देश में सहकारी चीनी मिलों (Cooperative Sugar Mills) को वित्तीय रूप से मजबूत बनाने, उनकी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और एथेनॉल आधारित अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। सहकारिता मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि चीनी सहकारी समितियों की कार्यक्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसी दिशा में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) के माध्यम से सहकारी चीनी मिलों के पुनरुद्धार, आधुनिकीकरण और एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने बताया कि यद्यपि सहकारिता मंत्रालय ने देश की सहकारी चीनी समितियों की दक्षता का अध्ययन कराया था, लेकिन यह अध्ययन विशेष रूप से पंजाब की सहकारी चीनी मिलों, जिनमें तरनतारन स्थित शेरोन सहकारी चीनी मिल भी शामिल है, के लिए नहीं किया गया था।
सहकारी चीनी मिलों के आधुनिकीकरण पर सरकार का फोकस
केंद्र सरकार का मानना है कि देश की सहकारी चीनी मिलें किसानों की आय बढ़ाने, गन्ना उत्पादकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यही कारण है कि सरकार इनके आधुनिकीकरण, तकनीकी उन्नयन और वित्तीय सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है।
इस उद्देश्य से राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) को सहकारी चीनी मिलों के पुनरुद्धार और विस्तार के लिए प्रमुख एजेंसी बनाया गया है। यह संस्था परियोजनाओं की व्यवहार्यता का आकलन करने के बाद या तो सीधे सहकारी चीनी मिलों को अथवा संबंधित राज्य सरकारों के माध्यम से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है।
NCDC की महत्वपूर्ण भूमिका
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), जो सहकारिता मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत एक सांविधिक संस्था है, सहकारी क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
एनसीडीसी की ओर से दी जाने वाली वित्तीय सहायता का उद्देश्य है—
- सहकारी चीनी मिलों का आधुनिकीकरण
- नई मशीनरी की स्थापना
- उत्पादन क्षमता में वृद्धि
- एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना
- कोजनरेशन (Co-generation) परियोजनाओं का विकास
- कार्यशील पूंजी की उपलब्धता
- ऊर्जा दक्षता में सुधार
इन पहलों से चीनी उद्योग को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने और किसानों को बेहतर लाभ दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
1,000 करोड़ रुपये की सहायता से मिला बड़ा प्रोत्साहन
सहकारिता मंत्रालय ने ‘सहकारी चीनी मिलों (CSM) के सुदृढ़ीकरण के लिए NCDC को सहायता अनुदान’ नामक एक विशेष योजना लागू की।
इस योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम को कुल 1,000 करोड़ रुपये का एकमुश्त अनुदान प्रदान किया गया।
यह राशि दो चरणों में जारी की गई—
- वित्तीय वर्ष 2022-23 : 500 करोड़ रुपये
- वित्तीय वर्ष 2024-25 : 500 करोड़ रुपये
इस अनुदान का उद्देश्य एनसीडीसी को अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने में सक्षम बनाना था, ताकि सहकारी चीनी मिलों को बड़े पैमाने पर ऋण उपलब्ध कराया जा सके।
10,000 करोड़ रुपये के ऋण की व्यवस्था
सरकार की इस योजना के तहत एनसीडीसी को बाजार से अतिरिक्त धन जुटाकर 10,000 करोड़ रुपये तक का ऋण सहकारी चीनी मिलों को उपलब्ध कराने की अनुमति दी गई।
यह ऋण मुख्य रूप से निम्न कार्यों के लिए दिया जा रहा है—
- एथेनॉल प्लांट की स्थापना
- कोजनरेशन प्लांट का विकास
- उत्पादन क्षमता बढ़ाना
- आधुनिक मशीनरी लगाना
- कार्यशील पूंजी की आवश्यकता पूरी करना
- वित्तीय पुनर्गठन
सरकार का मानना है कि इससे सहकारी चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और वे बदलते ऊर्जा एवं औद्योगिक परिदृश्य के अनुरूप स्वयं को विकसित कर सकेंगी।
