भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए केंद्र सरकार लगातार व्यापक सुधारों को लागू कर रही है। कोयला मंत्रालय द्वारा उठाए गए नीतिगत कदमों, आधुनिक खनन तकनीकों के उपयोग, वाणिज्यिक कोयला खनन को प्रोत्साहन और पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देने के कारण देश में कोयला उत्पादन नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल घरेलू उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में मजबूत बनाना भी है ताकि बिजली, इस्पात, सीमेंट और अन्य प्रमुख उद्योगों को पर्याप्त मात्रा में स्वदेशी कोयला उपलब्ध कराया जा सके।
राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बताया कि केंद्र सरकार ने कोयला उत्पादन में तेजी लाने, आयात पर निर्भरता कम करने और खनन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं। इन प्रयासों का परिणाम है कि आज भारत का कोयला क्षेत्र तेजी से आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बन रहा है।
घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का विशेष फोकस
भारत दुनिया के सबसे बड़े कोयला उत्पादक देशों में शामिल है और देश की लगभग 70 प्रतिशत बिजली उत्पादन क्षमता अभी भी कोयले पर आधारित है। बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को देखते हुए सरकार ने घरेलू कोयला उत्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसी उद्देश्य से कोयला मंत्रालय नियमित रूप से विभिन्न कोयला ब्लॉकों की प्रगति की समीक्षा कर रहा है, ताकि परियोजनाओं में किसी प्रकार की देरी न हो और उत्पादन समय पर शुरू हो सके।
सरकार का मानना है कि यदि घरेलू स्तर पर पर्याप्त मात्रा में कोयला उपलब्ध होगा तो बिजली उत्पादन की लागत नियंत्रित रहेगी और उद्योगों को भी स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी।
एमएमडीआर संशोधन से निजी क्षेत्र को मिला प्रोत्साहन
सरकार ने वर्ष 2021 में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम (MMDR Amendment Act) लागू किया। इस संशोधन के तहत कैप्टिव खदान मालिकों को अपने वार्षिक खनिज उत्पादन का 50 प्रतिशत तक खुले बाजार में बेचने की अनुमति दी गई है, बशर्ते वे पहले अपने संबद्ध उद्योग की आवश्यकताओं को पूरा करें।
इस निर्णय से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ी है और कोयला खनन में निवेश के नए अवसर खुले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले वर्षों में देश की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
सिंगल विंडो सिस्टम से तेज हुई परियोजनाएं
कोयला खदानों की स्वीकृतियों में होने वाली देरी को समाप्त करने के लिए सरकार ने सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल शुरू किया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पर्यावरण, वन, भूमि और अन्य आवश्यक मंजूरियों की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया गया है।
इसके अलावा प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) का गठन भी किया गया है, जो कोयला ब्लॉक आवंटियों को विभिन्न सरकारी स्वीकृतियां प्राप्त करने में सहायता प्रदान करती है। इससे परियोजनाओं की गति तेज हुई है और निवेशकों का विश्वास भी बढ़ा है।
वाणिज्यिक कोयला खनन से बढ़ रहा निवेश
सरकार ने वर्ष 2020 में वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरुआत कर इस क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव किया। नई व्यवस्था के तहत किसी भी पात्र कंपनी को कोयला खदानों की नीलामी में भाग लेने की अनुमति दी गई है। राजस्व साझेदारी मॉडल अपनाने के साथ-साथ सरकार ने कई आकर्षक प्रोत्साहन भी दिए हैं।
यदि कोई कंपनी निर्धारित समय से पहले उत्पादन शुरू करती है तो उसे अंतिम बोली राशि पर 50 प्रतिशत तक की छूट मिलती है। इसी प्रकार कोयला गैसीकरण और द्रवीकरण परियोजनाओं के लिए भी विशेष प्रोत्साहन उपलब्ध कराए गए हैं।
सरकार ने वाणिज्यिक खनन की शर्तों को सरल बनाते हुए 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति भी दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की रुचि भी लगातार बढ़ रही है।
खदान विकास की समय-सीमा हुई कम
कोयला मंत्रालय ने खदानों के शीघ्र संचालन के लिए विकास अवधि भी घटा दी है। पूरी तरह खोजे जा चुके कोयला ब्लॉकों के लिए विकास अवधि 51 महीने से घटाकर 40 महीने कर दी गई है, जबकि आंशिक रूप से खोजे गए ब्लॉकों के लिए यह अवधि 66 महीने से घटाकर 52 महीने कर दी गई है।
