वैश्विक अर्थव्यवस्था जहां भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक चुनौतियों और तकनीकी बदलावों के दौर से गुजर रही है, वहीं भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। यह बात वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) में आयोजित ग्लोबल बिजनेस रिसर्च कॉन्फ्रेंस (जीबीआरसी) 2026 के उद्घाटन अवसर पर कही।
“वैश्विक उथल-पुथल के बीच व्यापार प्रबंधन” विषय पर आधारित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में देश-विदेश के शिक्षाविद, नीति निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ, प्रबंधन शिक्षक और शोधकर्ता एक मंच पर एकत्र हुए हैं। सम्मेलन का उद्देश्य तेजी से बदलते वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में उभरती चुनौतियों और अवसरों पर व्यापक चर्चा करना है।
भारत की आर्थिक मजबूती पर जोर
अपने संबोधन में जितिन प्रसाद ने कहा कि वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताओं और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारत लगातार मजबूत विकास दर बनाए हुए है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने व्यापार, विनिर्माण, नवाचार और तकनीकी विकास पर आधारित दीर्घकालिक आर्थिक दृष्टिकोण अपनाया है।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर निर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वैश्विक व्यापार साझेदारियों के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियां यह दर्शाती हैं कि देश अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है।
राज्य मंत्री ने कहा कि भारत आज केवल एक बड़ा बाजार नहीं है, बल्कि वैश्विक निवेश और नवाचार का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है। यही कारण है कि दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भारत के साथ अपने व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में रुचि दिखा रही हैं।
आईआईएफटी की भूमिका को सराहा
जितिन प्रसाद ने भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान व्यापार शिक्षा, नीति अनुसंधान और वैश्विक व्यापारिक समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
उन्होंने कहा कि आईआईएफटी जैसे संस्थान भविष्य के व्यापारिक नेतृत्व को तैयार करने, अनुसंधान आधारित नीतिगत सुझाव प्रदान करने और भारत को वैश्विक बाजारों के साथ जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जीबीआरसी 2026 में होने वाले विचार-विमर्श से ऐसे सुझाव और निष्कर्ष सामने आएंगे जो भारत की आर्थिक नीतियों और व्यापारिक रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेंगे।
वैश्विक व्यापार में नए बदलावों पर चर्चा
आईआईएफटी के कुलपति प्रो. राकेश मोहन जोशी ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और वैश्विक व्यापार नए दौर में प्रवेश कर चुका है।
उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक नीतियों में बदलाव, आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियां और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी उभरती तकनीकें वैश्विक व्यापारिक ढांचे को नया स्वरूप दे रही हैं।
प्रो. जोशी ने कहा कि ऐसे समय में साक्ष्य-आधारित अनुसंधान और नीति निर्माण पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने बताया कि आईआईएफटी अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अनुसंधान गतिविधियों को लगातार विस्तार दे रहा है ताकि भारत वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत कर सके।
प्रबंधन शिक्षा और एआई पर विशेष फोकस
सम्मेलन के दौरान आयोजित निदेशक सम्मेलन में बिजनेस स्कूलों के भविष्य और प्रबंधन शिक्षा में नई तकनीकों के उपयोग पर विशेष चर्चा की जा रही है।
इसमें प्रमुख रूप से निम्न विषय शामिल हैं:
- बिजनेस स्कूलों के लिए अंतरराष्ट्रीयकरण रणनीतियां
- प्रबंधन शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग
- बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में शिक्षण पद्धतियां
- उच्च शिक्षा में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा
- वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप कौशल विकास
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई और डिजिटल तकनीकें आने वाले वर्षों में प्रबंधन शिक्षा और व्यवसाय संचालन के तरीकों को पूरी तरह बदल सकती हैं।
विभिन्न क्षेत्रों में प्रस्तुत किए जा रहे शोध
जीबीआरसी 2026 में देश और विदेश के शोधकर्ताओं द्वारा विभिन्न विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। इनमें प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं:
- वित्त और बैंकिंग
- विपणन और उपभोक्ता व्यवहार
- वैश्विक व्यापार और प्रतिस्पर्धा
- संचालन एवं आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन
- सूचना प्रौद्योगिकी और डेटा विश्लेषण
- सार्वजनिक नीति और शासन
- रणनीतिक प्रबंधन
तकनीकी सत्रों के माध्यम से शोधकर्ता समकालीन आर्थिक और व्यावसायिक चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत कर रहे हैं। इन शोधों से नीति निर्माण और उद्योग जगत को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
ब्रिक्स देशों की भूमिका पर विशेष सत्र
सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण “बहुध्रुवीय दुनिया में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच ब्रिक्स” विषय पर आयोजित विशेष सत्र है।
इस चर्चा में वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में ब्रिक्स देशों की बढ़ती भूमिका, व्यापारिक सहयोग, निवेश अवसरों और भविष्य की आर्थिक रणनीतियों पर विचार किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रिक्स समूह आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक संतुलन को प्रभावित करने वाली प्रमुख शक्ति बन सकता है और भारत इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
युवा शोधार्थियों को मिला मंच
सम्मेलन में डॉक्टरेट शोधार्थियों के लिए विशेष संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया है। इसका उद्देश्य युवा शोधकर्ताओं को वरिष्ठ शिक्षाविदों और उद्योग विशेषज्ञों के साथ संवाद का अवसर प्रदान करना है।
इस पहल से शोध की गुणवत्ता को बढ़ावा मिलेगा और अकादमिक सहयोग के नए अवसर विकसित होंगे। सम्मेलन युवा प्रतिभाओं को वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था से जुड़े विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करने का मंच भी प्रदान कर रहा है।
देश के शीर्ष संस्थानों की भागीदारी
जीबीआरसी 2026 में देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के कुलपति, निदेशक और वरिष्ठ शिक्षाविद भाग ले रहे हैं। इनमें आईआईएम, आईआईटी बॉम्बे, इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी), एमडीआई गुड़गांव, बीआईएमटेक, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, आईआईएलएम विश्वविद्यालय, आईआईएमसी और जिंदल ग्लोबल बिजनेस स्कूल जैसे संस्थान शामिल हैं।
इन संस्थानों की भागीदारी सम्मेलन को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष महत्व प्रदान करती है।
5 जून को होगा समापन
दो दिवसीय सम्मेलन का समापन 5 जून 2026 को होगा। समापन सत्र में सम्मेलन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी और विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट शोध कार्यों को सम्मानित किया जाएगा।
सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र, सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुति, सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरेट शोध पत्र और विभिन्न विषयगत श्रेणियों में उत्कृष्ट योगदान के लिए पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीबीआरसी 2026 न केवल अकादमिक जगत के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा, बल्कि वैश्विक व्यापार, आर्थिक नीति और प्रबंधन शिक्षा के क्षेत्र में भी नए विचारों और रणनीतियों को जन्म देगा। ऐसे समय में जब दुनिया आर्थिक और भू-राजनीतिक बदलावों के दौर से गुजर रही है, यह सम्मेलन भारत की बौद्धिक और आर्थिक नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करने का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है।

