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Home कृषि समाचार

Azolla cultivation कम लागत में खेती और पशुपालन सुधारने के 9 शक्तिशाली लाभ

Rahul by Rahul
July 15, 2026
in कृषि समाचार, लेख
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किसान कम लागत में पशुपालन के लिए पानी की क्यारी में अजोला की खेती करते हुए।
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अजोला का नाम पिछले कुछ वर्षों में किसानों, पशुपालकों और जैविक खेती में रुचि रखने वाले लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुआ है। यह पानी की सतह पर तैरने वाला एक छोटा जलीय फर्न है, जो अनुकूल वातावरण मिलने पर तेजी से बढ़ता है। देखने में यह हरे या हल्के लाल रंग की छोटी पत्तियों की परत जैसा लगता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से पशुओं के पूरक हरे आहार, धान के खेत में जैव उर्वरक और एकीकृत कृषि प्रणाली के हिस्से के रूप में किया जाता है।

कम जगह, सीमित पानी और साधारण सामग्री से इसका उत्पादन संभव है। फिर भी इसे “चमत्कारी चारा” मानकर बिना जानकारी के शुरू करना ठीक नहीं है। अच्छे परिणाम के लिए स्वच्छ पानी, संतुलित पोषण, उचित छाया और नियमित देखभाल जरूरी होती है।

अजोला (Azolla)  क्या है और यह कैसे बढ़ता है?

Azolla Cultivation के अंतर्गत अजोला एक छोटा तैरता हुआ जलीय पौधा है। इसकी पत्तियाँ बहुत बारीक होती हैं और यह पानी की ऊपरी सतह पर फैलकर हरी चादर बना देता है। इसके साथ प्राकृतिक रूप से रहने वाले सूक्ष्मजीव वातावरण की नाइट्रोजन को उपयोगी रूप में बदलने में सहायता करते हैं। इसी विशेषता के कारण अजोला का उपयोग धान की खेती में हरी खाद और जैविक पोषक स्रोत के रूप में लंबे समय से किया जाता रहा है।

यह सामान्य स्थलीय फसल की तरह मिट्टी में गहरी जड़ें नहीं बनाता। इसलिए Azolla Cultivation के लिए खेत की बड़ी जमीन जरूरी नहीं होती। इसे छोटे टैंक, तिरपाल वाली क्यारी, सीमेंट की नांद या लाइनिंग किए गए गड्ढे में भी आसानी से उगाया जा सकता है। सही तापमान, साफ पानी, हल्की छाया और पर्याप्त पोषण मिलने पर इसकी वृद्धि तेजी से होती है। प्रारंभिक स्थापना के लगभग 10 से 15 दिन बाद सीमित मात्रा में इसकी कटाई शुरू की जा सकती है। इस कारण Azolla Cultivation छोटे किसानों, पशुपालकों और एकीकृत खेती अपनाने वाले लोगों के लिए कम जगह में उपयोगी उत्पादन का अच्छा विकल्प बन सकता है।

किसानों के लिए अजोला क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में छोटे और सीमांत पशुपालकों के सामने हरे चारे की उपलब्धता तथा बाजार से खरीदे जाने वाले पशु आहार की लागत बड़ी चुनौती है। अजोला इस समस्या का पूरा समाधान नहीं है, लेकिन यह पशुओं के नियमित संतुलित राशन में पूरक आहार की भूमिका निभा सकता है।

इसके प्रमुख उपयोग इस प्रकार हैं:

  1. गाय और भैंस के लिए पूरक हरा आहार
  2. बकरी, भेड़, मुर्गी, बतख और कुछ अन्य पशुओं के भोजन में सीमित उपयोग
  3. धान के खेत में हरी खाद
  4. कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट को पोषक बनाने में सहायता
  5. मछली पालन और एकीकृत कृषि मॉडल में उपयोग
  6. अतिरिक्त कल्चर बेचकर सीमित स्थानीय आय की संभावना

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से संबंधित प्रकाशनों में अजोला को पशुओं, पक्षियों और अन्य कृषि जीवों के लिए कम लागत वाले पूरक आहार के रूप में उपयोगी बताया गया है। इसमें प्रोटीन के साथ आवश्यक अमीनो अम्ल, खनिज और कुछ विटामिन पाए जाते हैं।

अजोला (Azolla) का पोषण महत्व

सूखे पदार्थ के आधार पर अजोला में प्रोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है। अलग-अलग प्रजातियों, पानी की गुणवत्ता, पोषण प्रबंधन और उत्पादन परिस्थितियों के कारण इसके पोषक तत्वों में अंतर आता है। कई कृषि स्रोतों में इसकी प्रोटीन मात्रा लगभग 25 से 30 प्रतिशत तक बताई गई है।

