खरीफ सीजन के दौरान किसानों को पर्याप्त मात्रा में फॉस्फेटिक एवं पोटाश (P&K) उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से Fertiliser Association of India (FAI) ने केंद्र सरकार से न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) दरों में वृद्धि करने की मांग की है। उद्योग संगठन का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, प्राकृतिक गैस और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ रहे दबाव के कारण उर्वरकों की उत्पादन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में मौजूदा NBS दरें कंपनियों की वास्तविक लागत की पर्याप्त भरपाई नहीं कर पा रही हैं।
FAI का मानना है कि यदि समय रहते सब्सिडी दरों में संशोधन नहीं किया गया, तो P&K उर्वरकों की आपूर्ति, उत्पादन और आयात पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव खरीफ सीजन में किसानों को मिलने वाली उर्वरक उपलब्धता और कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है।
क्या है न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) व्यवस्था?
भारत सरकार ने फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों के लिए न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी (NBS) प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक पोषक तत्व—नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटाश (K) और सल्फर (S)—के लिए प्रति किलोग्राम के आधार पर सब्सिडी तय की जाती है। इसी आधार पर DAP, NPK और अन्य P&K उर्वरकों पर मिलने वाली कुल सब्सिडी निर्धारित होती है।
इस प्रणाली का उद्देश्य पोषक तत्वों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देना, उर्वरक उद्योग को लचीलापन देना तथा किसानों को आवश्यक उर्वरक उचित कीमत पर उपलब्ध कराना है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतों में तेज बदलाव होने पर सब्सिडी दरों की समय-समय पर समीक्षा आवश्यक हो जाती है।
क्यों बढ़ी है लागत?
उद्योग के अनुसार पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर सीधे उर्वरक उद्योग पर पड़ा है। फॉस्फेट रॉक, फॉस्फोरिक एसिड, अमोनिया, सल्फर और पोटाश जैसे प्रमुख कच्चे माल का बड़ा हिस्सा अंतरराष्ट्रीय बाजार से प्राप्त किया जाता है।
हाल के महीनों में—
- समुद्री परिवहन लागत में वृद्धि,
- बीमा प्रीमियम महंगे होने,
- ऊर्जा एवं प्राकृतिक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी,
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाओं,
- तथा प्रमुख निर्यातक देशों की सीमित आपूर्ति
ने उत्पादन लागत को काफी बढ़ा दिया है।
उद्योग का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही और सब्सिडी में संशोधन नहीं हुआ, तो कंपनियों पर अतिरिक्त वित्तीय दबाव बढ़ेगा।
FAI की प्रमुख मांगें
Fertiliser Association of India ने सरकार के समक्ष कई महत्वपूर्ण सुझाव रखे हैं।
इनमें प्रमुख हैं—
- P&K उर्वरकों की NBS दरों में तत्काल संशोधन।
- बढ़ी हुई कच्चे माल की लागत को सब्सिडी निर्धारण में शामिल किया जाए।
- उद्योग की कार्यशील पूंजी (Working Capital) पर दबाव कम करने के लिए समय पर सब्सिडी भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
- आयात और घरेलू उत्पादन दोनों को प्रोत्साहन देने वाली नीतियां अपनाई जाएं।
- किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों में स्थिरता बनाए रखी जाए।
किसानों पर क्या होगा असर?
यदि सरकार समय पर NBS दरों में संशोधन करती है, तो इसका सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा।
सब्सिडी बढ़ने से—
- P&K उर्वरकों की उपलब्धता बनी रहेगी।
- कीमतों में अत्यधिक वृद्धि की संभावना कम होगी।
- खरीफ सीजन में समय पर उर्वरक उपलब्ध होंगे।
- संतुलित पोषक तत्व उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।
- कृषि उत्पादन और उत्पादकता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
इसके विपरीत यदि लागत बढ़ती रही और सब्सिडी अपरिवर्तित रही, तो कुछ उत्पादों की उपलब्धता प्रभावित होने या कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
संतुलित पोषण के लिए P&K उर्वरकों का महत्व
विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय कृषि में लंबे समय तक यूरिया के अधिक उपयोग के कारण पोषक तत्वों का संतुलन प्रभावित हुआ है। फॉस्फोरस और पोटाश फसलों की जड़ विकास, फूल और फल बनने, जल प्रबंधन तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
यदि किसानों को P&K उर्वरक पर्याप्त मात्रा में और उचित कीमत पर उपलब्ध रहते हैं, तो मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सहायता मिलती है।
सरकार के सामने चुनौती
सरकार को एक ओर किसानों के लिए उर्वरकों की कीमतें नियंत्रित रखनी हैं, वहीं दूसरी ओर उद्योग की आर्थिक व्यवहार्यता भी सुनिश्चित करनी है। बढ़ती वैश्विक लागत के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर NBS दरों की समीक्षा, दीर्घकालिक कच्चे माल के आयात समझौते, घरेलू उत्पादन क्षमता का विस्तार तथा वैकल्पिक स्रोतों का विकास इस चुनौती का स्थायी समाधान हो सकते हैं।
आत्मनिर्भरता की दिशा में अवसर
वर्तमान परिस्थितियां भारत के लिए घरेलू फॉस्फेटिक और स्पेशलिटी उर्वरक उद्योग को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान करती हैं। यदि अनुसंधान, निवेश और नई उत्पादन तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए, तो आयात पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जा सकती है।
इसके साथ ही विदेशी कंपनियों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी, कच्चे माल के सुरक्षित स्रोत और लॉजिस्टिक्स सुधार भी भविष्य में उर्वरक सुरक्षा को मजबूत करेंगे।
निष्कर्ष
Fertiliser Association of India द्वारा खरीफ सीजन के लिए NBS सब्सिडी बढ़ाने की मांग ऐसे समय में आई है जब वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतें और आपूर्ति संबंधी चुनौतियां उर्वरक उद्योग पर दबाव बना रही हैं। यदि सरकार उद्योग की मांगों पर विचार करते हुए समय पर उचित निर्णय लेती है, तो किसानों को पर्याप्त मात्रा में P&K उर्वरक उपलब्ध कराने, उत्पादन लागत के दबाव को कम करने और देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। दीर्घकाल में घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाना, संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भर उर्वरक क्षेत्र का निर्माण ही भारत के लिए सबसे टिकाऊ समाधान होगा।

