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Home कृषि समाचार

कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण जरूरी : शिवराज सिंह चौहान

A 'whole of government' approach is necessary for the overall development of the agriculture sector: Shivraj Singh Chouhan

Emran Khan by Emran Khan
June 24, 2026
in कृषि समाचार
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कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ दृष्टिकोण जरूरी : शिवराज सिंह चौहान
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देश के कृषि क्षेत्र को अधिक मजबूत, आधुनिक और किसान-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में “भारत की कृषि का रूपांतरण” विषय पर एक महत्वपूर्ण अंतर-मंत्रालयी सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ और ‘होल वैल्यू चेन’ दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया।

बैठक में केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, कृषि विशेषज्ञ तथा नीति-निर्माता शामिल हुए। वहीं केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री Rajiv Ranjan Singh वर्चुअल माध्यम से सम्मेलन में जुड़े।

कृषि विकास के लिए समन्वित प्रयासों पर जोर

सम्मेलन के दौरान कृषि, बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और ग्रामीण विकास जैसे क्षेत्रों में बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विस्तृत चर्चा हुई। केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसके लिए सभी विभागों तथा संस्थानों को मिलकर काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कृषि क्षेत्र के लिए अनेक योजनाएं और कार्यक्रम शुरू किए गए हैं, लेकिन इनका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नीति निर्माण के साथ-साथ उसे जमीन पर उतारना भी उतना ही आवश्यक है।

केवल योजनाएं नहीं, प्रभावी क्रियान्वयन भी जरूरी

अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि सुधारों को लेकर केंद्र सरकार लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि देश में किसानों के हित में अनेक योजनाएं पहले से संचालित हैं, लेकिन कई बार उनके कार्यान्वयन में आने वाली बाधाएं अपेक्षित परिणामों को प्रभावित करती हैं।

उन्होंने कहा कि सम्मेलन में प्राप्त सुझावों को केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें ठोस कार्य योजनाओं में बदलकर धरातल पर लागू किया जाएगा। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ कृषि विश्वविद्यालयों, अनुसंधान संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों, निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और किसान संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ मॉडल से मिलेगा लाभ

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न विभागों की योजनाओं में बेहतर तालमेल आवश्यक है। उन्होंने बताया कि फसल उत्पादन, बागवानी, डेयरी, पशुपालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को अलग-अलग देखने के बजाय एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना होगा।

उन्होंने कहा कि ‘होल ऑफ गवर्नमेंट’ मॉडल के तहत सभी मंत्रालय और विभाग साझा लक्ष्यों के साथ कार्य करेंगे, जबकि ‘होल वैल्यू चेन’ दृष्टिकोण किसानों को उत्पादन से लेकर विपणन तक हर स्तर पर सहायता प्रदान करेगा।

मंत्री ने राज्यों के कृषि रोडमैप को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उनका कहना था कि कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

फल-सब्जियों के नुकसान को कम करने पर फोकस

बैठक में फल और सब्जियों के भंडारण तथा प्रसंस्करण से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में बड़ी मात्रा में फल और सब्जियां समय से पहले खराब हो जाती हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

उन्होंने बताया कि विभिन्न राज्यों में विशेष कृषि उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने और क्लस्टर आधारित विकास को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ-साथ कृषि उत्पादों की बाजार पहुंच भी मजबूत होगी।

कृषि में तकनीक का विस्तार, लेकिन मानवीय दृष्टिकोण जरूरी

सम्मेलन में डिजिटल कृषि और नई तकनीकों के उपयोग पर विशेष चर्चा हुई। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र में डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा आधारित प्रणालियां किसानों के लिए कई नई संभावनाएं लेकर आई हैं।

उन्होंने ‘एग्रीस्टैक’ और ‘फार्मर आईडी’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन योजनाओं का पूरा लाभ तभी मिलेगा जब इन्हें भूमि अभिलेखों और खेतों की वास्तविक जानकारी से प्रभावी ढंग से जोड़ा जाएगा।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक का उपयोग करते समय मानवीय पहलुओं की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उनके अनुसार तकनीक तभी सफल होगी जब वह किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप और उनके लिए उपयोगी साबित हो।

पूर्वोत्तर भारत में कृषि निर्यात की अपार संभावनाएं

केंद्रीय कृषि मंत्री ने पूर्वोत्तर भारत को कृषि विकास की दृष्टि से अत्यंत संभावनाशील क्षेत्र बताया। उन्होंने कहा कि वहां की जलवायु और प्राकृतिक परिस्थितियां कई विशिष्ट कृषि उत्पादों के लिए उपयुक्त हैं।

उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर राज्यों में अदरक, हल्दी, कंद फसलें और विभिन्न प्रकार की विशेष मिर्चों का उत्पादन उच्च गुणवत्ता के साथ किया जाता है। यदि इन उत्पादों के लिए उचित प्रसंस्करण, भंडारण और निर्यात सुविधाएं विकसित की जाएं तो उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बड़ी पहचान मिल सकती है।

इस दिशा में आगे की रणनीति तैयार करने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कृषि मंत्रियों के साथ क्षेत्रीय स्तर की विशेष बैठक आयोजित करने की योजना भी बनाई जा रही है।

सुझावों को तीन श्रेणियों में लागू करने की तैयारी

सम्मेलन के दौरान प्राप्त सुझावों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक व्यवस्थित रणनीति तैयार की गई। केंद्रीय मंत्री ने निर्देश दिया कि सभी अनुशंसाओं को तीन श्रेणियों में विभाजित किया जाए।

पहली श्रेणी में वे सुझाव होंगे जिन्हें तुरंत लागू किया जा सकता है। दूसरी श्रेणी में वे सुझाव शामिल होंगे जिन्हें वर्तमान योजनाओं में सुधार करके लागू किया जा सकेगा। वहीं तीसरी श्रेणी में दीर्घकालिक नीतिगत बदलावों और नई योजनाओं से जुड़े प्रस्ताव रखे जाएंगे।

उन्होंने बताया कि इन सुझावों की निगरानी और प्रगति की समीक्षा के लिए एक विशेष टीम गठित की जाएगी, जो नियमित रूप से कार्यों की समीक्षा करेगी।

जलवायु चुनौतियों से निपटने की तैयारी

बैठक में जलवायु परिवर्तन, जल संकट और अल नीनो जैसी संभावित चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने कृषि और मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी देश तैयार है।

उन्होंने कहा कि संसाधनों के बेहतर उपयोग, तकनीकी नवाचार और समन्वित प्रयासों के माध्यम से कृषि क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से सम्मेलन में हुई चर्चाओं को धरातल पर उतारने के लिए गंभीर प्रयास करने का आह्वान किया।

विकसित भारत के लक्ष्य में कृषि की अहम भूमिका

सम्मेलन के अंत में यह स्पष्ट संदेश सामने आया कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए कृषि क्षेत्र का आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी होना अनिवार्य है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि केंद्र और राज्य सरकारें, वैज्ञानिक संस्थान, निजी क्षेत्र और किसान मिलकर कार्य करें तो भारतीय कृषि वैश्विक स्तर पर नई पहचान बना सकती है।

कृषि भवन में आयोजित यह सम्मेलन केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कृषि क्षेत्र के लिए एक व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी कार्ययोजना तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इससे किसानों की आय बढ़ाने, कृषि को आधुनिक बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के प्रयासों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

 

Tags: AgricultureFarmingIndian Agriculture
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