किसानों को संगठित कर उनकी कृषि उपज के बेहतर मूल्य, बाजार तक पहुंच और व्यावसायिक क्षमता बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार की 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के गठन और संवर्धन की केंद्रीय क्षेत्र योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सरकार के अनुसार, इस योजना के तहत देशभर में निर्धारित लक्ष्य के अनुसार 10,000 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) का गठन किया जा चुका है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में श्री मोहम्मद नदीमुल हक़ के प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
1,175 FPO पूरी तरह महिलाओं के संगठन
सरकार ने बताया कि FPO योजना में महिलाओं की भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। योजना के तहत गठित 1,175 किसान उत्पादक संगठन ऐसे हैं, जिनमें 100 प्रतिशत सदस्य महिलाएं हैं।
इसके अलावा, सभी FPOs में कुल स्टेकहोल्डर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है।
सरकार ने यह भी बताया कि योजना के अधिदेश के अनुसार प्रत्येक FPO के निदेशक मंडल या शासी निकाय में कम से कम एक महिला सदस्य होना अनिवार्य है। इससे किसान उत्पादक संगठनों के संचालन और निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कृषि उपज से लेकर बाजार तक काम कर रहे FPO
सरकार के अनुसार, योजना के तहत गठित FPO प्रचालनरत हैं और कृषि क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों में काम कर रहे हैं।
इनमें कृषि इनपुट की आपूर्ति, कृषि उपज का एकत्रीकरण, खरीद, मूल्यवर्धन और विपणन जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
FPO के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को सामूहिक रूप से कृषि सामग्री खरीदने, अपनी उपज को एकत्र करने और बाजार में बेहतर तरीके से बेचने के अवसर मिलते हैं। हालांकि, सरकार द्वारा दिए गए उत्तर में प्रत्येक FPO के स्तर पर अलग-अलग कारोबार या लाभ का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
9,865 FPO ने प्रबंधन लागत सहायता ली
सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत गठित 9,865 FPO ने प्रबंधन लागत की सहायता ली है।
वहीं, 8,357 FPO ने इक्विटी अनुदान का लाभ उठाया है, जबकि 3,140 FPO ने ऋण गारंटी का लाभ लिया है।
ये सहायता FPOs को शुरुआती वर्षों में संस्थागत और व्यावसायिक रूप से मजबूत बनाने के उद्देश्य से उपलब्ध कराई जा रही है।
पांच साल तक पेशेवर हैंड होल्डिंग सहायता
सरकार के अनुसार, प्रत्येक FPO को निर्धारित कार्यान्वयन एजेंसियों के माध्यम से पंजीकरण की तारीख से पांच वर्षों की अवधि तक पेशेवर हैंड होल्डिंग सहायता प्रदान की जाती है।
इसका उद्देश्य FPOs को केवल पंजीकृत संगठन बनाने तक सीमित न रखकर उन्हें व्यावसायिक रूप से सक्षम और दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है।
यदि किसी FPO की गतिविधियों का स्तर कम पाया जाता है, तो संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी क्लस्टर बेस्ड बिजनेस ऑर्गनाइजेशन (CBBO) के माध्यम से उसके कामकाज को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सहायता उपलब्ध कराती है।
इसमें हैंड होल्डिंग, क्षमता निर्माण, व्यवसायिक सुविधा और बाजार लिंकेज जैसी सहायता शामिल है।
FPOs ने किया 20,358 करोड़ रुपये का कारोबार
केंद्र सरकार की योजना के तहत गठित किसान उत्पादक संगठनों ने अब तक बड़े स्तर पर व्यावसायिक गतिविधियां दर्ज की हैं।
सरकार के अनुसार, इन FPOs द्वारा 31 जुलाई 2026 तक कुल 20,358 करोड़ रुपये का संचयी कारोबार रिपोर्ट किया गया है।
हालांकि, सभी FPOs एक ही समय पर गठित नहीं हुए हैं। ये संगठन वर्ष 2020-21 से अलग-अलग वर्षों में गठित किए गए हैं और वर्तमान में विकास तथा व्यावसायिक गतिविधियों के अलग-अलग चरणों में हैं।
इसी कारण सभी FPOs का कारोबार एक समान नहीं है। उनका कारोबार संगठन के संचालन की अवधि, व्यावसायिक गतिविधियों के स्तर और बाजार में उनकी पहुंच के आधार पर अलग-अलग होता है।
किसानों के सामूहिक कारोबार को मिल रहा बढ़ावा
FPO मॉडल किसानों को व्यक्तिगत स्तर के बजाय सामूहिक रूप से कृषि व्यवसाय करने का अवसर देता है। किसान एक संगठन के माध्यम से इनपुट की खरीद, कृषि उपज का संग्रह, प्राथमिक प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और बाजार में बिक्री जैसी गतिविधियों को बेहतर ढंग से संचालित कर सकते हैं।
सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों से पता चलता है कि 10,000 FPOs का गठन और 20,358 करोड़ रुपये का संचयी कारोबार इस योजना के तहत विकसित हो रहे किसान संगठनों की व्यावसायिक गतिविधियों को दर्शाता है।
महिलाओं की भागीदारी भी इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 1,175 पूर्णतः महिला सदस्यता वाले FPOs और कुल स्टेकहोल्डर्स में लगभग 40 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी से यह संकेत मिलता है कि किसान संगठनों के माध्यम से महिलाओं को भी कृषि व्यवसाय की मुख्यधारा में शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से दी जा रही प्रबंधन लागत, इक्विटी अनुदान, ऋण गारंटी और पांच वर्षों तक पेशेवर हैंड होल्डिंग सहायता FPOs को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा है। इसका उद्देश्य इन संगठनों को दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना और किसानों को कृषि उपज के बेहतर विपणन एवं बाजार अवसर उपलब्ध कराना है।

