• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

कोरोमंडल इंटरनेशनल और आईआईकेयर फाउंडेशन ने मिलाया हाथ, महाराष्ट्र में शुरू होगा जल संरक्षण और पर्यावरण बहाली का बड़ा अभियान

महाराष्ट्र में जल संरक्षण और एग्रो-फॉरेस्ट्री को बढ़ावा देगा कोरोमंडल और IICARE Foundation का नया अभियान

Emran Khan by Emran Khan
July 1, 2026
in कृषि समाचार
0
कोरोमंडल इंटरनेशनल और आईआईकेयर फाउंडेशन ने मिलाया हाथ, महाराष्ट्र में शुरू होगा जल संरक्षण और पर्यावरण बहाली का बड़ा अभियान
0
SHARES
2
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

देश की अग्रणी एग्री-सॉल्यूशंस कंपनी कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड और पर्यावरण संरक्षण एवं सामुदायिक विकास के क्षेत्र में कार्यरत गैर-लाभकारी संस्था IICARE Foundation ने महाराष्ट्र के सतारा जिले में एक महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू करने के लिए समझौता (MoU) किया है। इस साझेदारी के तहत फलटण तहसील के जवाली क्षेत्र में इंटीग्रेटेड वाटरशेड, एग्रो-फॉरेस्ट्री, नर्सरी डेवलपमेंट और लैंडस्केप रिस्टोरेशन प्रोग्राम लागू किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य जल संरक्षण, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार, जैव विविधता का संरक्षण, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से किसानों को सुरक्षित बनाना है। यह परियोजना वैज्ञानिक तकनीकों और स्थानीय समुदाय की भागीदारी के माध्यम से एक ऐसा मॉडल तैयार करेगी, जिसे भविष्य में देश के अन्य क्षेत्रों में भी अपनाया जा सके।

जल संरक्षण और पर्यावरण बहाली पर रहेगा विशेष फोकस

आज जलवायु परिवर्तन, भूजल स्तर में गिरावट और भूमि क्षरण भारतीय कृषि के सामने बड़ी चुनौतियां बन चुकी हैं। ऐसे समय में कोरोमंडल इंटरनेशनल और IICARE Foundation की यह संयुक्त पहल ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

इस परियोजना में जलग्रहण क्षेत्र (Watershed) का विकास, एग्रो-फॉरेस्ट्री, स्थानीय प्रजातियों के वृक्षारोपण, पौधशालाओं की स्थापना, मिट्टी एवं जल संरक्षण और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय भागीदारी को एकीकृत रूप से लागू किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्राकृतिक संसाधनों का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जाए तो किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

IICARE Foundation निभाएगी प्रमुख भूमिका

इस समझौते के तहत IICARE Foundation परियोजना की प्रमुख कार्यान्वयन एवं समन्वय संस्था होगी। फाउंडेशन स्थानीय किसानों, ग्राम समुदायों, स्वयं सहायता समूहों, सरकारी विभागों, तकनीकी संस्थानों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर परियोजना को जमीन पर उतारेगी।

वहीं कोरोमंडल इंटरनेशनल अपनी कृषि विशेषज्ञता और तकनीकी अनुभव के माध्यम से परियोजना को वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगी। कंपनी मृदा एवं पोषक तत्व प्रबंधन, फसल चयन, एग्रो-फॉरेस्ट्री डिज़ाइन, नर्सरी विकास और जलग्रहण आधारित कृषि समाधान जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएगी।

चरणबद्ध तरीके से लागू होगी परियोजना

यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम कई चरणों में लागू किया जाएगा ताकि प्रत्येक गतिविधि को वैज्ञानिक तरीके से पूरा किया जा सके।

पहले चरण में परियोजना क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके अंतर्गत मिट्टी और जल का परीक्षण, भूमि की क्षमता का अध्ययन, जल प्रवाह का विश्लेषण, कंटूर मैपिंग, पौधशाला की योजना, उपयुक्त पौधों का चयन तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी।

