भारत सरकार ने देश के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र यानी एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) में मछली पकड़ने की गतिविधियों को व्यवस्थित करने के साथ-साथ पारंपरिक मछुआरों और छोटे मत्स्य उद्यमियों के लिए नए अवसर खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार द्वारा रीयलक्राफ्ट (REALCRAFT) पोर्टल के माध्यम से ईईजेड में मछली पकड़ने के लिए निःशुल्क डिजिटल एक्सेस पास जारी किए जा रहे हैं। अब तक तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आवेदनों के आधार पर 9,650 एक्सेस पास जारी किए जा चुके हैं।
इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक मछुआरों, मत्स्य सहकारी समितियों और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs) को देश के ईईजेड में मछली पकड़ने की गतिविधियों का विस्तार करने के लिए सक्षम बनाना है। साथ ही सरकार समुद्री मत्स्य संसाधनों के टिकाऊ और वैज्ञानिक दोहन पर भी जोर दे रही है।
मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने राज्यसभा में पूछे गए एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
12 से 200 समुद्री मील तक मछली पकड़ने के लिए व्यवस्था
भारत का विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र समुद्री सीमा से आगे का महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है, जहां देश को प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग के विशेष अधिकार प्राप्त हैं। सरकार की नई व्यवस्था के तहत ईईजेड में मछली पकड़ने की गतिविधियों के लिए डिजिटल एक्सेस पास आवश्यक बनाया गया है।
ईईजेड में 12 से 200 समुद्री मील तक का क्षेत्र शामिल है। सरकार द्वारा यह व्यवस्था 4 नवंबर 2025 को अधिसूचित ‘विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र में मत्स्य पालन के सतत दोहन संबंधी नियम, 2025’ के तहत लागू की गई है।
नियमों के अनुसार मछली पकड़ने वाले जहाजों तथा 24 मीटर से अधिक लंबी मोटर चालित नौकाओं के लिए एक्सेस पास आवश्यक है। हालांकि, स्थानीय आजीविका की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गैर-मोटर चालित नौकाओं को इस व्यवस्था से पूरी तरह छूट दी गई है।
इससे यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि पारंपरिक और छोटे स्तर पर मछली पकड़कर आजीविका चलाने वाले समुदायों पर अनावश्यक प्रशासनिक बोझ न पड़े।
पारंपरिक मछुआरों के लिए गहरे समुद्र में नए अवसर
ईईजेड एक्सेस पास प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य छोटे और पारंपरिक मछुआरों को गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों से जोड़ना है। भारत के तटीय क्षेत्रों में लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मत्स्य क्षेत्र पर निर्भर हैं।
समुद्र के तटीय क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों पर दबाव बढ़ने के कारण गहरे समुद्र में मत्स्य संसाधनों के वैज्ञानिक और टिकाऊ उपयोग की संभावनाएं बढ़ी हैं। सरकार का प्रयास है कि पारंपरिक मछुआरों, सहकारी समितियों और एफएफपीओ को आधुनिक तकनीक, वित्तीय सहायता और बेहतर बुनियादी ढांचे से जोड़कर उन्हें इन अवसरों का लाभ दिलाया जाए।
गहरे समुद्र में मछली पकड़ने से मछुआरों को अप्रयुक्त या कम उपयोग किए जा रहे मत्स्य संसाधनों तक पहुंच मिल सकती है। इससे उनकी आय बढ़ाने के साथ-साथ मत्स्य उत्पादों के प्रसंस्करण और निर्यात के नए अवसर भी विकसित किए जा सकते हैं।
कर्नाटक और गुजरात सबसे आगे
5 अगस्त 2026 तक जारी किए गए 9,650 एक्सेस पास में कर्नाटक और गुजरात सबसे आगे रहे हैं। कर्नाटक में 2,563 और गुजरात में 2,524 एक्सेस पास जारी किए गए हैं।
इसके बाद आंध्र प्रदेश में 1,952, ओडिशा में 887, महाराष्ट्र में 627, दमन और दीव में 372, लक्षद्वीप में 257, केरल में 256, गोवा में 87, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में 52, पुडुचेरी में 46, पश्चिम बंगाल में 21 और तमिलनाडु में 6 एक्सेस पास जारी किए गए हैं।
राज्यवार एक्सेस पास
| राज्य/केंद्र शासित प्रदेश | जारी एक्सेस पास |
| कर्नाटक | 2,563 |
| गुजरात | 2,524 |
| आंध्र प्रदेश | 1,952 |
| ओडिशा | 887 |
| महाराष्ट्र | 627 |
| दमन और दीव | 372 |
| लक्षद्वीप | 257 |
