भारत और कनाडा के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री Piyush Goyal ने कनाडा की महत्वपूर्ण यात्रा शुरू की है। इस दौरे को दोनों देशों के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस यात्रा में भारत का अब तक का सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल शामिल है, जिसमें 100 से अधिक प्रमुख कंपनियों के उद्योगपति और कारोबारी प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
तीन दिवसीय इस यात्रा के दौरान ओटावा और टोरंटो में कई उच्च स्तरीय बैठकें आयोजित की जा रही हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को अंतिम रूप देने की दिशा में तेजी लाना और द्विपक्षीय व्यापार को नई मजबूती देना है।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सीईपीए को बताया ‘गेम चेंजर’
ओटावा में अपनी यात्रा के पहले दिन केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi की ओर से शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते को “गेम चेंजर” बताते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए नए आर्थिक अवसरों के द्वार खोलेगा।
उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और कनाडा भारत के साथ दीर्घकालिक आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाना चाहता है।
2026 के अंत तक सीईपीए पूरा करने का लक्ष्य
पीयूष गोयल ने कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री Maninder Sidhu के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक की। दोनों पक्षों ने सीईपीए वार्ता की प्रगति की समीक्षा करते हुए 2026 के अंत तक संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में तेजी आएगी। इससे भारतीय उद्योगों को कनाडा के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, वहीं कनाडाई कंपनियों को भारत के विशाल उपभोक्ता बाजार का लाभ मिलेगा।
कृषि और खाद्य सुरक्षा में बढ़ेगा सहयोग
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कनाडा के कृषि एवं खाद्य मंत्री Heath MacDonald से भी मुलाकात की। बैठक में खाद्य सुरक्षा, कृषि-तकनीक, सतत विकास और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
दोनों पक्षों ने माना कि कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और नवाचारों के जरिए किसानों की आय बढ़ाई जा सकती है। विशेष रूप से खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने के लिए साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत और कनाडा दोनों कृषि क्षेत्र में मजबूत देश हैं और तकनीकी सहयोग के जरिए दोनों देशों के किसान लाभान्वित हो सकते हैं।
रणनीतिक साझेदारी पर भी जोर
पीयूष गोयल ने कनाडा की विदेश मंत्री Anita Anand के साथ भी व्यापक चर्चा की। इस दौरान व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का आधार बताया गया।
पीयूष गोयल ने भारत में तेजी से विकसित हो रहे बुनियादी ढांचे, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उपभोक्ता बाजार को कनाडा के निवेशकों के लिए बड़ा अवसर बताया।
दोनों पक्षों ने आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
भारतीय उद्योग जगत की बड़ी भागीदारी
इस दौरे में ऊर्जा, खनन, ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, दूरसंचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वस्त्र और चमड़ा उद्योग से जुड़े 100 से अधिक भारतीय उद्योगपति शामिल हैं।
टोरंटो में आयोजित होने वाले उद्योग गोलमेज सम्मेलन और बी2बी बैठकों के जरिए इन क्षेत्रों में नई व्यावसायिक साझेदारियों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रतिनिधिमंडल दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की गंभीरता और बढ़ती संभावनाओं को दर्शाता है।
व्यापार बढ़ाकर 50 अरब डॉलर करने का लक्ष्य
वर्तमान में भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 8.5 अरब अमेरिकी डॉलर का है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक इसे बढ़ाकर 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।
विशेषज्ञों के अनुसार सीईपीए समझौता इस लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकता है। इससे व्यापार बाधाएं कम होंगी, निवेश बढ़ेगा और दोनों देशों के उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे।
भारतीय प्रवासियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण
ओटावा में आयोजित स्वागत समारोह के दौरान पीयूष गोयल ने भारतीय प्रवासी समुदाय की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय मूल के लोगों ने कनाडा की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उन्होंने भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की युवा आबादी, उद्यमशीलता की भावना और विशाल प्रतिभा भंडार भारत को वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में स्थापित कर रहे हैं।
नई दिशा में बढ़ रहे भारत-कनाडा संबंध
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत और कनाडा के संबंधों में नई ऊर्जा देखने को मिली है। मार्च 2026 में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की नई दिल्ली यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को लेकर नई गति आई है।
सीईपीए वार्ता के तहत तकनीकी स्तर की बातचीत भी लगातार जारी है। ओटावा में 25 से 29 मई तक तकनीकी वार्ता का दौर चल रहा है, जिससे यह स्पष्ट है कि दोनों देश इस समझौते को जल्द अंतिम रूप देने के लिए गंभीर हैं।
भारत और कनाडा के बीच बढ़ती यह साझेदारी आने वाले वर्षों में व्यापार, निवेश, तकनीक और कृषि जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा कर सकती है।


