• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

आत्मनिर्भर पंचायतों से मजबूत होगा ग्रामीण भारत, कोच्चि में पंचायती राज मंत्रालय की तीसरी राष्ट्रीय आउटरीच कार्यशाला आयोजित

आत्मनिर्भर पंचायतों से मजबूत होगा ग्रामीण भारत

Emran Khan by Emran Khan
July 8, 2026
in कृषि समाचार
0
Self-reliant Panchayats will strengthen rural India

Self-reliant Panchayats will strengthen rural India

0
SHARES
3
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

ग्रामीण भारत को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और पंचायतों को आत्मनिर्भर विकास का केंद्र बनाने की दिशा में भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने केरल सरकार के स्थानीय स्वशासन विभाग के सहयोग से कोच्चि में ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’ पर तीसरी राष्ट्रीय आउटरीच कार्यशाला का आयोजन किया। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस कार्यशाला में राज्यभर की 800 से अधिक पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों, अधिकारियों और विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य पंचायतों को स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग, स्वयं के राजस्व स्रोतों को मजबूत करने तथा बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण योग्य विकास परियोजनाएं तैयार करने के लिए प्रेरित करना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने कहा कि ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’ केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में आर्थिक परिवर्तन का एक व्यापक अभियान है। उन्होंने कहा कि यदि पंचायतें आर्थिक रूप से मजबूत होंगी तो वे स्थानीय स्तर पर विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से लागू कर सकेंगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, आधारभूत सुविधाओं तथा जनकल्याण कार्यों को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि पंचायतें लोकतंत्र की सबसे मजबूत इकाई हैं और जमीनी स्तर पर विकास की वास्तविक वाहक हैं। स्थानीय समुदायों को संगठित करना, नवाचार को बढ़ावा देना, जनभागीदारी सुनिश्चित करना और विकास योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू करना पंचायतों की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने सभी हितधारकों से वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आर्थिक रूप से सक्षम, आधुनिक और भविष्य के लिए तैयार पंचायतों के निर्माण का आह्वान किया।

पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

केरल सरकार के स्थानीय स्वशासन विभाग के मंत्री श्री के.एम. शाजी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रभावी स्थानीय शासन के लिए पंचायतों का आर्थिक रूप से मजबूत होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पंचायतों को अनेक नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं, लेकिन इन जिम्मेदारियों को सफलतापूर्वक निभाने के लिए उनके स्वयं के राजस्व स्रोतों का सुदृढ़ होना भी उतना ही जरूरी है।

उन्होंने पंचायतों से स्थानीय संसाधनों की पहचान कर उन्हें आय के स्थायी स्रोतों में बदलने का आग्रह किया। उनका मानना था कि यदि पंचायतें अपनी वित्तीय क्षमता बढ़ाती हैं तो वे सरकारी अनुदानों पर निर्भरता कम कर आत्मनिर्भर विकास मॉडल विकसित कर सकती हैं।

स्थानीय संसाधनों से विकास का नया मॉडल

कार्यशाला में केरल सरकार के स्थानीय स्वशासन विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती टिंकू बिस्वाल ने राज्य में स्थानीय शासन व्यवस्था और क्षमता विकास के लिए विकसित संस्थागत ढांचे की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मजबूत संस्थागत सहयोग और निरंतर प्रशिक्षण के माध्यम से पंचायतों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

वहीं, केरल स्थानीय प्रशासन संस्थान (KILA) के महानिदेशक डॉ. एन. देवीदास ने बताया कि केरल में वर्षों से चल रहे क्षमता विकास कार्यक्रमों, प्रशिक्षण और संस्थागत सहयोग ने लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि पंचायत प्रतिनिधियों की दक्षता बढ़ाने से ग्रामीण विकास योजनाओं के बेहतर परिणाम सामने आए हैं।

विकास योजनाओं को ग्राम पंचायत विकास योजना से जोड़ने की अपील

स्थानीय स्वशासन विभाग की प्रधान निदेशक डॉ. दिव्या एस. अय्यर ने पंचायत प्रतिनिधियों से दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पंचायतों को स्थानीय आवश्यकताओं की पहचान कर पेशेवर तरीके से विकास परियोजनाएं तैयार करनी चाहिए और उन्हें ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) से जोड़ना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि परियोजनाएं तकनीकी रूप से मजबूत और आर्थिक रूप से व्यवहार्य होंगी तो उन्हें वित्तीय संस्थानों से सहायता प्राप्त करना भी आसान होगा। इससे स्थानीय स्तर पर स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण और राजस्व सृजन दोनों संभव होंगे।