| केरल | 256 |
| गोवा | 87 |
| अंडमान और निकोबार | 52 |
| पुडुचेरी | 46 |
| पश्चिम बंगाल | 21 |
| तमिलनाडु | 6 |
| कुल | 9,650 |
आंकड़े बताते हैं कि पश्चिमी और दक्षिणी तटीय राज्यों में इस डिजिटल व्यवस्था को लेकर काफी सक्रियता दिखाई गई है। कर्नाटक, गुजरात और आंध्र प्रदेश से बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए हैं।
मछली निर्यात को भी मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने ईईजेड और खुले समुद्र में भारतीय मछली पकड़ने वाले जहाजों के माध्यम से पकड़ी गई मछलियों के लिए निर्यात के नए अवसर खोलने की दिशा में भी कदम उठाया है।
केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषणा की गई थी कि भारतीय ईईजेड या खुले समुद्र में भारतीय मत्स्य जहाजों द्वारा पकड़ी गई मछली पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। इसके साथ ही विदेशी बंदरगाहों पर उतारी गई ऐसी मछलियों को माल के निर्यात के रूप में माना जाएगा।
इस व्यवस्था के साथ पारगमन या माल हस्तांतरण के दौरान किसी तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक सुरक्षा उपाय भी किए जाने हैं।
बजट घोषणा के बाद सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 में आवश्यक संशोधन किए गए हैं, ताकि ईईजेड में पकड़ी गई मछली को शुल्क मुक्त बनाने की व्यवस्था लागू की जा सके।
इससे भारतीय मछली उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने और समुद्री मत्स्य क्षेत्र से जुड़े लोगों की आय बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
रीयलक्राफ्ट पोर्टल को निर्यात व्यवस्था से जोड़ा गया
ईईजेड के लिए डिजिटल एक्सेस पास जारी करने वाली व्यवस्था को केवल अनुमति प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा गया है। रीयलक्राफ्ट पोर्टल को समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी MPEDA और निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) से जोड़ा गया है।
इस एकीकरण का उद्देश्य मछली पकड़ने से लेकर निर्यात तक की प्रक्रिया को अधिक सुचारू बनाना है। इसके माध्यम से मछली पकड़ने की गतिविधियों, निर्यात और आवश्यक स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों से जुड़ी प्रक्रियाओं में बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।
साथ ही पर्यावरण-अनुकूल लेबलिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजारों की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रमाणन व्यवस्था को भी मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
सहकारिता के माध्यम से छोटे मछुआरों को समर्थन
सरकार ईईजेड में मछली पकड़ने की क्षमता बढ़ाने के लिए सहकारी संस्थाओं और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों को भी मजबूत कर रही है। मत्स्य विभाग और सहकारिता मंत्रालय संयुक्त कार्य समूह यानी Joint Working Group (JWG) के माध्यम से छोटे मछुआरों, मत्स्य सहकारी समितियों और एफएफपीओ के लिए गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, कटाई के बाद की प्रक्रिया, प्रसंस्करण और निर्यात को बढ़ावा देने पर काम कर रहे हैं।
इसका उद्देश्य छोटे मछुआरों को केवल मछली पकड़ने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें पूरी वैल्यू चेन से जोड़ना है। यदि मछली पकड़ने के बाद उसकी सफाई, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और निर्यात की बेहतर व्यवस्था विकसित होती है, तो मत्स्य उत्पादों से मिलने वाला मूल्य बढ़ सकता है और उसका लाभ मछुआरों तक पहुंचाया जा सकता है।
NCDC के माध्यम से वित्तीय सहायता
सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने और उन्हें वित्तीय संसाधनों तक बेहतर पहुंच उपलब्ध कराने में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। एनसीडीसी के माध्यम से सहकारी संस्थाओं को सहकारी ऋण तक पहुंच उपलब्ध कराने में सहायता दी जा रही है।
प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत एनसीडीसी ने महाराष्ट्र, गुजरात, पुडुचेरी और गोवा में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के अधिग्रहण में सहायता प्रदान की है।