अजोला में कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे खनिज भी पाए जा सकते हैं। इसमें पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसलिए एक किलो ताजा अजोला को एक किलो सूखे दाने या खली के बराबर नहीं माना जा सकता।

यह बात विशेष रूप से समझनी चाहिए कि अजोला संपूर्ण पशु राशन का विकल्प नहीं है। पशुओं को सूखा चारा, हरा चारा, दाना मिश्रण, खनिज मिश्रण, नमक और स्वच्छ पानी उनकी आयु, वजन, स्वास्थ्य तथा उत्पादन के अनुसार देना आवश्यक रहता है।

खेती शुरू करने से पहले सही स्थान चुनें

Azolla cultivation के लिए ऐसी जगह चुनें जहाँ पूरे दिन सीधी और तेज धूप न पड़ती हो। हल्की या आंशिक छाया अजोला की अच्छी वृद्धि के लिए अधिक अनुकूल रहती है। पेड़ के नीचे स्थान चुना जा सकता है, लेकिन गिरने वाली पत्तियाँ और टहनियाँ पानी को गंदा कर सकती हैं। इसलिए Azolla cultivation में शेड नेट या स्थानीय सामग्री से बनाया गया छायादार ढाँचा बेहतर नियंत्रण देता है।

अजोला के विकास के लिए सामान्यतः 20 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच का तापमान उपयुक्त माना जाता है। बहुत अधिक गर्मी, कड़ी धूप या अत्यधिक ठंड इसकी वृद्धि को धीमा कर सकती है। सफल Azolla cultivation के लिए पानी का पीएच हल्का अम्लीय से लगभग तटस्थ होना बेहतर रहता है। साथ ही, पानी साफ होना चाहिए और उसमें साबुन, कीटनाशक या अन्य हानिकारक रसायन नहीं मिलने चाहिए।

टैंक या क्यारी का आकार

छोटे पशुपालक शुरुआत में लगभग 6 फीट लंबी और 4 फीट चौड़ी क्यारी बना सकते हैं। यह आकार कोई कठोर नियम नहीं है। पशुओं की संख्या, उपलब्ध स्थान और रोजाना की आवश्यकता के अनुसार टैंक छोटा या बड़ा रखा जा सकता है।

गड्ढे की गहराई लगभग 20 से 30 सेंटीमीटर रखी जा सकती है। नीचे की सतह समतल होनी चाहिए, ताकि किसी एक हिस्से में पानी बहुत अधिक जमा न हो। गड्ढे पर मजबूत प्लास्टिक या सिलपॉलिन शीट बिछाई जा सकती है। किनारों को ईंट, मिट्टी या लकड़ी की सहायता से सुरक्षित रखें।

जरूरी सामग्री

अजोला इकाई स्थापित करने के लिए सामान्यतः निम्न सामग्री चाहिए:

  • मजबूत तिरपाल या सिलपॉलिन शीट
  • साफ और छनी हुई उपजाऊ मिट्टी
  • अच्छी तरह सड़ा हुआ गोबर
  • साफ पानी
  • स्वस्थ अजोला कल्चर
  • छाया के लिए जाल या स्थानीय ढाँचा
  • कटाई के लिए प्लास्टिक की छलनी
  • पानी देने के लिए बाल्टी या पाइप

रासायनिक खाद या गोबर का अत्यधिक प्रयोग न करें। अधिक पोषक तत्व पानी को खराब कर सकते हैं और दुर्गंध, शैवाल या सड़न की समस्या पैदा कर सकते हैं।

Azolla cultivation की चरणबद्ध विधि

1. क्यारी तैयार करें

चुनी हुई जगह को साफ और समतल करें। जमीन पर नुकीले पत्थर, सूखी टहनी या कोई ऐसी वस्तु न रहे जिससे शीट फट सकती हो। इसके बाद गड्ढा बनाकर लाइनिंग शीट अच्छी तरह फैलाएँ। चारों ओर किनारों को मजबूत करें।

2. मिट्टी की परत डालें

तली में लगभग 10 से 15 किलो साफ, छनी हुई उपजाऊ मिट्टी की पतली परत डालें। मिट्टी में प्लास्टिक, काँच, खरपतवार और कीटनाशक के अवशेष नहीं होने चाहिए।

