भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक एवं कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव डॉ. एम.एल. जाट ने कहा कि औषधीय एवं सुगंधित पौधों (Medicinal and Aromatic Plants-MAP) का क्षेत्र भारतीय कृषि के लिए एक “गोल्डमाइन” है, जो किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार सृजन और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने वैज्ञानिकों से नवाचार, टीम आधारित अनुसंधान और प्रभावी तकनीक हस्तांतरण के माध्यम से इस क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
डॉ. जाट ने यह बात 18-19 जुलाई 2026 को गुजरात के आनंद स्थित आईसीएआर-औषधीय एवं सुगंधित पौधा अनुसंधान निदेशालय (ICAR-DMAPR) के दो दिवसीय दौरे के दौरान कही। इस अवसर पर उन्होंने निदेशालय के अनुसंधान कार्यों की समीक्षा की, वैज्ञानिकों, किसानों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स से संवाद किया तथा भविष्य की अनुसंधान रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
अनुसंधान कार्यों की हुई विस्तृत समीक्षा
अपने दौरे के पहले दिन डॉ. जाट ने निदेशालय के सभी वैज्ञानिकों के साथ बैठक कर विभिन्न अनुसंधान परियोजनाओं की प्रगति का मूल्यांकन किया। वैज्ञानिकों ने औषधीय एवं सुगंधित फसलों पर चल रहे शोध कार्यों और नई तकनीकों की जानकारी प्रस्तुत की।
बैठक के दौरान डॉ. जाट ने Monitoring, Evaluation, Learning and Impact Assessment (MELIA) प्रणाली को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने वैज्ञानिकों को अनुसंधान से जुड़े डेटा, मेटाडाटा, दस्तावेजीकरण और शोध परिणामों को नियमित रूप से अपडेट करने की सलाह दी ताकि भविष्य में संस्थागत आवश्यकताओं के अनुरूप प्रभावी डेटा प्रबंधन और परिणाम आधारित शोध सुनिश्चित किया जा सके।
अनुसंधान फार्मों का किया निरीक्षण
दौरे के दूसरे दिन डॉ. जाट ने आनंद के लांभवेल और बोरियावी स्थित अनुसंधान फार्मों का दौरा कर विभिन्न फील्ड ट्रायल और अनुसंधान गतिविधियों का निरीक्षण किया। उन्होंने तकनीकी प्रदर्शन ब्लॉक, हर्बल गार्डन, गिलोय जर्मप्लाज्म ब्लॉक, नर्सरी तथा प्रयोगात्मक खेतों का अवलोकन करते हुए औषधीय एवं सुगंधित पौधों के संरक्षण, उन्नत खेती और तकनीकी विकास के प्रयासों की सराहना की।
इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री के “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत संस्थान परिसर में सिंदूर का पौधा लगाया। साथ ही निदेशालय में नवस्थापित गुग्गल ब्लॉक में अत्यंत दुर्लभ एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण गुग्गल (Commiphora wightii) का पौधा भी रोपित किया।
वैज्ञानिक उपलब्धियों और नवाचारों का लिया जायजा
डॉ. जाट ने निदेशालय द्वारा विकसित उन्नत किस्मों, उत्पादन तकनीकों, मूल्य संवर्धित उत्पादों तथा बीजों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने मेडी-हब इन्क्यूबेशन सेंटर के माध्यम से प्रशिक्षित स्टार्टअप्स और उद्यमियों से मुलाकात की, जिन्होंने संस्थान की तकनीकी सहायता से विकसित नवाचारों और सफल उद्यमों का प्रदर्शन किया।
उन्होंने कहा कि अनुसंधान संस्थानों की सफलता तभी सार्थक होगी जब उनकी विकसित तकनीकें अधिक से अधिक किसानों और उद्यमियों तक पहुंचें और व्यावसायिक स्तर पर अपनाई जाएं।
तैयार होगा औषधीय एवं सुगंधित पौधों का राष्ट्रीय एटलस
अपने संबोधन में डॉ. जाट ने औषधीय एवं सुगंधित पौधों पर आधारित एक व्यापक राष्ट्रीय एटलस तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इसमें विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु, फसल प्रणाली, उत्पादन क्षमता, उपयुक्त कृषि क्षेत्र और अन्य महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़ों को शामिल किया जाए ताकि यह नीति निर्माण, अनुसंधान और किसानों के लिए उपयोगी राष्ट्रीय संसाधन बन सके।
उन्होंने संस्थान में लंबित बाह्य वित्त पोषित परियोजनाओं की समीक्षा भी की और आवश्यक होने पर आईसीएआर मुख्यालय से हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया।
गुजरात और राजस्थान में बनेंगे मॉडल गांव
औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के लिए डॉ. जाट ने गुजरात और राजस्थान में दो-दो मॉडल गांव विकसित करने का प्रस्ताव रखा। इन गांवों में बड़ी संख्या में किसानों को जोड़कर औषधीय एवं सुगंधित पौधों की व्यापक खेती कराई जाएगी, ताकि सफल मॉडल तैयार कर उन्हें देश के अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इससे किसानों को नई आय के स्रोत मिलेंगे और ग्रामीण क्षेत्रों में औषधीय पौधों की संगठित खेती को बढ़ावा मिलेगा।
प्राकृतिक खेती से जुड़े आदिवासी किसानों पर विशेष जोर
डॉ. जाट ने विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति (ST) के किसानों के बीच प्राकृतिक खेती आधारित औषधीय एवं सुगंधित पौधों की खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। उनका मानना है कि प्राकृतिक खेती के साथ इन फसलों का उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण संतुलन में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
उन्होंने वैज्ञानिकों से कहा कि वे किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अनुसंधान को अधिक व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाएं।
किसानों और उद्यमियों से किया संवाद
दौरे के दौरान डॉ. जाट ने संस्थान से जुड़े किसानों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स से भी बातचीत की। प्रतिभागियों ने बताया कि निदेशालय द्वारा उपलब्ध कराए गए गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री, बीज, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग से वे सफल उद्यम स्थापित करने में सफल हुए हैं। कई किसानों ने आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती के माध्यम से औषधीय पौधों की खेती का विस्तार करने के अपने अनुभव भी साझा किए।
इन सफलताओं की सराहना करते हुए डॉ. जाट ने कहा कि अनुसंधान संस्थानों की वास्तविक सफलता तभी है जब उनकी तकनीक किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन में प्रत्यक्ष योगदान दे।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में निभाएगा अहम योगदान
डॉ. जाट ने वैज्ञानिकों से अनुसंधान कार्यक्रमों की बेहतर योजना, प्रभावी निगरानी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि औषधीय एवं सुगंधित पौधों का क्षेत्र भारत की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने की क्षमता रखता है और यदि वैज्ञानिक, किसान, उद्योग तथा उद्यमी मिलकर कार्य करें तो यह क्षेत्र “विकसित भारत 2047″ के लक्ष्य को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस अवसर पर आईसीएआर-डीएमएपीआर के निदेशक डॉ. मनीष दास ने निदेशालय की उपलब्धियों, विकास यात्रा और भविष्य की अनुसंधान प्राथमिकताओं की जानकारी दी। कार्यक्रम में आईसीएआर के विभिन्न क्षेत्रीय संस्थानों एवं अनुसंधान केंद्रों के वैज्ञानिक भी उपस्थित रहे।

