पर्वतीय क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि विकास और प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में आईसीएआर-राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग योजना ब्यूरो (ICAR-NBSS&LUP), क्षेत्रीय केंद्र, जोरहाट ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए नागालैंड सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सहयोग से तीन दिवसीय तकनीकी कार्यशाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। यह कार्यक्रम 29 जून से 1 जुलाई 2026 तक कोहिमा में आयोजित किया गया।
“पेरेन जिले के 11 सूक्ष्म जलग्रहण क्षेत्रों में भूमि संसाधन सूची (Land Resource Inventory-LRI) का उपयोग कर प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन एवं मृदा-जल संरक्षण योजना” विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य राज्य के अधिकारियों को आधुनिक भू-स्थानिक (Geospatial) तकनीकों और वैज्ञानिक भूमि संसाधन आंकड़ों के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षित करना था, ताकि जलग्रहण क्षेत्र आधारित कृषि एवं प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक बनाया जा सके।
वैज्ञानिक भूमि आंकड़ों से बनेगी टिकाऊ कृषि की मजबूत नींव
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आईसीएआर-एनबीएसएस एंड एलयूपी के निदेशक डॉ. एन. जी. पाटिल ने कहा कि नागालैंड जैसे पर्वतीय राज्यों में कृषि विकास और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक भूमि संसाधन जानकारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भूमि संसाधन सूची (एलआरआई) किसानों, योजनाकारों और नीति निर्माताओं को सही निर्णय लेने में मदद करती है तथा जल, मिट्टी और भूमि के बेहतर उपयोग का आधार तैयार करती है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक भूमि सर्वेक्षण के आधार पर तैयार योजनाएं न केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने में सहायक होती हैं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों का प्रभावी समाधान भी प्रदान करती हैं।
राज्यभर में एलआरआई लागू करने पर जोर
कार्यक्रम में नागालैंड सरकार के भूमि संसाधन विभाग (DoLR) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अल्बर्ट नगुली ने कहा कि राज्य में बड़े स्तर पर भूमि संसाधन सूची (LRI) तैयार किए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि यदि पूरे राज्य में वैज्ञानिक भूमि संसाधन डाटाबैंक विकसित किया जाए तो कृषि, बागवानी, वानिकी, जल संरक्षण तथा अन्य ग्रामीण विकास परियोजनाओं के लिए अधिक सटीक और प्रभावी योजनाएं बनाई जा सकेंगी।
उन्होंने कहा कि यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, भूमि की उत्पादकता सुधारने और प्राकृतिक संसाधनों के दीर्घकालिक संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आधुनिक तकनीकों का मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को उच्च-रिज़ॉल्यूशन भूमि संसाधन सूची (LRI) के उपयोग से संबंधित कई महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
इसमें मृदा संसाधनों का वैज्ञानिक विश्लेषण, जीआईएस आधारित विषयगत मानचित्रण (GIS Mapping), कॉफी, रबर और सुपारी (अरेका नट) जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की भूमि उपयुक्तता का आकलन, मृदा वर्गीकरण (Soil Taxonomy) तथा वैज्ञानिक आधार पर मृदा एवं जल संरक्षण योजनाएं तैयार करने की तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि इन आधुनिक तकनीकों के माध्यम से प्रत्येक क्षेत्र की मिट्टी, जल उपलब्धता और स्थलाकृतिक विशेषताओं के अनुसार उपयुक्त कृषि प्रणाली विकसित की जा सकती है।
पेरेन जिले के लिए जारी की गई तकनीकी रिपोर्ट
कार्यक्रम के दौरान नागालैंड के पेरेन जिले के चयनित सूक्ष्म जलग्रहण क्षेत्रों के भूमि संसाधन सूचना प्रणाली (Land Resource Information System) पर आधारित तकनीकी रिपोर्ट का भी विमोचन किया गया।
यह रिपोर्ट संबंधित क्षेत्रों की मृदा गुणवत्ता, भूमि उपयोग, जल संसाधनों और संरक्षण संबंधी वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराएगी, जिससे विकास योजनाओं के निर्माण में सहायता मिलेगी।
प्राकृतिक संसाधन संरक्षण को मिलेगा नया आधार
विशेषज्ञों ने बताया कि भूमि संसाधन सूची (LRI) आधारित योजना तैयार करने से जल संरक्षण, मृदा अपरदन नियंत्रण, फसल विविधीकरण और टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा मिलेगा।
इसके माध्यम से किसानों को उनकी भूमि की वास्तविक क्षमता के अनुसार फसल चयन, बागवानी, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की वैज्ञानिक सलाह उपलब्ध कराई जा सकेगी।
भू-स्थानिक मृदा डाटाबेस को मजबूत करने की सिफारिश
कार्यक्रम के समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही यह महत्वपूर्ण सिफारिश की गई कि नागालैंड के प्राथमिकता वाले सभी जलग्रहण क्षेत्रों में एलआरआई आधारित भूमि उपयोग योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए।
इसके अलावा राज्य के भू-स्थानिक मृदा सूचना डाटाबेस (Geospatial Soil Information Database) को और अधिक मजबूत बनाने पर भी जोर दिया गया, ताकि योजनाकारों, नीति निर्माताओं और कृषि विशेषज्ञों को सटीक एवं अद्यतन वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध हो सके।
पर्वतीय कृषि विकास में मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि नागालैंड जैसे पर्वतीय राज्यों में वैज्ञानिक भूमि संसाधन प्रबंधन भविष्य की कृषि रणनीति का महत्वपूर्ण आधार बनेगा। एलआरआई आधारित योजना से भूमि की उत्पादकता बढ़ाने, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधारने और उच्च मूल्य वाली फसलों के वैज्ञानिक विस्तार में सहायता मिलेगी।
आईसीएआर-एनबीएसएस एंड एलयूपी, क्षेत्रीय केंद्र, जोरहाट की यह पहल केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूर्वोत्तर भारत में वैज्ञानिक कृषि योजना, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण और सतत ग्रामीण विकास को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे आने वाले वर्षों में राज्य की कृषि योजनाओं को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और परिणामोन्मुख बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग मिलने की उम्मीद है।