इसके बाद दूसरे चरण में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इस दौरान पौधशालाओं की स्थापना, मिट्टी एवं जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण, स्थानीय प्रजातियों का वृक्षारोपण, एग्रो-फॉरेस्ट्री मॉडल का प्रदर्शन, किसानों का प्रशिक्षण और सामुदायिक क्षमता निर्माण जैसी गतिविधियां संचालित की जाएंगी।

परियोजना के सफल परिणामों के आधार पर इसे बड़े स्तर पर अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार देने की योजना बनाई जाएगी।

“नर्सरी फर्स्ट” और “पायलट टू स्केल” मॉडल अपनाया जाएगा

इस परियोजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका “Nursery First” और “Pilot to Scale” मॉडल है।

इसके तहत पहले स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार उच्च गुणवत्ता वाले पौधों की नर्सरी तैयार की जाएगी। इसके बाद सीमित क्षेत्र में परियोजना का परीक्षण किया जाएगा और सकारात्मक परिणाम मिलने पर इसे व्यापक स्तर पर लागू किया जाएगा।

इस रणनीति से परियोजना की सफलता की संभावना बढ़ेगी तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।

स्थानीय प्रजातियों के पौधों को मिलेगा बढ़ावा

परियोजना में विशेष रूप से स्थानीय एवं मिश्रित प्रजातियों के पौधों का रोपण किया जाएगा। इससे क्षेत्र की जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय प्रजातियां कम पानी में भी बेहतर विकसित होती हैं और पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होने के कारण उनकी जीवित रहने की संभावना अधिक रहती है।

वृक्षारोपण के साथ-साथ किसानों को एग्रो-फॉरेस्ट्री मॉडल अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे खेती और वानिकी दोनों से अतिरिक्त आय प्राप्त हो सके।

भूजल संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता पर विशेष ध्यान

परियोजना के तहत भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण, वर्षा जल संचयन, कंटूर ट्रेंच, चेक डैम और अन्य वैज्ञानिक उपाय अपनाए जाएंगे।

साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के लिए जैविक पदार्थों के उपयोग, पोषक तत्वों के संतुलित प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि स्वस्थ मिट्टी और पर्याप्त जल उपलब्धता कृषि उत्पादन बढ़ाने की सबसे महत्वपूर्ण शर्तें हैं।

किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन

इस कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय किसानों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

उन्हें जल संरक्षण, पौध प्रबंधन, एग्रो-फॉरेस्ट्री, मिट्टी संरक्षण, जैव विविधता संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की जानकारी दी जाएगी।

इससे किसान बदलते जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप खेती करने में सक्षम होंगे और उनकी आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

वैज्ञानिक तरीके से होगी परियोजना की निगरानी

परियोजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक मॉनिटरिंग प्रणाली विकसित की जाएगी।

इस दौरान कई प्रमुख संकेतकों के आधार पर परियोजना की प्रगति का मूल्यांकन किया जाएगा, जिनमें—

  • पुनर्स्थापित भूमि का क्षेत्रफल
  • पौधों के जीवित रहने की दर
  • जैव विविधता में वृद्धि
  • जल संरक्षण के परिणाम
  • मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार
  • किसानों की भागीदारी
  • सामुदायिक सहयोग

जैसे महत्वपूर्ण पहलू शामिल होंगे।

कोरोमंडल इंटरनेशनल ने क्या कहा?

कोरोमंडल इंटरनेशनल के कार्यकारी निदेशक (न्यूट्रिएंट बिजनेस) नारायणन वेल्लयन ने कहा कि यह साझेदारी टिकाऊ कृषि और ग्रामीण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कंपनी की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक कृषि तकनीक, मिट्टी एवं जल प्रबंधन तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से यह परियोजना खराब हो चुकी भूमि को पुनर्जीवित करने और किसानों की आजीविका को मजबूत करने का एक व्यवहारिक एवं विस्तार योग्य मॉडल तैयार करेगी।

IICARE Foundation ने जताया विश्वास

IICARE Foundation के निदेशक डॉ. संतोष भोसले ने कहा कि जवाली परियोजना जलग्रहण विकास, पर्यावरण बहाली और जलवायु अनुकूल कृषि को एकीकृत रूप में लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

