कृषि क्षेत्र को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार के एग्रीस्टैक (AgriStack) और डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission) के तहत तेजी से काम किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, 3 अगस्त 2026 तक देशभर में 10.31 करोड़ से अधिक किसान आईडी (Farmer IDs) बनाई जा चुकी हैं। इन डिजिटल पहचान के माध्यम से किसानों को कृषि से जुड़ी विभिन्न सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ अधिक कुशल, पारदर्शी और तेजी से उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में श्रीमती अधिकारीमायुम शारदा देवी और डॉ. अशोक कुमार मित्तल के प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
किसान-केंद्रित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर है एग्रीस्टैक
सरकार के अनुसार, एग्रीस्टैक किसान-केंद्रित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) है, जिसे किसानों तक सरकारी सेवाओं और योजनाओं का आसान, त्वरित और प्रभावी वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विकसित किया गया है।
एग्रीस्टैक के माध्यम से प्रत्येक किसान का एक व्यापक डिजिटल प्रोफाइल तैयार करने की व्यवस्था की गई है। इसमें किसान से संबंधित विवरण, भूमि अभिलेख, उगाई जाने वाली फसलें तथा पशुधन और मत्स्य पालन जैसी कृषि से जुड़ी संपत्तियों की जानकारी शामिल की जाती है।
इस डिजिटल व्यवस्था में कृषि क्षेत्र से संबंधित तीन प्रमुख रजिस्टर शामिल हैं। इनमें किसान रजिस्टर (Farmer Registry), भू-संदर्भित ग्राम मानचित्र (Geo-referenced Village Maps) और बोई गई फसल का रजिस्टर (Crop Sown Registry) शामिल हैं। इन रजिस्टरों का निर्माण और रखरखाव संबंधित राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा किया जाता है।
किसान रजिस्टर बनेगा कृषि सेवाओं का आधार
एग्रीस्टैक के तहत तैयार किया जा रहा किसान रजिस्टर कृषि सेवाओं के कुशल, पारदर्शी और त्वरित वितरण के लिए एक बुनियादी डिजिटल डेटाबेस के रूप में काम करने के लिए तैयार किया गया है।
सरकार के अनुसार, किसान रजिस्टर को विभिन्न किसान-केंद्रित योजनाओं, सेवाओं और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को कृषि ऋण, फसल बीमा, मौसम संबंधी सलाह और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) आधारित फसल खरीद जैसी सेवाओं तक बेहतर और तेज पहुंच उपलब्ध कराना है।
किसानों की जानकारी को उनके डिजिटल भूमि अभिलेखों के साथ सिंक्रनाइज़ करके किसान आईडी तैयार की जाती है। यह डिजिटल पहचान भविष्य में किसानों को विभिन्न कृषि सेवाओं तक पहुंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
3 अगस्त तक 10.31 करोड़ से अधिक किसान आईडी
सरकार द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, 3 अगस्त 2026 तक देशभर में 10.31 करोड़ से अधिक किसान आईडी बनाई जा चुकी हैं।
यह डिजिटल पहचान किसानों के भूमि रिकॉर्ड और अन्य संबंधित जानकारियों से जुड़ी हुई है। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सेवाओं और योजनाओं के वितरण को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।
हालांकि, सरकार द्वारा दिए गए इस उत्तर में मणिपुर के लिए अलग से किसान आईडी की संख्या नहीं बताई गई है। सरकार ने कहा है कि मणिपुर किसान आईडी बनाने की प्रक्रिया में भाग ले रहा है।
648 जिलों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण
किसानों की डिजिटल पहचान के साथ-साथ फसलों की डिजिटल जानकारी जुटाने के लिए भी बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, रबी 2025-26 के दौरान देश के 648 जिलों में डिजिटल फसल सर्वेक्षण (Digital Crop Survey-DCS) आयोजित किया गया। इस सर्वेक्षण के दौरान 31.3 करोड़ से अधिक भूखंडों को कवर किया गया।
डिजिटल फसल सर्वेक्षण के माध्यम से खेतों में बोई गई फसलों की जानकारी को डिजिटल रूप में दर्ज करने का प्रयास किया जा रहा है। इससे कृषि क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों की उपलब्धता और उपयोगिता बढ़ने की उम्मीद है।
