भारत में आम को केवल एक फल नहीं, बल्कि स्वाद, संस्कृति और परंपरा का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि आम को “फलों का राजा” कहा जाता है। जब देशभर की बेहतरीन आम किस्में एक ही स्थान पर एकत्रित होती हैं, तो वह आयोजन किसी उत्सव से कम नहीं होता। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 29 मई से 31 मई 2026 तक आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव 2026 ऐसा ही एक भव्य आयोजन रहा, जिसने हजारों आम प्रेमियों, किसानों, बागवानी विशेषज्ञों और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित किया।
यह तीन दिवसीय महोत्सव कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV), रायपुर में आयोजित किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य केवल आमों की प्रदर्शनी लगाना नहीं था, बल्कि किसानों को नई तकनीकों, उन्नत किस्मों, मूल्य संवर्धन और कृषि उद्यमिता से जोड़ना भी था। महोत्सव में 250 से अधिक आम की किस्मों का प्रदर्शन किया गया, जिसने इसे देश के सबसे आकर्षक आम उत्सवों में शामिल कर दिया।
आम प्रेमियों के लिए बना आकर्षण का केंद्र
राष्ट्रीय आम महोत्सव के दौरान रायपुर का कृषि महाविद्यालय परिसर आम (mango) की मीठी खुशबू से महक उठा। सुबह से लेकर शाम तक बड़ी संख्या में लोग विभिन्न स्टॉलों का भ्रमण करते दिखाई दिए। हर स्टॉल पर अलग-अलग रंग, आकार, स्वाद और सुगंध वाले आम लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे थे।
कई आगंतुक पहली बार ऐसी दुर्लभ किस्मों को देख रहे थे, जिनके बारे में उन्होंने केवल पढ़ा या सुना था। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के चेहरे पर उत्साह साफ दिखाई दे रहा था। आम की विविधता ने लोगों को यह महसूस कराया कि भारत वास्तव में आम उत्पादन के मामले में दुनिया का अग्रणी देश है।
250 से अधिक आम की किस्मों ने बढ़ाई शोभा
महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता थी 250 से अधिक आम की किस्मों का प्रदर्शन। इन किस्मों में पारंपरिक, व्यावसायिक, संकर (हाइब्रिड), दुर्लभ और विदेशी प्रजातियां शामिल थीं।
दशहरी आम
उत्तर प्रदेश की प्रसिद्ध दशहरी आम (dasheri mango) किस्म अपनी मिठास और सुगंध के लिए पूरे देश में लोकप्रिय है। इसकी मुलायम गूदेदार बनावट और पतली गुठली इसे आम प्रेमियों की पहली पसंद बनाती हैं। महोत्सव में दशहरी आम के स्टॉल के सामने लोगों की अच्छी-खासी भीड़ देखी गई।
लंगड़ा आम
वाराणसी क्षेत्र का प्रसिद्ध लंगड़ा आम अपनी अनूठी मिठास और रेशारहित गूदे के कारण लोगों के बीच हमेशा लोकप्रिय रहा है। महोत्सव में इसे देखने और चखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
चौसा आम
चौसा आम अपनी प्राकृतिक मिठास और रसदार बनावट के लिए प्रसिद्ध है। गर्मियों के मौसम में यह आम लोगों की पसंदीदा किस्मों में शामिल रहता है। इसकी सुगंध और स्वाद ने महोत्सव में आए आगंतुकों को खूब आकर्षित किया।
केसर आम
गुजरात का प्रसिद्ध केसर आम अपने केसरिया रंग और मधुर स्वाद के लिए जाना जाता है। इस किस्म ने भी लोगों का खूब ध्यान खींचा।
हिमसागर आम
पश्चिम बंगाल का हिमसागर आम अपने बिना रेशे वाले गूदे और गहरे स्वाद के लिए मशहूर है। महोत्सव में इसकी विशेष प्रस्तुति की गई।
अल्फांसो आम
महाराष्ट्र का प्रसिद्ध अल्फांसो आम (alphonso mango) अपनी प्रीमियम गुणवत्ता और शानदार स्वाद के लिए विश्वभर में जाना जाता है। इसका सुनहरा रंग, गाढ़ा गूदा और अनोखी खुशबू इसे विशेष बनाते हैं। अल्फांसो आम को देखकर कई आगंतुकों ने इसे “राजाओं का आम” तक कहा।
मालदा आम
मालदा आम की मिठास और आकर्षक बनावट ने भी आगंतुकों को प्रभावित किया। यह पूर्वी भारत की लोकप्रिय किस्मों में से एक है।
सिंदूरी आम
अपने चमकदार लाल रंग के कारण सिंदूरी आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा है। इसकी सुंदरता और स्वाद दोनों ने लोगों का मन मोह लिया।
टोटापुरी आम
टोटापुरी आम का अनोखा आकार और हल्का खट्टा-मीठा स्वाद इसे अन्य किस्मों से अलग बनाते हैं। जूस और प्रोसेसिंग उद्योग में इसकी काफी मांग रहती है।
बैगनपल्ली आम
आंध्र प्रदेश की प्रसिद्ध बैगनपल्ली आम किस्म अपने बड़े आकार और मीठे स्वाद के लिए जानी जाती है। इसने भी महोत्सव में विशेष पहचान बनाई।
फजली आम
बड़े आकार के लिए प्रसिद्ध फजली आम को देखकर लोग आश्चर्यचकित रह गए। इसका आकार सामान्य आमों की तुलना में काफी बड़ा होता है।
नीलम आम
दक्षिण भारत की लोकप्रिय किस्म नीलम आम (neelam mango) भी इस महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रही। नीलम आम अपने लंबे शेल्फ लाइफ, गहरे स्वाद और मीठी सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। किसानों और बागवानी विशेषज्ञों ने इसकी खेती से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा की।
