• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

Shatpada Fruit Fly Trap: ICAR का कमाल! फलों की सुरक्षा, 120 दिनों तक नहीं पड़ेगी कीटनाशक की जरूरत

Shatpada Fruit Fly Trap: An ICAR Innovation! Protects fruit; no need for pesticides for up to 120 days.

Fiza by Fiza
July 28, 2026
in कृषि समाचार
0
Shatpada Fruit Fly Trap

Shatpada Fruit Fly Trap

0
SHARES
2
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

Shatpada Fruit Fly Trap: देश के फल उत्पादक किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है, जो फलों को नुकसान पहुंचाने वाली खतरनाक फ्रूट फ्लाई (फल मक्खी) से लंबे समय तक सुरक्षा प्रदान करेगी। इस नई तकनीक का नाम ‘शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप’ रखा गया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह एक बार लगाने के बाद लगभग 120 दिनों तक प्रभावी रहता है और किसानों को बार-बार कीटनाशकों का छिड़काव करने की जरूरत नहीं पड़ती।

कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक फल उत्पादन की लागत को कम करने के साथ-साथ सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण फलों के उत्पादन में भी मददगार साबित होगी। इससे किसानों की आय बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण दोनों में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।

क्या है शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप?

‘शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप’ एक विशेष प्रकार का फेरोमोन आधारित ट्रैप है, जिसे फल मक्खियों को आकर्षित कर नियंत्रित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। यह तकनीक विशेष रूप से उन फलों के लिए उपयोगी है, जो फ्रूट फ्लाई के हमले से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।

यह ट्रैप नर फ्रूट फ्लाई को आकर्षित करता है। जब नर मक्खियों की संख्या कम हो जाती है तो उनका प्रजनन चक्र प्रभावित होता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों की संख्या में भारी कमी आती है। यही कारण है कि इस तकनीक को पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ कीट प्रबंधन तकनीक माना जा रहा है।

किसानों के लिए क्यों है यह तकनीक खास?

भारत में आम, अमरूद, लौकी वर्गीय फसलें, करेला, कद्दू, खीरा, तरबूज, खरबूजा, पपीता और कई अन्य फल एवं सब्जियां फ्रूट फ्लाई के हमले से प्रभावित होती हैं। कई बार किसानों को फसल बचाने के लिए महंगे कीटनाशकों का बार-बार छिड़काव करना पड़ता है। शतपदा ट्रैप किसानों को निम्नलिखित लाभ देगा-

  • 120 दिनों तक लगातार सुरक्षा।
  • कीटनाशकों के उपयोग में कमी।
  • उत्पादन लागत में बचत।
  • फलों की गुणवत्ता में सुधार।
  • निर्यात योग्य उत्पाद तैयार करने में मदद।
  • पर्यावरण और लाभकारी कीटों की सुरक्षा।
  • जैविक और प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के लिए उपयोगी तकनीक।

फ्रूट फ्लाई किसानों के लिए कितनी बड़ी समस्या?

फ्रूट फ्लाई दुनिया के सबसे विनाशकारी फल कीटों में से एक मानी जाती है। यह फल के अंदर अंडे देती है, जिससे फल अंदर से सड़ने लगते हैं। कई बार किसान बाहर से फल को स्वस्थ समझते हैं, लेकिन बाजार तक पहुंचते-पहुंचते फल खराब हो जाता है।

फ्रूट फ्लाई के कारण किसानों को निम्न नुकसान होते हैं-

  • 30 से 80 प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
  • बाजार में फलों की कीमत घट जाती है।
  • निर्यात के दौरान गुणवत्ता मानकों को पूरा करना मुश्किल हो जाता है।
  • अधिक कीटनाशक उपयोग से उत्पादन लागत बढ़ जाती है।
  • फसल में रासायनिक अवशेषों का खतरा बढ़ जाता है।

कैसे काम करता है यह ट्रैप?

शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप एक आकर्षक रसायन (एट्रैक्टेंट) का उपयोग करता है, जिसकी गंध से नर फ्रूट फ्लाई इसकी ओर आकर्षित होती हैं। ट्रैप के भीतर पहुंचने के बाद वे बाहर नहीं निकल पातीं।

इसके परिणामस्वरूप-

  1. नर फ्रूट फ्लाई की संख्या कम होती है।
  2. मादा मक्खियों का प्रजनन प्रभावित होता है।
  3. नई पीढ़ी की संख्या घटती है।
  4. फल मक्खी का प्रकोप कम हो जाता है।
  5. फसल सुरक्षित रहती है।

यह तकनीक कीटनाशक आधारित नियंत्रण की तुलना में अधिक सुरक्षित और टिकाऊ मानी जाती है।

किन फसलों में होगा सबसे ज्यादा फायदा?

यह तकनीक कई महत्वपूर्ण फल एवं सब्जी फसलों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। इनमें शामिल हैं-

  • आम
  • अमरूद
  • पपीता
  • तरबूज
  • खरबूजा
  • खीरा
  • लौकी
  • करेला
  • कद्दू
  • टमाटर
  • बेल वाली सब्जियां
  • अन्य फल एवं उद्यानिकी फसलें

देश के कई राज्यों में फल मक्खी किसानों के लिए गंभीर समस्या बनी हुई है। ऐसे में यह ट्रैप विशेष रूप से उद्यानिकी किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।

120 दिनों तक सुरक्षा कैसे मिलेगी?