3. गोबर का घोल तैयार करें

लगभग 1.5 से 2 किलो अच्छी तरह सड़ा हुआ गोबर पानी में मिलाकर पतला घोल तैयार करें और क्यारी में फैलाएँ। मात्रा टैंक के आकार के अनुसार बदलेगी। ताजा गोबर सीधे अधिक मात्रा में डालने से गर्मी, अमोनिया और दूषित वातावरण बन सकता है।

4. पानी भरें

क्यारी में लगभग 10 से 15 सेंटीमीटर तक साफ पानी रखें। बहुत गहरा पानी जरूरी नहीं है। सिंचाई के लिए उपयोग होने वाले पानी में कीटनाशक, साबुन, तेल या औद्योगिक प्रदूषण नहीं होना चाहिए।

5. स्वस्थ कल्चर डालें

विश्वसनीय कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय, पशुपालन विभाग या प्रशिक्षित उत्पादक से स्वस्थ अजोला कल्चर प्राप्त करें। इसे पानी की सतह पर धीरे-धीरे समान रूप से फैलाएँ। बहुत पुराना, बदबूदार, काला या कीटग्रस्त कल्चर न खरीदें।

6. छाया और नमी बनाए रखें

क्यारी पर लगभग 50 प्रतिशत छाया देने वाला जाल उपयोगी हो सकता है। पानी का स्तर नियमित रूप से देखें। गर्मी में वाष्पीकरण अधिक होने से थोड़ा पानी जोड़ना पड़ सकता है। नया पानी धीरे डालें, ताकि अजोला एक तरफ इकट्ठा न हो।

दैनिक देखभाल और पोषण प्रबंधन

अजोला की सफलता रोजाना के छोटे निरीक्षण पर निर्भर करती है। Azolla Cultivation में पानी का रंग, गंध, पौधे का रंग और उसकी फैलाव गति नियमित रूप से देखें। स्वस्थ अजोला आम तौर पर हरा और ताजा दिखाई देता है। तेज धूप या पोषण असंतुलन में इसका रंग लाल या भूरा पड़ सकता है।

हर कुछ दिनों में सीमित मात्रा में गोबर का पतला घोल दिया जा सकता है, लेकिन एक तय मात्रा सभी स्थानों पर लागू नहीं होती। पानी, तापमान और टैंक के आकार के अनुसार आवश्यकता बदलती है। जरूरत से अधिक गोबर या उर्वरक डालना उत्पादन बढ़ाने के बजाय पूरी इकाई खराब कर सकता है।

कुछ समय बाद पुरानी मिट्टी, अतिरिक्त तलछट और गंदा पानी निकालकर इकाई को आंशिक रूप से नया करना चाहिए। मच्छर, घोंघे, कीट, मेंढक या दूसरी जलीय वनस्पति दिखाई दे तो समय रहते सफाई करें।

कटाई कब और कैसे करें?

स्थापना के बाद जब अजोला पानी की सतह पर अच्छी तरह फैल जाए, तब प्लास्टिक की छलनी से सीमित कटाई शुरू करें। पहली कटाई में पूरा टैंक खाली न करें। स्वस्थ वृद्धि जारी रखने के लिए पर्याप्त कल्चर क्यारी में छोड़ना जरूरी है।

काटे गए अजोला को साफ पानी से दो या तीन बार धोएँ। धुलाई से गोबर की गंध, मिट्टी और अतिरिक्त घुलनशील पदार्थ कम होते हैं। इसे धातु की जंग लगी छलनी या गंदे बर्तन में न रखें।

कटाई रोजाना लगभग समान मात्रा में करें। लंबे समय तक कटाई न करने पर पौधे बहुत घने हो जाते हैं। इससे नीचे के हिस्से तक रोशनी और हवा नहीं पहुँचती तथा सड़न शुरू हो सकती है।

पशुओं को अजोला (Azolla) खिलाने का सही तरीका

पशु को पहली बार अजोला देते समय बहुत कम मात्रा से शुरुआत करें। इसे साफ पानी से धोकर चोकर, दाना मिश्रण या थोड़े हरे चारे में मिलाया जा सकता है। अचानक बड़ी मात्रा देने पर कुछ पशु इसे पसंद नहीं करेंगे या पाचन संबंधी परेशानी हो सकती है।

