प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में कृषि क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाने की दिशा में एक नई पहल शुरू की गई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जिलों के लिए तैयार विशेष कृषि रोडमैप को देश में कृषि परिवर्तन के एक मॉडल के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया है। इसी उद्देश्य से गुरुवार को नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना सहित केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह रोडमैप केवल सरकारी दस्तावेज नहीं है, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, जल संरक्षण, मिट्टी की सेहत सुधारने, वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने और विभिन्न योजनाओं के प्रभावी अभिसरण के माध्यम से कृषि क्षेत्र में वास्तविक परिवर्तन लाने का मिशन है।
किसान की आय होगी सफलता का सबसे बड़ा पैमाना
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इस पूरी पहल का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य किसानों की शुद्ध आय में वृद्धि करना है। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले में किसानों की वर्तमान आय का आकलन किया जाए और रोडमैप लागू होने के बाद आय में हुए बदलाव को नियमित रूप से मापा जाए।
उन्होंने कहा कि समीक्षा बैठकों का उद्देश्य केवल प्रगति रिपोर्ट देखना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचे और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे।
चार जिलों को बनाया जाएगा कृषि विकास का आदर्श मॉडल
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि रायसेन, विदिशा, सीहोर और देवास जिलों की कृषि परिस्थितियों का गहन अध्ययन किया गया है। इन क्षेत्रों में भूजल स्तर में गिरावट, मिट्टी की उर्वरता में कमी और किसानों को अपेक्षित आय न मिलना प्रमुख चुनौतियां हैं।
उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए तैयार किया गया रोडमैप कृषि सुधार का एक ऐसा मॉडल बनेगा, जिसे भविष्य में देश के अन्य जिलों में भी लागू किया जा सकेगा। उनका लक्ष्य इन चार जिलों को कृषि नवाचार और टिकाऊ खेती के उदाहरण के रूप में स्थापित करना है।
जल संकट और अल नीनो की चुनौतियों से निपटने की तैयारी
बैठक में जल संकट और संभावित अल नीनो प्रभावों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करना आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि रबी फसलों की सुरक्षा के लिए अभी से रणनीति बनाई जाए। उनका मानना है कि यदि कठिन जलवायु परिस्थितियों में भी किसान की आय और उत्पादन सुरक्षित रखा जा सके, तो वैज्ञानिक खेती और आधुनिक कृषि तकनीकों पर किसानों का विश्वास और मजबूत होगा।
“वन टीम वन टॉस्क” के सिद्धांत पर होगा काम
केंद्रीय मंत्री ने सभी स्तरों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए “वन टीम वन टॉस्क” का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर गठित समितियों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनके कार्यों का प्रभाव खेतों में दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने प्रत्येक स्तर पर यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए कि कौन अधिकारी किस कार्य के लिए जिम्मेदार होगा और उसे कब तक पूरा करना है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों बढ़ेंगी।
विभिन्न कृषि योजनाओं का होगा प्रभावी अभिसरण
बैठक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY), राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (NFSM), राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (NMEO), मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) तथा सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) जैसी योजनाओं के बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन सभी योजनाओं का लाभ किसान के खेत पर एकीकृत रूप में दिखाई देना चाहिए। इसके लिए उन्नत बीजों की उपलब्धता, प्रदर्शन प्लॉट, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कृषि विस्तार सेवाओं को आपस में जोड़ा जाएगा।
फसल विविधीकरण पर विशेष जोर
कृषि रोडमैप में फसल विविधीकरण को प्रमुख स्थान दिया गया है। प्रत्येक जिले की भौगोलिक और कृषि परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग कृषि प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाएगा।
- विदिशा में सोयाबीन-मक्का अंतरफसल प्रणाली
- सीहोर में उच्च मूल्य वाली फसलों का विस्तार
- रायसेन में धान-लहसुन आधारित कृषि मॉडल
- देवास में मक्का-लहसुन-प्याज प्रणाली
इन मॉडलों के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने और जोखिम कम करने का प्रयास किया जाएगा।
समेकित कृषि प्रणाली से बढ़ेगी आय
केंद्रीय मंत्री ने खरीफ 2026 से प्रत्येक जिले के कम से कम एक ब्लॉक में समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने के निर्देश दिए।
इस मॉडल में कृषि के साथ डेयरी, मत्स्य पालन और बागवानी को जोड़ा जाएगा ताकि किसानों को आय के कई स्रोत उपलब्ध हो सकें। इसके लिए कृषि, पशुपालन और उद्यानिकी विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।
FPO और बागवानी क्षेत्र को मिलेगा बढ़ावा
बैठक में किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि चारों जिलों के एफपीओ को बाजारों से जोड़ा जाए और उन्हें बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
इसके अलावा MIDH के तहत नर्सरी विकास, कोल्ड चेन इंफ्रास्ट्रक्चर और बागवानी परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता को तेजी से लागू करने पर भी चर्चा हुई। इससे किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
किसान प्रशिक्षण और वैज्ञानिक खेती पर रहेगा फोकस
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि रोडमैप की सफलता किसानों की क्षमता निर्माण पर निर्भर करेगी। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) की भूमिका को और मजबूत किया जाएगा।
साथ ही भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल और केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान जैसे वैज्ञानिक संस्थानों को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। प्रत्येक ब्लॉक में कम से कम एक अग्रणी किसान विकसित करने की योजना है, जो अन्य किसानों को नई तकनीकों और आधुनिक खेती के लिए प्रेरित करेगा।
कृषि परिवर्तन की नई शुरुआत
रायसेन में आयोजित “उन्नत कृषि महोत्सव” के दौरान की गई घोषणा अब जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है। शिवराज सिंह चौहान की पहल पर तैयार यह कृषि रोडमैप केवल चार जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में पूरे देश के लिए कृषि विकास, जल प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती और किसान आय वृद्धि का एक प्रभावी मॉडल बन सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल सफल होती है तो मध्य प्रदेश देश में कृषि परिवर्तन की नई मिसाल स्थापित कर सकता है और किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।