नाबार्ड और हुडको ने बताई वित्तीय सहायता की संभावनाएं

कार्यशाला में नाबार्ड और हुडको के प्रतिनिधियों ने भी पंचायतों को उपलब्ध संस्थागत सहयोग की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पंचायतें यदि व्यवहारिक और राजस्व उत्पन्न करने वाली परियोजनाएं तैयार करती हैं तो उन्हें तकनीकी सहायता, परियोजना मूल्यांकन तथा वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराया जा सकता है।

विशेषज्ञों ने पंचायतों को सलाह दी कि वे स्थानीय कृषि, पर्यटन, जल संरक्षण, बाजार, सामुदायिक परिसंपत्तियों और अन्य संसाधनों पर आधारित विकास परियोजनाएं तैयार करें, ताकि दीर्घकाल में पंचायतों की आय बढ़ाई जा सके।

तकनीकी सत्रों में मिली व्यावहारिक जानकारी

कार्यशाला के दौरान कई तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें पंचायत प्रतिनिधियों को विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने, परियोजनाओं के वित्तपोषण, सरकारी योजनाओं के समन्वय, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और संस्थागत वित्त से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई।

इसके साथ ही पंचायतों को बताया गया कि वे किस प्रकार राजस्व उत्पन्न करने वाली नवाचारी परियोजनाओं को चैलेंज मोड के माध्यम से प्रस्तुत कर सकती हैं तथा उनके मूल्यांकन और तकनीकी मार्गदर्शन की प्रक्रिया क्या होगी।

संवाद सत्र में मिले सवालों के जवाब

कार्यक्रम के दौरान प्रश्नोत्तर आधारित संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों ने परियोजनाओं की पात्रता, वित्तीय सहायता, तकनीकी प्रक्रियाओं और कार्यक्रम के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज तथा केरल सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।

आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम की विशेषताएं

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (RGSA) के अंतर्गत संचालित आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का उद्देश्य पंचायतों को स्थानीय संसाधनों और सार्वजनिक परिसंपत्तियों की आर्थिक क्षमता का प्रभावी उपयोग करने में सक्षम बनाना है। इस कार्यक्रम के तहत चयनित पंचायतों को ऋण योग्य विकास परियोजनाएं तैयार करने के लिए तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इन परियोजनाओं के वित्तपोषण में पीपीपी मॉडल, सीएसआर फंड, संस्थागत ऋण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के समन्वय का उपयोग किया जाएगा।

कोच्चि में आयोजित यह कार्यशाला मंत्रालय के देशव्यापी अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पंचायतों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना, स्थानीय स्तर पर राजस्व सृजन को बढ़ावा देना और सतत ग्रामीण विकास के लिए नवीन दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

कार्यशाला में 210 से अधिक पंचायतों के प्रतिनिधियों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया, जबकि लगभग 600 पंचायतों ने ऑनलाइन माध्यम से अपनी सहभागिता दर्ज कराई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पंचायतें स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक उपयोग कर स्वयं की आय बढ़ाने में सफल होती हैं, तो ग्रामीण विकास की गति तेज होगी और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की भूमिका और अधिक मजबूत होगी।

Tags: agri newsAgricultureFarmingKocchi
Previous Post

मिजोरम का प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय बना भारत का 21वां ‘निर्दिष्ट भंडार’, जैव विविधता संरक्षण को मिलेगी नई मजबूती

Next Post

राजस्थान के हर गांव के समग्र विकास को मिलेगी नई गति, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा

Next Post
ग्राम चौपाल मॉडल की सराहना

राजस्थान के हर गांव के समग्र विकास को मिलेगी नई गति, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • Bahu Rajya Niti: बहु-राज्य सहकारी समिति संशोधन नीति: पूरी जानकारी, उद्देश्य, नियम और लाभ
  • NCDC Yojana: ग्रामीण भारत, किसानों और सहकारी समितियों के लिए बड़ा अवसर
  • शोपियां में कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई, संदिग्ध नकली जैव-उर्वरक की खेप जब्त
  • राजस्थान के हर गांव के समग्र विकास को मिलेगी नई गति, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा
  • आत्मनिर्भर पंचायतों से मजबूत होगा ग्रामीण भारत, कोच्चि में पंचायती राज मंत्रालय की तीसरी राष्ट्रीय आउटरीच कार्यशाला आयोजित

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.