एक कृषि विज्ञान केंद्र की मार्गदर्शिका में गाय के लिए लगभग 1 से 1.5 किलो, बकरी के लिए 300 से 500 ग्राम और पक्षियों के लिए 20 से 30 ग्राम ताजा अजोला देने का उल्लेख है। ये सामान्य संकेत हैं, हर पशु के लिए व्यक्तिगत सलाह नहीं। मात्रा तय करने से पहले स्थानीय पशु चिकित्सक या पशु पोषण विशेषज्ञ से परामर्श करना बेहतर है।

गर्भित, बीमार, बहुत छोटे या उपचाराधीन पशुओं के आहार में बदलाव विशेषज्ञ की सलाह से करें। अजोला में सड़न, फफूंद, दुर्गंध या रासायनिक प्रदूषण दिखाई दे तो उसे बिल्कुल न खिलाएँ।

धान की खेती में अजोला का उपयोग

अजोला और धान का संबंध काफी पुराना है। पानी भरे धान के खेत में यह सतह पर फैल सकता है और नाइट्रोजन स्थिरीकरण की प्राकृतिक प्रक्रिया में योगदान देता है। बाद में मिट्टी में मिल जाने पर यह जैविक पदार्थ का स्रोत बनता है।

किसान इसे धान रोपाई से पहले बढ़ाकर मिट्टी में मिला सकते हैं या रोपाई के बाद नियंत्रित तरीके से खेत में विकसित कर सकते हैं। उपयोग की सही विधि खेत की जल व्यवस्था, धान की किस्म, स्थानीय तापमान और कृषि विभाग की सिफारिश पर निर्भर करती है।

अजोला को डालकर नाइट्रोजन उर्वरक पूरी तरह बंद कर देना उचित नहीं है। मिट्टी परीक्षण, फसल की अवस्था और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही उर्वरक प्रबंधन बदलना चाहिए।

लागत, बचत और आय की संभावना

छोटे स्तर की अजोला इकाई में मुख्य खर्च तिरपाल, छाया जाल, कल्चर, मिट्टी, गोबर और श्रम पर आता है। किसान के पास इनमें से सामग्री पहले से उपलब्ध हो तो शुरुआती लागत कम हो सकती है।

इससे आर्थिक लाभ तीन रूपों में मिल सकता है:

लाभ का क्षेत्रसंभावित फायदा
पशुपालनखरीदे गए पूरक आहार पर आंशिक बचत
धान उत्पादनजैविक पदार्थ और पोषण प्रबंधन में सहयोग
स्थानीय बाजारस्वस्थ कल्चर की सीमित बिक्री
एकीकृत खेतीउपलब्ध संसाधनों का दोबारा उपयोग
कम्पोस्टपोषक जैविक खाद तैयार करने में सहायता

कमाई का कोई निश्चित आंकड़ा देना उचित नहीं होगा। उत्पादन, पशुओं की संख्या, बाजार, श्रम, मौसम और प्रबंधन के अनुसार लाभ बदलता है। एक अध्ययन में यह भी पाया गया कि केवल सब्सिडी पर आधारित अजोला कार्यक्रम लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रहे। इसलिए किसान को पहले अपनी वास्तविक आवश्यकता, दैनिक श्रम और उपयोग की योजना बनानी चाहिए।

सामान्य समस्याएँ और उनके समाधान

अजोला का रंग लाल या भूरा होना

तेज धूप, अधिक तापमान, पोषण की कमी या पानी के असंतुलन से ऐसा हो सकता है। छाया बढ़ाएँ, पानी जाँचें और सीमित पोषक घोल दें।

पानी से बदबू आना

अधिक गोबर, सड़ता हुआ अजोला या लंबे समय से पानी न बदलना इसका कारण हो सकता है। खराब हिस्सा निकालें और कुछ पानी बदलें।

वृद्धि धीमी होना

खराब कल्चर, बहुत अधिक या कम तापमान, अनुपयुक्त पानी तथा पोषण की कमी संभावित कारण हैं। तुरंत ज्यादा खाद डालने के बजाय एक-एक कारण की जाँच करें।

कीट और घोंघे दिखाई देना

प्रभावित हिस्सा हाथ से निकालें। पशु आहार के लिए उगाए जा रहे अजोला में मनमाने ढंग से कीटनाशक न डालें।

बारिश में टैंक भर जाना

निकासी की व्यवस्था रखें। तेज बारिश का पानी पोषक तत्व बहा सकता है और कल्चर को बाहर निकाल सकता है।

अजोला उत्पादन में जरूरी सावधानियाँ

अजोला को सीवेज, नाली, दूषित तालाब या रसायन मिले पानी में न उगाएँ। ऐसा पौधा पशुओं और पर्यावरण दोनों के लिए असुरक्षित हो सकता है।

