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Home कृषि समाचार

आंध्र प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र को मिलेगा नया बल, केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने विशाखापत्तनम की अत्याधुनिक जलीय कृषि सुविधाओं का किया दौरा

Andhra Pradesh's fisheries sector to get a boost, Union Secretary Dr. Abhilaksha Likhi visits state-of-the-art aquaculture facilities in Visakhapatnam

Emran Khan by Emran Khan
June 5, 2026
in कृषि समाचार
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आंध्र प्रदेश के मत्स्य क्षेत्र को मिलेगा नया बल, केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने विशाखापत्तनम की अत्याधुनिक जलीय कृषि सुविधाओं का किया दौरा
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भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के मत्स्य पालन विभाग के केंद्रीय सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम स्थित प्रमुख जलीय कृषि एवं समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थानों का दौरा कर देश के मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा देने वाली पहलों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने एमपीईडीए-आरसीसीए के पेनियस मोनोडॉन ब्रूड मल्टीप्लिकेशन सेंटर (बीएमसी) तथा आईसीएआर-सीएमएफआरआई के समुद्री मत्स्य ब्रूडस्टॉक एवं हैचरी केंद्र का निरीक्षण किया और गुणवत्तापूर्ण ब्रूडस्टॉक तथा मत्स्य बीज उत्पादन से जुड़ी गतिविधियों का मूल्यांकन किया।

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात वित्तीय वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड ₹73,890.46 करोड़ (8.45 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज, आधुनिक जलीय कृषि तकनीक और मजबूत अनुसंधान व्यवस्था भारत को वैश्विक समुद्री खाद्य बाजार में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगी।

वैज्ञानिकों और किसानों से की सीधी बातचीत

दौरे के दौरान डॉ. अभिलक्ष लिखी ने वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, मत्स्य किसानों और संस्थान के कर्मचारियों के साथ विस्तार से बातचीत की। उन्होंने चल रहे अनुसंधान कार्यों, ब्रूडस्टॉक विकास कार्यक्रमों और झींगा जलीय कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने वाली परियोजनाओं की जानकारी प्राप्त की।

इस दौरान कई महत्वपूर्ण चुनौतियां भी सामने आईं, जिनमें कमजोर बाजार संपर्क, उत्पादन सामग्री की बढ़ती लागत, बिजली खर्च में वृद्धि तथा किसानों और उद्यमियों के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण की आवश्यकता प्रमुख रही।

केंद्रीय सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB) और आंध्र प्रदेश सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करें, ताकि आधुनिक तकनीकों का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सके।

ब्लैक टाइगर झींगा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

विशाखापत्तनम में स्थापित ब्रूड मल्टीप्लिकेशन सेंटर (BMC) को भारत के झींगा जलीय कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

यह केंद्र उच्च गुणवत्ता वाले स्पेसिफिक पैथोजन फ्री (SPF) पेनियस मोनोडॉन यानी ब्लैक टाइगर झींगा के ब्रूडस्टॉक का उत्पादन और आपूर्ति करेगा। इससे भारत की आयातित ब्रूडस्टॉक पर निर्भरता कम होगी और देश में ही बेहतर गुणवत्ता वाले झींगा बीज उपलब्ध हो सकेंगे।

विशेषज्ञों के अनुसार इससे जैव-सुरक्षा मजबूत होगी, रोगों का जोखिम कम होगा तथा झींगा उत्पादन में वृद्धि होगी। परिणामस्वरूप किसानों की आय बढ़ेगी और निर्यात क्षमता भी मजबूत होगी।

रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा समुद्री उत्पाद निर्यात

भारत के समुद्री उत्पाद क्षेत्र ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस अवधि में देश से 19.72 लाख मीट्रिक टन समुद्री उत्पादों का निर्यात किया गया, जिससे कुल निर्यात मूल्य ₹73,890.46 करोड़ तक पहुंच गया।

