: गुजरात के अमरेली जिले में किसानों को खेती के साथ बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और उनकी उपज का अधिक मूल्य दिलाने की दिशा में एक किसान उत्पादक संगठन (FPO) उल्लेखनीय काम कर रहा है। Dhabak Amreli SPNF Producer Co. Ltd. से जुड़े करीब 750 किसान सदस्य प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के साथ अपनी कृषि उपज की ग्रेडिंग, सॉर्टिंग और पैकेजिंग की सुविधा भी संचालित कर रहे हैं। संगठन के पास प्रतिदिन करीब 8 मीट्रिक टन क्षमता वाली ग्रेडिंग, सॉर्टिंग और पैकेजिंग सुविधा है, जहां गेहूं, मिलेट्स और मसालों जैसी कृषि उपज को बाजार की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाता है।
किसानों को केवल कच्ची कृषि उपज बेचने के बजाय उसकी गुणवत्ता सुधारने, पैकेजिंग करने और बाजार से जोड़ने की दिशा में यह मॉडल महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार पहुंच बनाने और वैल्यू एडिशन के जरिए संभावित रूप से अधिक मूल्य प्राप्त करने का अवसर मिलता है।
750 किसान सदस्य संगठन से जुड़े
Dhabak Amreli SPNF Producer Co. Ltd. में लगभग 750 किसान सदस्य जुड़े हुए हैं। किसान उत्पादक संगठनों का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को सामूहिक रूप से संगठित कर उनकी उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और बाजार तक पहुंच की क्षमता को मजबूत करना है।
अलग-अलग किसान जब अपनी उपज को छोटी मात्रा में बाजार में बेचते हैं तो उन्हें कई स्तरों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें बाजार की जानकारी, खरीदारों तक सीधी पहुंच, गुणवत्ता के अनुसार मूल्य प्राप्त करना, पैकेजिंग और परिवहन जैसी समस्याएं शामिल हैं। FPO मॉडल किसानों को सामूहिक शक्ति प्रदान करता है, जिससे इन गतिविधियों को संगठित तरीके से संचालित किया जा सकता है।
अमरेली का यह FPO भी इसी दिशा में काम कर रहा है और किसानों की उपज को खेत से बाजार तक पहुंचाने के बीच होने वाली विभिन्न गतिविधियों को अपने स्तर पर मजबूत कर रहा है।
प्राकृतिक खेती को दिया जा रहा बढ़ावा
इस FPO की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका Natural Farming से जुड़ाव है। संगठन से जुड़े किसान प्राकृतिक खेती को अपनाने पर जोर दे रहे हैं। प्राकृतिक खेती में रासायनिक कृषि इनपुट पर निर्भरता को कम करने और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करने पर जोर दिया जाता है।
हाल के वर्षों में प्राकृतिक और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को लेकर किसानों तथा उपभोक्ताओं के बीच रुचि बढ़ी है। ऐसे में प्राकृतिक खेती से प्राप्त कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार से जोड़ना किसानों के लिए एक अतिरिक्त अवसर पैदा कर सकता है।
हालांकि प्राकृतिक खेती अपनाना केवल उत्पादन पद्धति में बदलाव तक सीमित नहीं है। किसानों को अपने उत्पाद की गुणवत्ता, पहचान, उचित प्रसंस्करण, पैकेजिंग और बाजार तक पहुंच पर भी ध्यान देना पड़ता है। FPO द्वारा इन गतिविधियों को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास इस मॉडल को अधिक व्यावहारिक बनाता है।
8 मीट्रिक टन प्रतिदिन की ग्रेडिंग और पैकेजिंग क्षमता
FPO के पास 8 MT प्रति दिन की क्षमता वाली grading, sorting और packaging facility मौजूद है। कृषि उपज की गुणवत्ता बनाए रखने और उसे बाजार के अनुरूप तैयार करने में इन तीनों प्रक्रियाओं की अहम भूमिका होती है।
कटाई के बाद खेत से आने वाली उपज में आकार, गुणवत्ता और अन्य विशेषताओं के आधार पर अंतर हो सकता है। ग्रेडिंग के माध्यम से उत्पादों को उनकी गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुसार अलग किया जा सकता है। वहीं sorting के जरिए अवांछित या खराब सामग्री को अलग करने में मदद मिलती है।
इसके बाद उचित पैकेजिंग उत्पाद को सुरक्षित रखने और उसे बाजार में आकर्षक एवं व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करने में सहायक होती है। इस पूरी प्रक्रिया से किसान संगठन कच्चे माल को सीधे बेचने के बजाय उसे बाजार योग्य उत्पाद में बदलने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