दुर्लभ और विशेष आमों ने खींचा ध्यान
राष्ट्रीय आम महोत्सव में कुछ ऐसी दुर्लभ किस्में भी प्रदर्शित की गईं जिन्होंने लोगों को रोमांचित कर दिया।
हाथीझूल आम
बीजापुर क्षेत्र का प्रसिद्ध हाथीझूल आम अपने विशाल आकार के कारण चर्चा का केंद्र रहा। इसे देखकर लोग तस्वीरें खिंचवाते दिखाई दिए।
नूरजहां आम
अपने असाधारण आकार और ऐतिहासिक महत्व के कारण नूरजहां आम ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
गुलाब खास आम
गुलाब जैसी सुगंध वाले गुलाब खास आम ने आगंतुकों को एक अलग अनुभव दिया। इसकी खुशबू अन्य किस्मों से बिल्कुल अलग महसूस होती है।
लड्डू आम
अपने गोल आकार और आकर्षक रूप के कारण लड्डू आम भी लोगों की पसंद बना रहा है।
विदेशी आमों ने बढ़ाया आकर्षण
राष्ट्रीय आम महोत्सव में केवल भारतीय किस्में ही नहीं, बल्कि विदेशी प्रजातियां भी प्रदर्शित की गईं।
मियाजाकी आम
जापान का प्रसिद्ध मियाजाकी आम अपनी प्रीमियम गुणवत्ता और महंगी कीमत के कारण लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। इसे दुनिया के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है।
टॉमी एटकिंस
अंतरराष्ट्रीय बाजार में लोकप्रिय टॉमी एटकिंस आम ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया।
गोल्डन नगेट्स
अपने सुनहरे रंग और अलग स्वाद के कारण गोल्डन नगेट्स आम लोगों के लिए नया अनुभव साबित हुए।
हाइब्रिड किस्मों की विशेष प्रदर्शनी
महोत्सव में कई आधुनिक और उन्नत हाइब्रिड किस्में भी प्रदर्शित की गईं।
इनमें प्रमुख रूप से:
- मल्लिका
- अम्रपाली
- पूसा अरुणिमा
- अंबिका
- रत्ना
- सिंधु
- अर्का पुनीत
जैसी किस्में शामिल थीं। इन आमों को वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से विकसित किया गया है ताकि बेहतर उत्पादन, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उच्च गुणवत्ता प्राप्त की जा सके।
किसानों के लिए बना ज्ञान का मंच
राष्ट्रीय आम महोत्सव केवल मनोरंजन या प्रदर्शनी तक सीमित नहीं था। यह किसानों के लिए सीखने और नए अवसर तलाशने का महत्वपूर्ण मंच भी बना।
विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि कैसे आधुनिक तकनीकों, जैविक खेती, जल संरक्षण और उन्नत पौध प्रबंधन के माध्यम से आम उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। किसानों को आम (mango) आधारित उद्योग, प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के बारे में भी जानकारी दी गई।
कृषि उद्यमिता को मिला बढ़ावा
महोत्सव में आम से बनने वाले उत्पादों की भी प्रदर्शनी लगाई गई। आम का अचार, जैम, जेली, जूस, पल्प, कैंडी और अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद लोगों को काफी पसंद आए।
इससे किसानों और महिला स्व-सहायता समूहों को नए व्यावसायिक अवसरों की जानकारी मिली। विशेषज्ञों ने बताया कि केवल फल बेचने के बजाय मूल्य संवर्धित उत्पाद बनाकर अधिक लाभ कमाया जा सकता है।
छत्तीसगढ़ के लिए नई संभावनाएं
विशेषज्ञों के अनुसार बस्तर, कांकेर, कोंडागांव और सरगुजा जैसे क्षेत्र आम उत्पादन के लिए काफी उपयुक्त हैं। ऐसे महोत्सव स्थानीय किसानों को नई पहचान दिलाने और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने में मदद करते हैं।
संस्कृति और स्वाद का संगम
राष्ट्रीय आम महोत्सव ने केवल कृषि क्षेत्र को ही नहीं, बल्कि संस्कृति और पर्यटन को भी बढ़ावा दिया। परिवारों, विद्यार्थियों और पर्यटकों ने इस आयोजन का भरपूर आनंद लिया। लोगों ने विभिन्न किस्मों के आमों का स्वाद चखा, नई जानकारियां प्राप्त कीं और भारतीय कृषि की समृद्ध विरासत को करीब से देखा।
सारांश
रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव 2026 वास्तव में आम प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं था। 250 से अधिक किस्मों के आम, दुर्लभ और विदेशी प्रजातियां, आधुनिक कृषि तकनीकें, किसानों के लिए प्रशिक्षण और कृषि उद्यमिता के अवसर—इन सभी ने इस आयोजन को यादगार बना दिया।
दशहरी, अल्फांसो, नीलम, लंगड़ा, चौसा, केसर, हिमसागर, सिंदूरी, टोटापुरी, बैगनपल्ली, फजली, हाथीझूल, नूरजहां और मियाजाकी जैसे आमों ने इस महोत्सव की शोभा बढ़ाई। यह आयोजन केवल एक प्रदर्शनी नहीं था, बल्कि भारत की समृद्ध आम संस्कृति, कृषि नवाचार और किसानों के उज्ज्वल भविष्य का उत्सव था।
रायपुर का यह आम महाकुंभ आने वाले वर्षों में और भी बड़े स्तर पर आयोजित होने की उम्मीद जगाता है, जहां स्वाद, परंपरा और कृषि विकास का यह अनूठा संगम फिर से देखने को मिलेगा।