इसके अलावा, भारत सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा लागू मत्स्यपालन और जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) के तहत भी गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के अधिग्रहण में सहायता दी गई है।
इससे मछुआरों और सहकारी संस्थाओं के लिए आधुनिक जहाजों तथा बेहतर तकनीक तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल तकनीक से समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा
ईईजेड एक्सेस पास प्रणाली को देश की मौजूदा डिजिटल मत्स्य पालन और समुद्री सुरक्षा प्रणालियों के साथ भी जोड़ा गया है। यह मछली पकड़ने वाले जहाजों पर लगे उपग्रह आधारित ट्रांसपोंडरों के साथ एकीकृत है।
इसके अलावा इसे ‘नभमित्र’ मोबाइल एप्लिकेशन से भी जोड़ा गया है। इस एकीकरण के माध्यम से समुद्र में मौजूद मछुआरों तक महत्वपूर्ण सुरक्षा और मौसम संबंधी जानकारी पहुंचाई जा सकती है।
नभमित्र के माध्यम से संभावित मत्स्य क्षेत्र यानी Potential Fishing Zone (PFZ) की जानकारी, मौसम पूर्वानुमान, चक्रवात और सुनामी संबंधी चेतावनी, नौवहन संबंधी जानकारी, अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा यानी IMBL की चेतावनी तथा आपातकालीन संचार जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
इसका सीधा लाभ मछुआरों की सुरक्षा और मछली पकड़ने की दक्षता में सुधार के रूप में मिल सकता है।
समुद्री संसाधनों का टिकाऊ उपयोग प्राथमिकता
सरकार की इस पूरी पहल में एक महत्वपूर्ण पहलू समुद्री मत्स्य संसाधनों का सतत दोहन है। गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के अवसर बढ़ाने के साथ यह भी जरूरी है कि समुद्री संसाधनों का अत्यधिक दोहन न हो।
ईईजेड नियम, 2025 के तहत एक्सेस पास व्यवस्था इसी दिशा में एक नियामक ढांचा उपलब्ध कराती है। इसके माध्यम से मछली पकड़ने वाली गतिविधियों को व्यवस्थित करने, जहाजों की निगरानी और समुद्री सुरक्षा को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है।
मत्स्य क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास के लिए उत्पादन बढ़ाने के साथ समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और मत्स्य संसाधनों की रक्षा करना भी आवश्यक है।
मछुआरों की आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
भारत के तटीय समुदायों के लिए मत्स्य पालन केवल व्यवसाय नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में परिवारों की आजीविका का आधार है। ऐसे में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की क्षमता बढ़ाना, आधुनिक जहाज उपलब्ध कराना, वित्तीय सहायता देना और निर्यात के अवसर विकसित करना मछुआरों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
डिजिटल एक्सेस पास की व्यवस्था इस पूरी प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में सामने आई है। इससे एक ओर मछली पकड़ने की गतिविधियों को व्यवस्थित किया जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर मछुआरों को सुरक्षित और नियोजित तरीके से ईईजेड में मत्स्य संसाधनों तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा।
आगे की राह
अब तक जारी 9,650 एक्सेस पास इस व्यवस्था के शुरुआती प्रभाव को दर्शाते हैं। आने वाले समय में यदि अधिक पारंपरिक मछुआरे, सहकारी समितियां और एफएफपीओ इस प्रणाली से जुड़ते हैं और उन्हें आधुनिक जहाज, वित्त, तकनीक, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण और निर्यात बाजार से जोड़ा जाता है, तो भारत के समुद्री मत्स्य क्षेत्र में बड़ा बदलाव संभव है।
सरकार की कोशिश केवल गहरे समुद्र में मछली पकड़ने को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि मछुआरों की सुरक्षा, समुद्री संसाधनों का संरक्षण, बेहतर उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और अंतरराष्ट्रीय निर्यात को एक साथ आगे बढ़ाना है।
इस तरह ईईजेड के लिए डिजिटल एक्सेस पास व्यवस्था भारत के समुद्री मत्स्य क्षेत्र को अधिक संगठित, सुरक्षित, तकनीक आधारित और निर्यात-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इसका सबसे बड़ा लाभ तब होगा, जब पारंपरिक और छोटे मछुआरे भी इस पूरी मूल्य श्रृंखला में सक्रिय भागीदार बनें और समुद्र से मिलने वाले संसाधनों का लाभ सीधे उनकी आजीविका और आय में दिखाई दे।

