पूर्वोत्तर भारत में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और ग्रामीण विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय (CAU), इम्फाल के कुलपति पद के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। इस पद पर नियुक्ति को पूर्वोत्तर क्षेत्र में कृषि विकास, नवाचार और कृषि शिक्षा के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भारत सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार पात्र और अनुभवी उम्मीदवारों से निर्धारित प्रारूप में आवेदन मांगे गए हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 6 जुलाई 2026 शाम 5 बजे निर्धारित की गई है। चयन प्रक्रिया भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग की देखरेख में संपन्न होगी।
पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख कृषि विश्वविद्यालय
केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल की स्थापना वर्ष 1993 में संसद के एक अधिनियम के तहत की गई थी। यह विश्वविद्यालय पूर्वोत्तर भारत के कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में उच्च शिक्षा, अनुसंधान तथा तकनीकी विस्तार का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
विश्वविद्यालय का कार्यक्षेत्र केवल मणिपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा सहित पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र तक फैला हुआ है। वर्तमान में विश्वविद्यालय सात राज्यों में फैले 13 संघटक महाविद्यालयों और छह कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान गतिविधियों का संचालन कर रहा है।
इन संस्थानों में कृषि, पशु चिकित्सा विज्ञान, मत्स्य विज्ञान, बागवानी, वानिकी, कृषि अभियांत्रिकी, सामुदायिक विज्ञान और खाद्य प्रौद्योगिकी जैसे विषयों में शिक्षा और शोध कार्य किए जाते हैं।
कुलपति की भूमिका होगी बेहद महत्वपूर्ण
कुलपति विश्वविद्यालय का सर्वोच्च कार्यपालक और शैक्षणिक अधिकारी होता है। उसके नेतृत्व में विश्वविद्यालय की नीतियां तैयार होती हैं और शैक्षणिक, अनुसंधान तथा प्रशासनिक गतिविधियों का संचालन किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में जब देश कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, जलवायु अनुकूल खेती और तकनीक आधारित कृषि विकास पर जोर दे रहा है, तब केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय जैसे संस्थान की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में नए कुलपति का चयन विश्वविद्यालय की भावी दिशा तय करने में अहम साबित होगा।
कृषि शिक्षा और अनुसंधान का मजबूत अनुभव जरूरी
अधिसूचना के अनुसार कुलपति पद के लिए उम्मीदवार के पास कृषि या संबद्ध विज्ञान विषय में पीएचडी की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उम्मीदवार को कृषि शिक्षा, अनुसंधान या विस्तार शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करनी होंगी।
आवेदक के पास प्रोफेसर या समकक्ष पद पर कम से कम 10 वर्षों का अनुभव होना चाहिए। साथ ही अनुसंधान, शिक्षा और प्रशासनिक नेतृत्व में उत्कृष्ट कार्य का प्रमाण भी अपेक्षित है।
सरकार ऐसे उम्मीदवार की तलाश कर रही है जिसके पास कृषि अनुसंधान और शिक्षा के क्षेत्र में व्यापक दृष्टिकोण हो, जो संस्थान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की क्षमता रखता हो।
वैज्ञानिक उपलब्धियों और नेतृत्व क्षमता को मिलेगा महत्व
चयन प्रक्रिया में केवल शैक्षणिक योग्यता ही नहीं, बल्कि वैज्ञानिक उपलब्धियां, अनुसंधान परियोजनाएं, प्रकाशित शोध पत्र, पुस्तकों में योगदान, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और संस्थागत नेतृत्व क्षमता को भी विशेष महत्व दिया जाएगा।
उम्मीदवारों के वैज्ञानिक योगदान, कृषि क्षेत्र में नवाचार, राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहभागिता तथा संस्थानों के सफल प्रबंधन के अनुभव का मूल्यांकन किया जाएगा।
विशेष रूप से ऐसे व्यक्तित्व को प्राथमिकता दी जाएगी जो विश्वविद्यालय के शिक्षकों, वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और कर्मचारियों को प्रेरित करने की क्षमता रखता हो तथा कृषि शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सके।
पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास में निभा रहा महत्वपूर्ण भूमिका
केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूर्वोत्तर भारत की विशिष्ट कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप कृषि तकनीकों और शोध कार्यक्रमों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
यह विश्वविद्यालय स्थानीय किसानों के लिए टिकाऊ और लाभकारी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने, नई तकनीकों के प्रसार और कृषि उद्यमिता को प्रोत्साहित करने का कार्य करता है। विश्वविद्यालय द्वारा विकसित कई तकनीकें किसानों तक कृषि विज्ञान केंद्रों के माध्यम से पहुंचाई जाती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्वोत्तर भारत जैव विविधता और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र है। यदि यहां कृषि अनुसंधान और तकनीकी नवाचार को और अधिक बढ़ावा दिया जाए तो यह क्षेत्र देश की खाद्य और पोषण सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
पांच वर्षों का होगा कार्यकाल
चयनित कुलपति का कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष या 70 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, निर्धारित किया गया है। इसके बाद नियमों के अनुसार पुनर्नियुक्ति की संभावना भी रहेगी।
कुलपति को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और शिक्षा मंत्रालय के नियमों के अनुरूप वेतन और अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। वर्तमान में इस पद का निर्धारित वेतन 2.10 लाख रुपये प्रतिमाह है, जबकि अन्य भत्ते भारत सरकार के नियमों के अनुसार देय होंगे।
कृषि शिक्षा के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि पूर्वोत्तर भारत में कृषि शिक्षा, अनुसंधान और किसानों के विकास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण निर्णय है।
नए कुलपति के नेतृत्व में विश्वविद्यालय से अपेक्षा की जा रही है कि वह कृषि क्षेत्र की नई चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, खाद्य सुरक्षा, कृषि उद्यमिता और डिजिटल कृषि के क्षेत्र में नई पहल करेगा।
केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल पहले से ही पूर्वोत्तर क्षेत्र के कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। अब नए नेतृत्व के चयन के साथ विश्वविद्यालय के सामने राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका को और मजबूत करने का अवसर होगा।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सही नेतृत्व मिलने पर यह विश्वविद्यालय न केवल पूर्वोत्तर भारत बल्कि पूरे देश में कृषि शिक्षा और अनुसंधान का एक उत्कृष्ट केंद्र बन सकता है। ऐसे में कुलपति पद के लिए शुरू हुई चयन प्रक्रिया पर कृषि जगत की विशेष नजर बनी हुई है।