गेहूं, मिलेट्स और मसालों पर फोकस
FPO की प्रसंस्करण और पैकेजिंग सुविधा में मुख्य रूप से गेहूं, मिलेट्स और मसालों जैसी कृषि उपज को संभाला जाता है। इन उत्पादों का घरेलू बाजार में व्यापक उपयोग है और गुणवत्ता, पैकेजिंग तथा ब्रांडिंग के माध्यम से इनके लिए अलग-अलग बाजार खंड तैयार किए जा सकते हैं।
विशेष रूप से मिलेट्स को लेकर देश में जागरूकता बढ़ी है। मोटे अनाजों को पौष्टिक खाद्य पदार्थों के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में किसानों द्वारा उत्पादित मिलेट्स को साफ-सफाई, sorting, grading और packaging के बाद उपभोक्ताओं तक पहुंचाने से मूल्य श्रृंखला में किसानों की भूमिका मजबूत हो सकती है।
इसी तरह मसालों के क्षेत्र में भी गुणवत्ता और पैकेजिंग महत्वपूर्ण होती है। बेहतर तरीके से तैयार और पैक किए गए उत्पाद को संगठित बाजार में बेचने की संभावना बढ़ सकती है।
Farm to Market मॉडल पर जोर
FPO की पहल को “Farm to Market” मॉडल के रूप में देखा जा सकता है। इस मॉडल में किसान की भूमिका केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उत्पादन के बाद होने वाली गतिविधियों में भी किसान संगठन सक्रिय भूमिका निभाता है।
परंपरागत कृषि व्यवस्था में किसान अक्सर अपनी उपज को कटाई के तुरंत बाद स्थानीय बाजार या बिचौलियों के माध्यम से बेच देता है। इससे किसान को मूल्य श्रृंखला के आगे के चरणों से मिलने वाले संभावित आर्थिक लाभ का सीमित हिस्सा ही मिल पाता है।
इसके विपरीत FPO मॉडल में किसान समूह उपज के संग्रह, grading, sorting, packaging, processing और marketing जैसी गतिविधियों को व्यवस्थित कर सकता है। इससे उत्पाद और उपभोक्ता के बीच की value chain को छोटा और अधिक संगठित करने का प्रयास किया जाता है।
Value Addition से बढ़ सकती है बाजार क्षमता
किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। कृषि उपज का value addition भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि किसान या उनका संगठन उपज को बाजार के अनुरूप तैयार करता है तो उत्पाद के लिए अलग-अलग बाजार अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
ग्रेडिंग और sorting से गुणवत्ता के आधार पर उत्पाद को अलग करना संभव होता है। पैकेजिंग से उत्पाद को सुरक्षित रखने और संगठित खुदरा बाजार के लिए तैयार करने में मदद मिलती है। इसके आगे processing और branding जैसी गतिविधियां भी मूल्य श्रृंखला में अतिरिक्त अवसर पैदा कर सकती हैं।
अमरेली का FPO इसी value addition approach को अपनाते हुए किसानों की उपज को सीधे बाजार से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
डिजिटल बाजार से जुड़ने का प्रयास
FPO द्वारा अपने उत्पादों को डिजिटल माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का भी प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए ONDC से जुड़े DigiHaat प्लेटफॉर्म के माध्यम से खरीदारी का विकल्प उपलब्ध कराया गया है।
डिजिटल कॉमर्स किसानों और FPOs के लिए बाजार विस्तार का एक नया माध्यम बन सकता है। स्थानीय बाजार तक सीमित रहने के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उत्पादों को व्यापक उपभोक्ता आधार तक पहुंचाने का अवसर मिल सकता है।
हालांकि ई-कॉमर्स में सफल होने के लिए उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग, कीमत, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल मार्केटिंग और ग्राहक सेवा जैसे पहलुओं पर भी लगातार काम करना आवश्यक होता है। FPO के लिए यह मॉडल भविष्य में बाजार पहुंच बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
किसानों को मिल सकता है बेहतर बाजार विकल्प
FPO का मूल उद्देश्य किसानों को सामूहिक रूप से मजबूत करना है। जब कई किसान एक संगठन के माध्यम से अपनी उपज का संग्रह और विपणन करते हैं, तो संगठन बड़े खरीदारों और बाजारों के साथ बातचीत करने की बेहतर स्थिति में आ सकता है।
