irrigation Scheme: भारत में खेती की सबसे बड़ी चुनौती पानी की कमी बनती जा रही है। कई राज्यों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है, जबकि दूसरी ओर बारिश का पैटर्न भी बदल रहा है। ऐसे समय में सरकार ने किसानों को कम पानी में ज्यादा उत्पादन देने के लिए “सूक्ष्म सिंचाई कोष योजना” यानी Micro Irrigation Fund (MIF) को बढ़ावा दिया है। यह योजना किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ने का काम कर रही है।
सरकार का मानना है कि यदि खेती में पानी का सही उपयोग हो तो उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों की लागत भी कम की जा सकती है। इसी उद्देश्य के साथ प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के तहत “प्रति बूंद अधिक फसल” अभियान शुरू किया गया।
आज देश के कई राज्यों में लाखों किसान इस योजना का लाभ लेकर पानी की बचत के साथ बेहतर उत्पादन हासिल कर रहे हैं। खास बात यह है कि इस योजना के तहत किसानों को भारी सब्सिडी भी दी जाती है ताकि वे आधुनिक सिंचाई तकनीक आसानी से अपना सकें।
क्या है Micro Irrigation Scheme?
सूक्ष्म सिंचाई कोष योजना यानी Micro Irrigation Fund (MIF) एक विशेष फंड है जिसे राज्यों में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है। इसका संचालन NABARD के माध्यम से किया जाता है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य खेती में पानी की बर्बादी रोकना और किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन के लिए प्रेरित करना है। योजना के तहत राज्यों को कम ब्याज पर फंड उपलब्ध कराया जाता है ताकि वे किसानों तक सूक्ष्म सिंचाई तकनीक पहुंचा सकें।सरकार का फोकस खासतौर पर उन क्षेत्रों पर है जहां पानी की कमी ज्यादा है या जहां पारंपरिक सिंचाई से पानी का अत्यधिक उपयोग होता है।
Micro Irrigation Scheme की शुरुआत कब हुई?
भारत सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) की शुरुआत 1 जुलाई 2015 को की थी। इसके तहत “Per Drop More Crop” यानी “प्रति बूंद अधिक फसल” अभियान को लागू किया गया। इसके बाद वर्ष 2018 में NABARD के तहत 5000 करोड़ रुपये का “सूक्ष्म सिंचाई कोष” बनाया गया ताकि राज्यों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिल सके। सरकार का लक्ष्य था कि देश में माइक्रो इरिगेशन का दायरा तेजी से बढ़ाया जाए और हर साल लाखों हेक्टेयर भूमि को ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से जोड़ा जाए।
योजना की जरूरत क्यों पड़ी?
भारत में खेती का बड़ा हिस्सा आज भी मानसून पर निर्भर है। कई राज्यों में किसान बाढ़ और सूखे दोनों समस्याओं से जूझते हैं। पारंपरिक सिंचाई पद्धतियों में बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार ड्रिप सिंचाई से 40 से 60 प्रतिशत तक पानी बचाया जा सकता है, जबकि उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी संभव है। यही कारण है कि सरकार लगातार सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा दे रही है।
किन राज्यों में चल रही है यह योजना?
सूक्ष्म सिंचाई कोष योजना लगभग पूरे देश में लागू की जा चुकी है। हालांकि कुछ राज्यों में इसका प्रभाव अधिक दिखाई देता है।
इन राज्यों में योजना तेजी से लागू की जा रही है:
- महाराष्ट्र
- गुजरात
- राजस्थान
- हरियाणा
- पंजाब
- उत्तर प्रदेश
- मध्य प्रदेश
- बिहार
- कर्नाटक
- तमिलनाडु
- आंध्र प्रदेश
- तेलंगाना
इन राज्यों में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिस्टम पर किसानों को सब्सिडी दी जा रही है। कई राज्य सरकारें केंद्र की सहायता के अलावा अतिरिक्त अनुदान भी दे रही हैं।
किसानों को क्या-क्या लाभ मिलता है?
पानी की बचत
ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक से सीधे पौधों की जड़ों तक पानी पहुंचता है। इससे पानी की बर्बादी कम होती है।
उत्पादन में बढ़ोतरी
फसलों को जरूरत के हिसाब से पानी मिलने से उनकी गुणवत्ता और पैदावार बेहतर होती है।
बिजली और डीजल खर्च कम
कम पानी इस्तेमाल होने से मोटर कम चलानी पड़ती है, जिससे बिजली और डीजल दोनों की बचत होती है।
उर्वरक की बचत
ड्रिप सिस्टम के जरिए खाद सीधे पौधों तक पहुंचाई जा सकती है। इससे उर्वरक की खपत कम होती है।
मजदूरी खर्च घटता है
आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाने से खेत में बार-बार सिंचाई करने की जरूरत कम पड़ती है।
किन फसलों में ज्यादा फायदा?
