भारत के ऊर्जा क्षेत्र और कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए देश की पहली फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिल लॉन्च की गई है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहन केवल परिवहन क्षेत्र में बदलाव नहीं लाएंगे, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, कच्चे तेल के आयात को कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि एथेनॉल आधारित ईंधन व्यवस्था भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रही है।
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में हीरो मोटोकॉर्प ने अपनी पहली फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों स्प्लेंडर प्लस फ्लेक्स-फ्यूल और एचएफ डीलक्स फ्लेक्स-फ्यूल का अनावरण किया। ये मोटरसाइकिलें ई-20 से लेकर ई-85 तक एथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चल सकती हैं। कार्यक्रम में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी भी उपस्थित रहे।
अन्नदाता से ऊर्जादाता बन रहे हैं किसान
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम किसानों के लिए आर्थिक परिवर्तन का माध्यम बन चुका है। वर्ष 2014 में जहां पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण केवल 1.5 प्रतिशत था, वहीं आज यह 20 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।
उन्होंने बताया कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण अब तक किसानों को लगभग 1.58 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई है। इससे किसानों को अपनी कृषि उपज जैसे गन्ना, मक्का और अन्य फसलों के लिए नया बाजार मिला है। यही कारण है कि आज किसान केवल खाद्यान्न उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा उत्पादन में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि भारत के किसान अब “अन्नदाता से ऊर्जादाता” बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। एथेनॉल उद्योग की बढ़ती मांग किसानों के लिए आय के स्थायी और अतिरिक्त स्रोत तैयार कर रही है।
एथेनॉल से किसानों को कैसे होगा फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार एथेनॉल मुख्य रूप से गन्ने के शीरे, मक्का तथा अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। जैसे-जैसे एथेनॉल की मांग बढ़ेगी, किसानों की फसलों की मांग भी बढ़ेगी।
फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के बढ़ते उपयोग से एथेनॉल की खपत में तेजी आएगी, जिससे:
- गन्ना उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा।
- मक्का उत्पादकों के लिए नए बाजार विकसित होंगे।
- कृषि आधारित उद्योगों का विस्तार होगा।
- ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- किसानों की आय के नए स्रोत बनेंगे।
केंद्र सरकार का मानना है कि आने वाले वर्षों में एथेनॉल अर्थव्यवस्था ग्रामीण भारत के आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बन सकती है।
कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता होगी कम
भारत वर्तमान में अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 88.5 प्रतिशत आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक और एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के जरिए भारत अपनी आयात निर्भरता को कम कर सकता है। वित्त वर्ष 2014-15 से अब तक एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण देश ने लगभग 1.84 लाख करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बचाई है।
इसके साथ ही लगभग 302 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल का विकल्प तैयार हुआ है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है।
पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका
फ्लेक्स-फ्यूल और एथेनॉल आधारित ईंधन केवल आर्थिक लाभ ही नहीं देते बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम से अब तक 909 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आई है। एथेनॉल एक स्वच्छ और नवीकरणीय ईंधन है, जिससे वायु प्रदूषण कम होता है और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का उपयोग तेजी से बढ़ता है तो भारत अपने कार्बन उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने में बड़ी सफलता प्राप्त कर सकता है।
फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक क्या है?
फ्लेक्स-फ्यूल वाहन ऐसे वाहन होते हैं जो पेट्रोल और एथेनॉल के विभिन्न मिश्रणों पर चल सकते हैं। हीरो मोटोकॉर्प द्वारा लॉन्च की गई नई मोटरसाइकिलें ई-20 से लेकर ई-85 तक किसी भी मिश्रण का उपयोग कर सकती हैं।
इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसके लिए अतिरिक्त चार्जिंग नेटवर्क या बड़े बुनियादी ढांचे की आवश्यकता नहीं होती। मौजूदा पेट्रोल पंपों के माध्यम से ही एथेनॉल मिश्रित ईंधन उपलब्ध कराया जा सकता है।
किसानों तक पहुंचेगा तेल आयात का पैसा
हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यदि पेट्रोल वाहनों की वार्षिक बिक्री में केवल 1 प्रतिशत की वृद्धि होती है तो लगभग 4 करोड़ लीटर अतिरिक्त एथेनॉल की मांग पैदा होगी।
इसके लिए डिस्टिलरी उद्योग किसानों से अधिक कृषि उत्पाद खरीदेगा। अनुमान है कि इससे लगभग 160 करोड़ रुपये, जो सामान्यतः तेल आयात पर खर्च होते, सीधे किसानों तक पहुंचेंगे।
यह मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
ब्राजील मॉडल से मिली प्रेरणा
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि ब्राजील जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक वर्षों से सफलतापूर्वक उपयोग की जा रही है। वहां बड़ी संख्या में वाहन उच्च एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन पर चलते हैं।
भारत भी उसी दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का लक्ष्य किसानों, उद्योग और उपभोक्ताओं को एक साथ लाभ पहुंचाने वाला टिकाऊ ऊर्जा मॉडल तैयार करना है।
हरित ऊर्जा और कृषि विकास का नया युग
विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का विस्तार भारत में हरित ऊर्जा क्रांति की शुरुआत साबित हो सकता है। इससे एक ओर किसानों को उनकी फसलों का बेहतर मूल्य मिलेगा, वहीं दूसरी ओर देश का तेल आयात बिल कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
स्प्लेंडर प्लस और एचएफ डीलक्स जैसी फ्लेक्स-फ्यूल मोटरसाइकिलों की लॉन्चिंग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि एथेनॉल आधारित ईंधन का उपयोग व्यापक स्तर पर बढ़ता है, तो आने वाले वर्षों में भारत न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का नया मॉडल भी स्थापित करेगा।