उन्होंने कहा कि कोरोमंडल इंटरनेशनल की तकनीकी विशेषज्ञता इस परियोजना को मजबूत वैज्ञानिक आधार प्रदान करेगी तथा भविष्य में इसे देश के अन्य समान क्षेत्रों में भी सफलतापूर्वक लागू किया जा सकेगा।

किसानों और पर्यावरण दोनों को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ग्रामीण विकास का एक समग्र मॉडल प्रस्तुत करेगी।

इससे—

  • किसानों की आय बढ़ेगी।
  • जल संरक्षण बेहतर होगा।
  • भूजल स्तर में सुधार आएगा।
  • मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी।
  • जैव विविधता का संरक्षण होगा।
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभाव कम होंगे।
  • ग्रामीण रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
  • टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलेगा।

कोरोमंडल इंटरनेशनल के बारे में

कोरोमंडल इंटरनेशनल भारत की अग्रणी एग्री-सॉल्यूशंस कंपनियों में शामिल है। कंपनी उर्वरक, फसल सुरक्षा उत्पाद, बायो प्रोडक्ट्स, स्पेशलिटी न्यूट्रिएंट्स और ऑर्गेनिक कृषि उत्पादों के क्षेत्र में कार्य करती है।

देशभर में इसके 21 विनिर्माण संयंत्र, 8 अनुसंधान एवं विकास केंद्र तथा 1200 से अधिक ग्रामीण रिटेल आउटलेट हैं, जिनके माध्यम से लगभग 30 लाख किसानों को कृषि उत्पाद, मृदा परीक्षण, फसल परामर्श और कृषि मशीनीकरण जैसी सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।

महाराष्ट्र के सतारा जिले में शुरू होने वाला कोरोमंडल इंटरनेशनल और IICARE Foundation का यह संयुक्त कार्यक्रम केवल एक पर्यावरण परियोजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में टिकाऊ विकास का एक नया मॉडल बनने की क्षमता रखता है। जल संरक्षण, एग्रो-फॉरेस्ट्री, स्थानीय पौधों के संरक्षण, वैज्ञानिक कृषि और सामुदायिक भागीदारी को एक साथ जोड़ने वाली यह पहल आने वाले वर्षों में किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करने और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

यदि यह मॉडल सफल होता है, तो इसे देश के अन्य सूखा प्रभावित और भूमि क्षरण वाले क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है, जिससे भारत में टिकाऊ कृषि और ग्रामीण विकास को नई दिशा मिलेगी।

Previous Post

ICSCE दिल्ली 2026: भारत बना वैश्विक कृषि इनपुट उद्योग का केंद्र, 1500 से अधिक प्रतिनिधियों ने की भागीदारी

Next Post

खरीफ फसल बुवाई 2026: पिछले साल से 53.74 लाख हेक्टेयर कम रकबा, धान, सोयाबीन और कपास की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट

Next Post
खरीफ फसल बुवाई 2026: पिछले साल से 53.74 लाख हेक्टेयर कम रकबा, धान, सोयाबीन और कपास की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट

खरीफ फसल बुवाई 2026: पिछले साल से 53.74 लाख हेक्टेयर कम रकबा, धान, सोयाबीन और कपास की बुवाई में सबसे बड़ी गिरावट

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • Moringa Farming: कम लागत में ज्यादा मुनाफे वाली खेती
  • PMKSY 2.0: उत्तराखंड को मिली ₹31.58 करोड़ की अतिरिक्त सहायता, किसानों को मिलेगा सिंचाई और जल संरक्षण का बड़ा लाभ
  • यूपी एग्री जंक्शन योजना: कृषि क्षेत्र में पढ़े-लिखे युवाओं के लिए रोजगार का शानदार मौका
  • राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026: विकसित भारत के लिए तैयार हुआ नया रोडमैप, ग्रामीण महिला उद्यमियों को मिलेगा बड़ा बाजार
  • VB-G RAM G Act 2025: ग्रामीण मजदूरों को बड़ी सौगात, 1 जुलाई से 300 रुपये न्यूनतम दैनिक मजदूरी, कई राज्यों में 25% तक बढ़ी मजदूरी

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.