56 सहकारी चीनी मिलों को मिला लाभ
सहकारिता मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2025 तक राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) ने देशभर की 56 सहकारी चीनी मिलों को कुल 10,005 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता वितरित की है।
इस सहायता से कई सहकारी चीनी मिलों ने अपने संयंत्रों का आधुनिकीकरण किया है तथा एथेनॉल उत्पादन और ऊर्जा दक्षता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
एथेनॉल उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
सरकार की एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के तहत चीनी मिलों को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित न रखकर उन्हें एथेनॉल उत्पादन के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
एथेनॉल संयंत्रों की स्थापना से—
- चीनी मिलों की आय बढ़ेगी,
- किसानों के गन्ने का बेहतर उपयोग होगा,
- पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण बढ़ेगा,
- कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी,
- हरित ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।
इसी उद्देश्य से एनसीडीसी के माध्यम से एथेनॉल परियोजनाओं के लिए विशेष वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
कोजनरेशन परियोजनाओं से बढ़ेगी ऊर्जा दक्षता
सरकार सहकारी चीनी मिलों में कोजनरेशन (Co-generation) परियोजनाओं को भी बढ़ावा दे रही है।
इन परियोजनाओं के माध्यम से गन्ने से निकलने वाले बैगास (Bagasse) का उपयोग बिजली उत्पादन में किया जाता है। इससे—
- ऊर्जा लागत कम होती है,
- अतिरिक्त बिजली ग्रिड को बेची जा सकती है,
- मिलों की आय बढ़ती है,
- पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
पंजाब की शेरोन सहकारी चीनी मिल पर क्या कहा?
राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने स्पष्ट किया कि सहकारी चीनी समितियों की दक्षता पर अध्ययन किया गया था, लेकिन यह अध्ययन विशेष रूप से पंजाब की सहकारी चीनी मिलों या तरनतारन स्थित शेरोन सहकारी चीनी मिल पर केंद्रित नहीं था।
हालांकि, यदि कोई सहकारी चीनी मिल एनसीडीसी के निर्धारित मानकों और परियोजना व्यवहार्यता को पूरा करती है, तो उसे भी पुनरुद्धार और आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय सहायता मिल सकती है।
किसानों को होगा प्रत्यक्ष लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार सहकारी चीनी मिलों के आधुनिकीकरण से सबसे अधिक लाभ गन्ना किसानों को मिलेगा।
इससे—
- गन्ने का समय पर भुगतान,
- अधिक उत्पादन क्षमता,
- बेहतर प्रसंस्करण,
- अतिरिक्त आय के स्रोत,
- ग्रामीण रोजगार,
- एथेनॉल उद्योग का विस्तार
जैसे कई सकारात्मक परिणाम सामने आएंगे।
आत्मनिर्भर चीनी उद्योग की दिशा में कदम
सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और ऊर्जा विविधीकरण के माध्यम से सहकारी चीनी मिलों को भविष्य के लिए तैयार किया जा रहा है ताकि वे घरेलू मांग पूरी करने के साथ-साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकें।
सहकारिता मंत्रालय, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से देश की सहकारी चीनी मिलों को नई मजबूती देने का प्रयास किया जा रहा है। 1,000 करोड़ रुपये के सहायता अनुदान के आधार पर 10,000 करोड़ रुपये तक की ऋण व्यवस्था और 56 सहकारी चीनी मिलों को 10,005 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। एथेनॉल संयंत्र, कोजनरेशन परियोजनाएं, आधुनिकीकरण और कार्यशील पूंजी जैसी पहलों से न केवल सहकारी चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति बेहतर होगी, बल्कि गन्ना किसानों की आय बढ़ेगी, ग्रामीण रोजगार को बल मिलेगा और भारत के चीनी उद्योग को नई प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्राप्त होगी।