सरकार ने बताया कि मणिपुर ने भी डिजिटल फसल सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी है और राज्य किसान आईडी बनाने की प्रक्रिया में भाग ले रहा है।
राज्यों के पास रहेगा किसान डेटा का स्वामित्व
सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य किसान रजिस्ट्री का निर्माण संघीय प्रणाली (Federal System) के तहत किया गया है। इसका अर्थ है कि किसान रजिस्ट्री में उपलब्ध डेटा का स्वामित्व संबंधित राज्यों के पास रहता है।
केंद्र सरकार ने एग्रीस्टैक को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 के अनुरूप विकसित किया है।
सरकार के अनुसार, इसका उद्देश्य किसानों की व्यक्तिगत और कृषि संबंधी जानकारी की गोपनीयता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
किसानों की सहमति के बिना डेटा साझा नहीं
सरकार ने बताया कि एग्रीस्टैक के तहत किसानों का डेटा उनकी सहमति (Consent) से ही एकत्र किया जाता है। किसानों को यह नियंत्रण भी दिया गया है कि उनके डेटा को निर्धारित उद्देश्यों के लिए किन अधिकृत संस्थाओं के साथ साझा किया जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य किसान डेटा के उपयोग को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनाना है।
इसके अलावा, एग्रीस्टैक की सुरक्षा सुविधाओं को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (CERT-In) के साइबर सुरक्षा दिशानिर्देशों के अनुरूप रखा गया है।
सरकार के अनुसार, एग्रीस्टैक में किसानों की जानकारी को एन्क्रिप्टेड रूप में सुरक्षित रखा जाता है, ताकि उसे केवल अधिकृत सिस्टम ही पढ़ सकें।
फसल उपज के आकलन में AI और Machine Learning का इस्तेमाल
डिजिटल कृषि व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य फसल उत्पादन और उपज के अधिक सटीक आंकड़े तैयार करना भी है। इसके लिए सरकार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) और मशीन लर्निंग (Machine Learning-ML) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
सरकार के अनुसार, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की YES-TECH पहल के तहत धान, गेहूं और सोयाबीन जैसी फसलों के लिए प्रौद्योगिकी आधारित उपज आकलन लागू किया जा रहा है।
इस पहल के अंतर्गत फसल उपज के आकलन के लिए AI और Machine Learning को महत्वपूर्ण तकनीकी दृष्टिकोण के रूप में चिन्हित किया गया है।
इससे फसल कटाई प्रयोगों और अन्य पारंपरिक प्रक्रियाओं के साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए अधिक सटीक और समयबद्ध उपज अनुमान तैयार करने में मदद मिल सकती है।
Digital General Crop Estimation System भी विकसित
फसल उपज के आकलन को और अधिक डिजिटल एवं वैज्ञानिक बनाने के लिए सरकार ने Digital General Crop Estimation System (DGCES) नामक डिजिटल पहल विकसित की है।
सरकार के अनुसार, DGCES का उद्देश्य फसल उत्पादन के अनुमान के लिए सटीक और समय पर फसल उपज संबंधी डेटा उपलब्ध कराना है।
AI, Machine Learning और डिजिटल फसल सर्वेक्षण जैसी तकनीकों के साथ इस प्रकार की डिजिटल प्रणालियां कृषि क्षेत्र में बेहतर डेटा आधारित निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
कृषि सेवाओं के डिजिटल रूपांतरण की ओर बड़ा कदम
एग्रीस्टैक और डिजिटल कृषि मिशन के तहत किसान आईडी, डिजिटल भूमि रिकॉर्ड, किसान रजिस्टर और डिजिटल फसल सर्वेक्षण जैसी व्यवस्थाएं कृषि क्षेत्र के डिजिटल रूपांतरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
किसानों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ-साथ इन डिजिटल प्रणालियों का उद्देश्य कृषि ऋण, फसल बीमा, मौसम संबंधी सलाह, MSP आधारित खरीद और अन्य किसान-केंद्रित सेवाओं तक पहुंच को आसान बनाना है।
वहीं, फसल उपज के आकलन में AI और Machine Learning के इस्तेमाल से कृषि उत्पादन के अधिक सटीक आंकड़े तैयार करने की दिशा में भी नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं।
सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में 10.31 करोड़ से अधिक किसान आईडी का निर्माण और 31.3 करोड़ से अधिक भूखंडों का डिजिटल फसल सर्वेक्षण में शामिल होना भारत में Digital Agriculture के तेजी से विस्तार को दर्शाता है।

