भारत सरकार ने देश के पशुधन (Livestock) और डेयरी सेक्टर (Dairy Sector) को आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और आत्मनिर्भर बनाने के अपने संकल्प को एक बार फिर दोहराया है। सरकार का कहना है कि लक्षित योजनाओं (Targeted Schemes), आधुनिक पशुधन अवसंरचना (Livestock Infrastructure), रोग नियंत्रण (Disease Control), आनुवंशिक सुधार (Genetic Improvement) और वैल्यू चेन (Value Chain) को मजबूत करने के माध्यम से पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन लाया जा रहा है। केंद्र सरकार का मानना है कि यह क्षेत्र किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण रोजगार सृजित करने, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
राज्यसभा में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 246(3) के अनुसार पशुपालन राज्य का विषय है। इसलिए केंद्र सरकार द्वारा कोई व्यापक राष्ट्रीय पशुधन कानून बनाने का प्रस्ताव नहीं है। हालांकि, पशुपालन और डेयरी विभाग (DAHD) विभिन्न केंद्रीय योजनाओं और नीतिगत पहलों के माध्यम से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है।
पिछले दशक में पशुधन क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति
सरकार ने बताया कि पिछले दस वर्षों में भारत का पशुधन एवं डेयरी क्षेत्र लगातार मजबूत हुआ है। देश का दूध उत्पादन वर्ष 2014-15 के 146.31 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 248 मिलियन टन तक पहुंच गया है। यानी लगभग 70 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
इसी प्रकार अंडा उत्पादन भी 78.48 बिलियन से बढ़कर 149.11 बिलियन हो गया है, जो लगभग 90 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। यह उपलब्धि भारत को विश्व के सबसे बड़े दुग्ध उत्पादक देशों में अग्रणी बनाए रखने में महत्वपूर्ण साबित हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM), राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM), पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP), राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) तथा पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) जैसी योजनाओं ने इस विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
राष्ट्रीय गोकुल मिशन से सुधर रही देशी नस्लें
राष्ट्रीय गोकुल मिशन (National Gokul Mission) सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है, जिसका उद्देश्य देशी गोवंश नस्लों का संरक्षण, आनुवंशिक सुधार, कृत्रिम गर्भाधान, आईवीएफ तकनीक, तथा दूध उत्पादन बढ़ाना है।
इस योजना के माध्यम से किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली नस्लें उपलब्ध कराई जा रही हैं, जिससे पशुओं की उत्पादकता बढ़ रही है। सरकार का मानना है कि भविष्य में दूध उत्पादन बढ़ाने में यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
राष्ट्रीय पशुधन मिशन से बढ़ रहा आधुनिक पशुपालन
राष्ट्रीय पशुधन मिशन (National Livestock Mission – NLM) के माध्यम से भेड़, बकरी, सूअर, पोल्ट्री और चारे के विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस योजना का उद्देश्य पशुपालकों की आय बढ़ाना, आधुनिक तकनीक अपनाना तथा पशुधन आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देना है। इसके तहत पशुपालन को कृषि के साथ जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम से बढ़ी सुरक्षा
Livestock Health and Disease Control Programme (LHDCP) के माध्यम से पशुओं में होने वाली संक्रामक बीमारियों की रोकथाम पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सरकार विभिन्न राज्यों के सहयोग से—
- टीकाकरण अभियान
- रोग निगरानी
- रोगमुक्त क्षेत्र (Disease Free Zones)
- पशु स्वास्थ्य सेवाएं
को मजबूत कर रही है।
रोगमुक्त पशुधन विकसित होने से न केवल किसानों को नुकसान कम होगा बल्कि डेयरी और पशुधन उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
भारत पशुधन डेटाबेस से बढ़ेगी ट्रेसबिलिटी
सरकार ने भारत पशुधन (Bharat Livestock Database) को पशुधन क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों में से एक बताया है।
DAHD और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) द्वारा विकसित इस प्लेटफॉर्म में प्रत्येक पशु को 12 अंकों की यूनिक पहचान संख्या दी जा रही है।
इससे—
- पशुओं की डिजिटल पहचान
- Traceability
- Disease Tracking
- Breeding Management
- Export Certification
जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
यह प्रणाली भारतीय डेयरी उत्पादों की वैश्विक स्वीकार्यता बढ़ाने में भी सहायक होगी।
डेयरी उत्पादों के निर्यात पर विशेष जोर
भारत सरकार भारतीय डेयरी उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए APEDA और Export Inspection Council (EIC) के साथ मिलकर कार्य कर रही है।