इस फैसले से नए कोयला ब्लॉकों का उत्पादन जल्दी शुरू होगा और देश में घरेलू कोयले की उपलब्धता बढ़ेगी।
आधुनिक तकनीक से बढ़ रही उत्पादन क्षमता
देश की प्रमुख सरकारी कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) उत्पादन बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रही है। भूमिगत खदानों में कंटीन्यूअस माइनर, लॉन्गवॉल और हाईवॉल जैसी आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। वहीं ओपनकास्ट खदानों में उच्च क्षमता वाले एक्सकेवेटर, डंपर और सरफेस माइनर मशीनें उत्पादन को अधिक कुशल बना रही हैं।
इसी प्रकार सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (SCCL) भी नई परियोजनाओं के विकास के साथ-साथ कोयला परिवहन के लिए आधुनिक कोल हैंडलिंग प्लांट, क्रशर और अन्य बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है।
आयात कम करने के लिए व्यापक रणनीति
सरकार ने आयातित कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। बिजली संयंत्रों के लिए Annual Contracted Quantity (ACQ) को उनकी आवश्यकता के 100 प्रतिशत तक बढ़ा दिया गया है। इससे घरेलू कोयले की आपूर्ति बढ़ेगी और आयात की आवश्यकता कम होगी।
इसके अलावा गैर-नियंत्रित क्षेत्र (NRS) के लिए कोकिंग कोल लिंकज की अवधि 30 वर्ष तक कर दी गई है। सरकार ने कोकिंग कोल मिशन भी शुरू किया है, जिसका उद्देश्य इस्पात उद्योग के लिए घरेलू कोकिंग कोयले का उत्पादन बढ़ाना है।
संशोधित SHAKTI नीति-2025 के तहत आयातित कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को भी घरेलू कोयला उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे विदेशी कोयले की मांग धीरे-धीरे कम होगी।
132 वाणिज्यिक कोयला ब्लॉक आवंटित
सरकार की वाणिज्यिक खनन नीति के तहत अब तक 132 कोयला ब्लॉकों का आवंटन किया जा चुका है। इनमें से 23 ब्लॉकों को माइन ओपनिंग परमिशन (MOP) मिल चुकी है और 15 ब्लॉकों में उत्पादन भी शुरू हो गया है। शेष परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा के अनुसार विकास के विभिन्न चरणों में हैं।
इन परियोजनाओं के शुरू होने से आने वाले वर्षों में घरेलू कोयला उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ सतत खनन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कोयला उत्पादन बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दिया जा रहा है। इसके लिए बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण, बायो-रिक्लेमेशन, खदानों के पानी का सामुदायिक उपयोग, ईको-पार्क का विकास तथा ऊर्जा दक्षता बढ़ाने जैसे अनेक कदम उठाए जा रहे हैं।
धूल प्रदूषण कम करने के लिए फॉग कैनन, मोबाइल वाटर स्प्रिंकलर, रोबोटिक नोजल, व्हील वॉशिंग सिस्टम और विंड बैरियर जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इसके साथ ही कोयले के परिवहन को अधिक यंत्रीकृत बनाया जा रहा है ताकि सड़क परिवहन कम हो और प्रदूषण में कमी आए।
सरकार भूमिगत खनन को भी बढ़ावा दे रही है क्योंकि यह अपेक्षाकृत अधिक पर्यावरण-अनुकूल माना जाता है। खनन समाप्त होने के बाद वैज्ञानिक तरीके से खदानों को बंद करने और भूमि के पुनर्विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को प्राथमिकता
खनन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे के लिए सरकार ने पारदर्शी व्यवस्था लागू की है। भूमि अधिग्रहण के मामलों में RFCTLARR Act, 2013 के प्रावधानों के अनुसार उचित मुआवजा और पुनर्वास सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली पुनर्वास समिति पूरी प्रक्रिया की निगरानी करती है ताकि किसी भी प्रभावित परिवार के साथ अन्याय न हो।
ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में मजबूत कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि कोयला क्षेत्र में किए जा रहे ये सुधार केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा, औद्योगिक विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। घरेलू उत्पादन में वृद्धि से विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बिजली उत्पादन अधिक स्थिर होगा और उद्योगों को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी।
सरकार की दूरदर्शी नीतियों, आधुनिक तकनीकों, निजी निवेश और पर्यावरण-अनुकूल खनन व्यवस्था के चलते भारत का कोयला क्षेत्र तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश की आर्थिक प्रगति, औद्योगिक विकास और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