सूक्ष्म सिंचाई तकनीक का सबसे ज्यादा फायदा बागवानी और नकदी फसलों में देखा गया है।
जैसे:
- गन्ना
- कपास
- टमाटर
- प्याज
- मिर्च
- अंगूर
- केला
- अनार
- सब्जियां
- फूलों की खेती
अब कई किसान गेहूं और धान जैसी फसलों में भी आधुनिक सिंचाई तकनीक का उपयोग करने लगे हैं।
किसानों को कितनी सब्सिडी मिलती है?
राज्य और किसान वर्ग के अनुसार सब्सिडी अलग-अलग हो सकती है। सामान्यतः:
- छोटे और सीमांत किसानों को 55% तक सब्सिडी
- अन्य किसानों को 45% तक सहायता
- कुछ राज्यों में अतिरिक्त राज्य अनुदान
कुछ योजनाओं में यह सहायता 70 से 80 प्रतिशत तक भी पहुंच जाती है।
किसान कैसे करें आवेदन?
सूक्ष्म सिंचाई योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया अब काफी आसान कर दी गई है। किसान ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन की प्रक्रिया
- अपने राज्य के कृषि या बागवानी विभाग की वेबसाइट पर जाएं
- PMKSY या Micro Irrigation योजना का चयन करें
- आवेदन फॉर्म भरें
- जरूरी दस्तावेज अपलोड करें
- आवेदन जमा करें
- विभागीय जांच के बाद मंजूरी दी जाती है
आवेदन के लिए जरूरी दस्तावेज
- आधार कार्ड
- बैंक पासबुक
- भूमि दस्तावेज
- पासपोर्ट साइज फोटो
- मोबाइल नंबर
- जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो)
योजना में NABARD की क्या भूमिका है?
NABARD इस योजना के तहत राज्यों को फंड उपलब्ध कराता है। राज्यों को कम ब्याज पर ऋण दिया जाता है ताकि वे किसानों को माइक्रो इरिगेशन सिस्टम लगाने में मदद कर सकें। इसके अलावा NABARD किसानों के लिए सामुदायिक सिंचाई परियोजनाओं और FPO आधारित योजनाओं को भी बढ़ावा दे रहा है।
सरकार का क्या है लक्ष्य?
सरकार का लक्ष्य है कि देश में अधिक से अधिक भूमि को सूक्ष्म सिंचाई के दायरे में लाया जाए। इसके जरिए:
- जल संरक्षण बढ़ाना
- किसानों की आय बढ़ाना
- खेती की लागत घटाना
- टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना
- जल संकट कम करना
सरकार का “हर खेत को पानी” और “प्रति बूंद अधिक फसल” मिशन इसी दिशा में काम कर रहा है।
क्या चुनौतियां भी हैं?
हालांकि योजना काफी फायदेमंद है लेकिन कई किसानों को अब भी जानकारी की कमी है। ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी जागरूकता कम होने से योजना का लाभ सभी तक नहीं पहुंच पा रहा है।
इसके अलावा:
- शुरुआती लागत अधिक
- तकनीकी जानकारी की कमी
- रखरखाव समस्या
- बिजली और पानी की उपलब्धता
जैसी चुनौतियां भी सामने आती हैं।
कृषि विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में माइक्रो इरिगेशन खेती का भविष्य बनने वाला है। जल संकट को देखते हुए ड्रिप और स्प्रिंकलर तकनीक अपनाना जरूरी हो गया है।विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि किसानों को सही प्रशिक्षण और समय पर सब्सिडी मिले तो देश में खेती की तस्वीर बदल सकती है।
निष्कर्ष
सूक्ष्म सिंचाई कोष योजना देश के किसानों के लिए एक बड़ी राहत बनकर उभर रही है। कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली यह तकनीक न केवल खेती की लागत घटा रही है बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद कर रही है।
सरकार लगातार इस योजना का विस्तार कर रही है और राज्यों को आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। ऐसे में किसान यदि आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाते हैं तो आने वाले समय में जल संकट से मुकाबला करना आसान हो सकता है।सूक्ष्म सिंचाई केवल एक योजना नहीं बल्कि भविष्य की टिकाऊ खेती की मजबूत नींव बनती जा रही है।