सामान्यतः बाजार में उपलब्ध कई फेरोमोन ट्रैप 30 से 60 दिनों तक ही प्रभावी रहते हैं। लेकिन शतपदा ट्रैप को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें मौजूद आकर्षक पदार्थ लंबे समय तक सक्रिय बना रहता है। इसके कारण किसान को बार-बार ट्रैप बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी। चार महीने तक इसकी प्रभावशीलता किसानों का समय और पैसा दोनों बचाएगी।

कीटनाशकों पर निर्भरता होगी कम

वर्तमान समय में किसान फ्रूट फ्लाई नियंत्रण के लिए कई प्रकार के कीटनाशकों का उपयोग करते हैं। लेकिन इनके कुछ गंभीर दुष्प्रभाव भी हैं।

  • उत्पादन लागत बढ़ती है।
  • पर्यावरण प्रदूषण होता है।
  • मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
  • फलों में रसायनों के अवशेष रह सकते हैं।
  • लाभकारी कीटों की मृत्यु हो सकती है।

शतपदा ट्रैप इन समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करता है। यह एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management) की अवधारणा को मजबूत करेगा।

जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा

देश में जैविक और प्राकृतिक खेती का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कीट नियंत्रण की होती है। ऐसे में यदि कोई तकनीक बिना कीटनाशक के चार महीने तक सुरक्षा दे सके तो यह जैविक किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है। इस तकनीक का उपयोग करके किसान अपने उत्पादों को अधिक सुरक्षित और रसायन मुक्त बना सकते हैं। इससे उन्हें बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।

निर्यात में भी होगा फायदा

भारत दुनिया के कई देशों को फल निर्यात करता है। निर्यात के दौरान फलों में कीट और रासायनिक अवशेष सबसे बड़ी चुनौती होते हैं। यदि फ्रूट फ्लाई का नियंत्रण बेहतर तरीके से किया जाता है तो-

  • निर्यात गुणवत्ता में सुधार होगा।
  • रासायनिक अवशेषों में कमी आएगी।
  • अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करना आसान होगा।
  • किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं।

फल निर्यात उद्योग के लिए भी यह तकनीक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

किसानों को कैसे करना होगा इस्तेमाल?

विशेषज्ञों के अनुसार किसानों को ट्रैप का उपयोग फल बनने की शुरुआती अवस्था से ही करना चाहिए। इसे खेत या बाग में निर्धारित दूरी पर लगाया जाता है ताकि अधिकतम नर फ्रूट फ्लाई को आकर्षित किया जा सके।उपयोग के दौरान किसानों को ध्यान रखना होगा-

  • ट्रैप को सही ऊंचाई पर लगाएं।
  • समय-समय पर इसकी स्थिति की जांच करें।
  • वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार प्रति एकड़ ट्रैप की संख्या तय करें।
  • इसे अन्य कीट प्रबंधन उपायों के साथ भी अपनाया जा सकता है।

आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में बड़ा कदम

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीकें किसानों की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप भी इसी दिशा में एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। यह तकनीक न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगी बल्कि सुरक्षित खाद्य उत्पादन, टिकाऊ खेती और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देगी।

भविष्य में क्या होगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाया जाता है तो भारत में फल उत्पादन क्षेत्र को कई लाभ मिल सकते हैं-

  • फल उत्पादन में वृद्धि।
  • किसानों की लागत में कमी।
  • गुणवत्तापूर्ण उत्पादन।
  • कीटनाशकों के उपयोग में कमी।
  • सुरक्षित खाद्य उत्पाद।
  • निर्यात क्षमता में वृद्धि।
  • टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा।

निष्कर्ष

ICAR द्वारा विकसित ‘शतपदा फ्रूट फ्लाई ट्रैप’ भारतीय किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण नवाचार है। 120 दिनों तक बिना कीटनाशक के फलों की सुरक्षा देने वाली यह तकनीक कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है। यदि इसे व्यापक स्तर पर अपनाया गया तो फल उत्पादक किसानों को बेहतर उत्पादन, कम लागत और अधिक मुनाफे का लाभ मिलेगा। साथ ही, उपभोक्ताओं को भी सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण फल उपलब्ध हो सकेंगे।

 

Tags: Agricultural ResearchAgriculture innovationHorticulture Cropshorticulture newsmango farmingShatpada Fruit Fly TrapSustainable Agriculture
Previous Post

ICAR-NRC Makhana Darbhanga: Farmer Prosperity–Quality Manthan Program में Quality Standards, Mechanization और Export Quality पर हुआ मंथन

Next Post

जियो-पॉलिटिकल संकट से निपटने की तैयारी: संसदीय समिति ने उर्वरक आयात पर दी बड़ी सिफारिशें

Next Post
फॉस्फेट और पोटाश के लिए विदेशों में रणनीतिक निवेश की सिफारिश

जियो-पॉलिटिकल संकट से निपटने की तैयारी: संसदीय समिति ने उर्वरक आयात पर दी बड़ी सिफारिशें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • Raksha Bandhan Special: रक्षाबंधन पर महिलाओं को मिलेगा बड़ा तोहफा, हर महीने खाते में आएंगे ₹2,500
  • MSP Legal Guarantee: किसानों का भोपाल कूच, 19 किसान संगठनों ने सरकार को दी आर-पार की चेतावनी”
  • Azolla Cultivation कम लागत में पौष्टिक हरा चारा और अतिरिक्त आय का सफल व्यवसाय
  • उर्वरक PSUs के विनिवेश पर संसदीय समिति की चिंता, सरकार से दोबारा समीक्षा की मांग
  • कर्ज और लगातार फसल नुकसान से परेशान 21 वर्षीय किसान ने पेस्टीसाइड खाकर दी जान

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.