यह उपलब्धि भारतीय समुद्री खाद्य उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग का संकेत है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय झींगा, मछली और अन्य समुद्री उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि गुणवत्तापूर्ण बीज, आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाएं और अनुसंधान आधारित उत्पादन तकनीकों का विस्तार जारी रहा तो भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक समुद्री खाद्य निर्यात में और बड़ी भूमिका निभा सकता है।

एमपीईडीए की भूमिका बनी सफलता की कुंजी

समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) इस क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। संस्था गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन, ब्रूडस्टॉक विकास, प्रमाणन प्रणाली, ट्रेसेबिलिटी व्यवस्था और निर्यात अवसंरचना के विकास में सक्रिय सहयोग प्रदान कर रही है।

एमपीईडीए द्वारा हैचरी विकास, आधुनिक एक्वाकल्चर तकनीकों के प्रसार और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

मत्स्य उत्पादन में अग्रणी है आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश वर्तमान में भारत का सबसे बड़ा जलीय कृषि उत्पादक और समुद्री खाद्य निर्यातक राज्य है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में राज्य का कुल जलीय कृषि उत्पादन 55.39 लाख टन दर्ज किया गया।

राज्य की लंबी समुद्री तटरेखा, विकसित जलीय कृषि अवसंरचना, आधुनिक प्रसंस्करण इकाइयों और निर्यात सुविधाओं ने इसे देश का प्रमुख मत्स्य केंद्र बना दिया है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत राज्य को ₹2,324.17 करोड़ की विभिन्न परियोजनाओं की मंजूरी दी गई है, जिससे मत्स्य क्षेत्र में व्यापक निवेश हो रहा है।

आधुनिक मत्स्य अवसंरचना का तेजी से विकास

आंध्र प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र को आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।

विशाखापत्तनम, विजयनगरम, काकीनाडा, तिरुपति और अनकापल्ली में कुल ₹126.91 करोड़ की लागत से छह आधुनिक एकीकृत मत्स्य अवतरण केंद्र विकसित किए जा रहे हैं।

इसके अलावा पुदिमडाका, बुडगतलापालेम और कोठापटनम में ₹1,137.20 करोड़ की लागत से तीन बड़े मत्स्य बंदरगाहों का निर्माण किया जा रहा है।

वहीं बापटला में ₹88.08 करोड़ की लागत से एक अत्याधुनिक एकीकृत एक्वा पार्क विकसित किया जा रहा है, जो मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा देगा।

आईसीएआर-सीएमएफआरआई बना अनुसंधान का प्रमुख केंद्र

विशाखापत्तनम स्थित आईसीएआर-सीएमएफआरआई क्षेत्रीय केंद्र देश में समुद्री मत्स्य अनुसंधान का प्रमुख संस्थान है।

यह केंद्र समुद्री संसाधन आकलन, समुद्री जल कृषि, जैव विविधता संरक्षण, समुद्री मछली पालन और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज उत्पादन पर कार्य कर रहा है।

संस्थान में आधुनिक मरीन फिनफिश हैचरी, केज फार्मिंग सिस्टम, रीसर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर यूनिट और लाइव फीड प्रयोगशालाएं स्थापित हैं। यहां विकसित तकनीकें देश के समुद्री कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी मत्स्य क्षेत्र की ओर बढ़ता भारत

विशाखापत्तनम का यह दौरा केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं था, बल्कि भारत के मत्स्य क्षेत्र को आत्मनिर्भर, आधुनिक और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

गुणवत्तापूर्ण ब्रूडस्टॉक, आधुनिक अवसंरचना, वैज्ञानिक अनुसंधान और किसानों के क्षमता निर्माण पर केंद्रित सरकार की रणनीति से आने वाले वर्षों में भारत का समुद्री खाद्य क्षेत्र नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रयास न केवल किसानों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाएंगे, बल्कि भारत को वैश्विक समुद्री उत्पाद बाजार में एक मजबूत और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने में भी मदद करेंगे।

 

Tags: AgricultureAnimal HusbandryFarmingFisheries
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