सामूहिक बिक्री से उत्पाद की मात्रा बढ़ती है और एक समान गुणवत्ता वाले उत्पाद को व्यवस्थित तरीके से बाजार में उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे खरीदारों के साथ दीर्घकालिक व्यापारिक संबंध विकसित करने की संभावना भी बढ़ती है।
अमरेली में 750 किसानों का इस प्रकार के संगठन से जुड़ना स्थानीय कृषि मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार तैयार करता है।
स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता की संभावनाएं
कृषि उपज की processing, grading, sorting और packaging जैसी गतिविधियां ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकती हैं। यदि FPO अपनी प्रसंस्करण और विपणन गतिविधियों का विस्तार करता है तो इससे कृषि के साथ जुड़े गैर-कृषि रोजगार के अवसर विकसित हो सकते हैं।
ग्रामीण युवाओं के लिए packaging, quality control, inventory management, digital marketing, sales और logistics जैसे क्षेत्रों में काम की संभावनाएं बन सकती हैं। इस प्रकार FPO केवल किसानों के लिए बाजार संगठन ही नहीं, बल्कि ग्रामीण कृषि-उद्यमिता का केंद्र भी बन सकता है।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में पहल
किसानों की आय में सुधार के लिए बाजार से बेहतर जुड़ाव एक महत्वपूर्ण पहलू है। जब किसान अपनी उपज को केवल कच्चे माल के रूप में बेचने के बजाय उसे grading, sorting और packaging के बाद बाजार में प्रस्तुत करते हैं, तो मूल्य श्रृंखला में उनकी भागीदारी बढ़ती है।
हालांकि इससे किसानों की आय में कितनी वास्तविक वृद्धि हुई है, इसका आकलन करने के लिए बिक्री मूल्य, लागत, प्रसंस्करण खर्च, बाजार मूल्य और किसानों को प्राप्त वास्तविक भुगतान जैसे विस्तृत आंकड़ों की आवश्यकता होगी। फिर भी FPO द्वारा value addition और market linkage पर दिया जा रहा जोर किसानों को पारंपरिक बिक्री व्यवस्था से आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कृषि क्षेत्र में FPO मॉडल की बढ़ती भूमिका
देश में किसान उत्पादक संगठनों को छोटे किसानों को सामूहिक रूप से बाजार से जोड़ने के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है। FPO किसानों को input procurement से लेकर उत्पादन, post-harvest management, processing और marketing तक कई स्तरों पर सामूहिक रूप से काम करने का अवसर देता है।
विशेषकर छोटे किसानों के लिए यह मॉडल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि व्यक्तिगत स्तर पर आधुनिक processing infrastructure या बड़े बाजारों तक पहुंच बनाना कठिन हो सकता है। सामूहिक संगठन के माध्यम से इन सुविधाओं को साझा रूप से विकसित किया जा सकता है।
अमरेली का Dhabak Amreli SPNF Producer Co. Ltd. प्राकृतिक खेती, post-harvest management, value addition और digital market linkage को एक साथ जोड़ने का प्रयास कर रहा है। 750 किसान सदस्यों के साथ संचालित यह मॉडल स्थानीय कृषि उत्पादों को खेत से बाजार तक पहुंचाने की दिशा में एक उदाहरण प्रस्तुत करता है।
Dhabak Amreli SPNF Producer Co. Ltd. की पहल यह दिखाती है कि किसानों को बाजार से जोड़ने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि फसल कटाई के बाद की पूरी value chain को मजबूत करना भी जरूरी है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं, मिलेट्स और मसालों की grading, sorting और packaging के लिए 8 मीट्रिक टन प्रतिदिन की सुविधा किसानों को संगठित बाजार के लिए अपनी उपज तैयार करने में मदद करती है।
इसके साथ ही डिजिटल कॉमर्स और ONDC आधारित बाजार से जुड़ने का प्रयास FPO के उत्पादों को व्यापक उपभोक्ता बाजार तक पहुंचाने की संभावना बढ़ाता है। यदि ऐसे संगठनों को बेहतर तकनीकी सहायता, ब्रांडिंग, वित्तीय प्रबंधन, गुणवत्ता प्रमाणन और मजबूत market linkage मिलता है, तो वे छोटे किसानों को केवल उत्पादक नहीं बल्कि कृषि मूल्य श्रृंखला में सक्रिय उद्यमी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अमरेली का यह मॉडल प्राकृतिक खेती, किसान संगठन, value addition और e-commerce को एक साथ जोड़ते हुए “Farm to Market” की दिशा में आगे बढ़ने की एक उल्लेखनीय पहल के रूप में सामने आया है।