इसके अलावा विभिन्न देशों के साथ Joint Working Group और Technical Working Group के माध्यम से डेयरी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की जा रही है।
सरकार का उद्देश्य भारतीय दूध और डेयरी उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप बनाना है।
भारत दूध उत्पादन में आत्मनिर्भर
सरकार ने राज्यसभा में बताया कि नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025-26 में देश में दूध की अनुमानित मांग 243 मिलियन टन है।
इसके मुकाबले वर्ष 2024-25 में भारत का दूध उत्पादन 247.87 मिलियन टन तक पहुंच चुका है।
यह स्पष्ट संकेत है कि भारत न केवल दूध उत्पादन में विश्व में अग्रणी है बल्कि घरेलू मांग को पूरा करने के मामले में भी पूरी तरह आत्मनिर्भर (Self Reliant in Milk Production) है।
राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) से मजबूत हो रहा डेयरी नेटवर्क
National Programme for Dairy Development (NPDD) के माध्यम से देशभर में—
- Milk Procurement
- Milk Chilling Infrastructure
- Quality Assurance
- Milk Processing
- Value Addition
- Cold Chain Infrastructure
को मजबूत किया जा रहा है।
योजना के तहत सामान्य राज्यों में 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराया जाता है।
वहीं पूर्वोत्तर राज्यों और पर्वतीय क्षेत्रों में दूध प्रसंस्करण, कोल्ड चेन और मूल्य संवर्धन परियोजनाओं के लिए 75 प्रतिशत तक केंद्रीय सहायता दी जा रही है।
इन क्षेत्रों में गुणवत्ता परीक्षण अवसंरचना के लिए 70 प्रतिशत अनुदान भी उपलब्ध कराया जाता है।
AHIDF से आधुनिक डेयरी उद्योग को बढ़ावा
पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (Animal Husbandry Infrastructure Development Fund – AHIDF) के माध्यम से निजी और सहकारी क्षेत्र में आधुनिक डेयरी उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
योजना के तहत पात्र निवेशकों को—
- Dairy Processing Plant
- Milk Value Addition
- Cold Chain
- Dairy Infrastructure
स्थापित करने के लिए 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाती है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निजी निवेश बढ़ रहा है और डेयरी उद्योग का तेजी से विस्तार हो रहा है।
किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का फोकस
सरकार का मानना है कि पशुपालन और डेयरी क्षेत्र किसानों की अतिरिक्त आय का सबसे मजबूत स्रोत बन सकता है।
इसी उद्देश्य से विभिन्न योजनाओं के माध्यम से—
- आधुनिक तकनीक
- बेहतर नस्ल
- पशु स्वास्थ्य
- डेयरी अवसंरचना
- विपणन सुविधा
- डिजिटल प्लेटफॉर्म
पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इससे छोटे एवं सीमांत किसानों को भी स्थायी आय का नया स्रोत मिल रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन रहा पशुधन क्षेत्र
विशेषज्ञों के अनुसार भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में Livestock Sector का योगदान लगातार बढ़ रहा है।
यह क्षेत्र—
- रोजगार सृजन
- महिला सशक्तिकरण
- पोषण सुरक्षा
- ग्रामीण उद्यमिता
- निर्यात
- कृषि विविधीकरण
में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इसी कारण सरकार पशुधन और डेयरी क्षेत्र को कृषि विकास की रणनीति का प्रमुख आधार मान रही है।
आधुनिक तकनीक से बदलेगा पशुपालन का स्वरूप
सरकार भविष्य में Artificial Intelligence, Digital Livestock Database, Genomic Selection, Sex Sorted Semen Technology, IVF Technology, Disease Surveillance, Climate Resilient Livestock Farming तथा Smart Dairy Management जैसी आधुनिक तकनीकों को और अधिक बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है।
इन पहलों से भारतीय पशुपालन को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप बनाया जा सकेगा।
भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय गोकुल मिशन (RGM), राष्ट्रीय पशुधन मिशन (NLM), पशुधन स्वास्थ्य एवं रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP), राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD) तथा पशुपालन अवसंरचना विकास कोष (AHIDF) जैसी योजनाओं के माध्यम से पशुधन और डेयरी क्षेत्र को नई मजबूती दी जा रही है। पिछले दशक में दूध उत्पादन में 70 प्रतिशत और अंडा उत्पादन में 90 प्रतिशत की वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि सरकारी नीतियां सकारात्मक परिणाम दे रही हैं। भारत पशुधन डेटाबेस, डेयरी निर्यात, आधुनिक डेयरी अवसंरचना, रोग नियंत्रण, आनुवंशिक सुधार, कोल्ड चेन, और वैल्यू एडिशन जैसी पहलों से आने वाले वर्षों में भारत का Livestock & Dairy Sector और अधिक मजबूत होगा। इससे किसानों की आय बढ़ेगी, ग्रामीण रोजगार को नई गति मिलेगी और भारत वैश्विक डेयरी एवं पशुधन बाजार में अपनी स्थिति को और सुदृढ़ कर सकेगा।