हमेशा प्रमाणित या विश्वसनीय स्थान से कल्चर लें। अलग-अलग जलीय पौधे देखने में अजोला जैसे लग सकते हैं। गलत पौधे को पशु आहार मानकर उपयोग करना जोखिमपूर्ण हो सकता है।

अजोला को संतुलित आहार का पूरक मानें, पूर्ण विकल्प नहीं। किसी वीडियो में दिखाई गई मात्रा को अपने सभी पशुओं पर सीधे लागू न करें। स्थानीय जलवायु और पशु की स्थिति के अनुसार विशेषज्ञ सलाह लें।

अधिक तकनीकी जानकारी के लिए किसान तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के Agritech Portal तथा निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र से मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष

अजोला छोटे किसानों, डेयरी पालकों और एकीकृत खेती अपनाने वाले परिवारों के लिए उपयोगी संसाधन बन सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कम जगह में नियमित रूप से ताजा जैविक सामग्री तैयार की जा सकती है। इसका उपयोग पशुओं के पूरक आहार, धान के जैविक पोषण और कम्पोस्ट निर्माण में किया जा सकता है।

फिर भी सफलता केवल टैंक बनाकर कल्चर डालने से नहीं मिलती। साफ पानी, नियंत्रित धूप, उचित पोषण, नियमित कटाई और सुरक्षित उपयोग जरूरी हैं। किसान को पहले एक छोटी क्यारी से शुरुआत करनी चाहिए। दो से चार सप्ताह तक उत्पादन, श्रम और पशुओं की प्रतिक्रिया का रिकॉर्ड रखने के बाद ही इकाई का विस्तार करना समझदारी होगी।

वैज्ञानिक सलाह, स्थानीय अनुभव और नियमित निगरानी के साथ अजोला खेती की लागत घटाने तथा खेत के संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में सहायक हो सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या अजोला की खेती जमीन के बिना हो सकती है?

हाँ। इसे तिरपाल लगे छोटे गड्ढे, सीमेंट टैंक, प्लास्टिक टब या अन्य सुरक्षित जलधारक संरचना में उगाया जा सकता है। थोड़ी मिट्टी और पोषक घोल की आवश्यकता रहती है।

2. अजोला कितने दिन में तैयार होता है?

स्वस्थ कल्चर और अनुकूल वातावरण में यह लगभग 10 से 15 दिनों में अच्छी तरह फैल सकता है। मौसम और देखभाल के कारण समय कम या अधिक हो सकता है।

3. क्या अजोला गाय का दाना पूरी तरह बदल सकता है?

नहीं। यह केवल पूरक आहार है। पशु को संतुलित राशन, सूखा चारा, हरा चारा, खनिज मिश्रण और स्वच्छ पानी देना आवश्यक है।

4. क्या अजोला सीधे टैंक से निकालकर खिलाया जा सकता है?

इसे पहले साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए। शुरुआत कम मात्रा से करें और पशु की प्रतिक्रिया देखें।

5. क्या अजोला खाने से दूध बढ़ता है?

कुछ अध्ययनों और किसान अनुभवों में बेहतर उत्पादन की सूचना मिली है, पर परिणाम हर पशु में समान नहीं होते। दूध उत्पादन नस्ल, स्वास्थ्य, कुल आहार, पानी, मौसम और प्रबंधन पर निर्भर करता है। इसलिए निश्चित बढ़ोतरी की गारंटी नहीं दी जा सकती।

6. क्या अजोला मनुष्य खा सकते हैं?

कुछ देशों में चुनिंदा प्रजातियों पर मानव भोजन के रूप में शोध हुआ है, लेकिन पशु आहार के लिए उगाया गया सामान्य अजोला मनुष्य को बिना प्रजाति पहचान, स्वच्छ उत्पादन और खाद्य-सुरक्षा जाँच के नहीं खाना चाहिए।

7. क्या गर्मियों में अजोला उगाया जा सकता है?

हाँ, लेकिन तेज गर्मी में छाया, ठंडा स्वच्छ पानी और नियमित निगरानी जरूरी है। बहुत अधिक तापमान में इसकी वृद्धि कमजोर हो सकती है।

8. अजोला कल्चर कहाँ से खरीदें?

निकटतम कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि विश्वविद्यालय, पशुपालन विभाग या विश्वसनीय प्रशिक्षित उत्पादक से संपर्क करें। खरीदने से पहले कल्चर की शुद्धता और स्वास्थ्य जाँचें।

 

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