भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रबंधन अकादमी (ICAR–NAARM) ने अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं। अकादमी के गोल्डन जुबली वर्ष के अवसर पर आयोजित समारोह में कृषि क्षेत्र में नेतृत्व विकास, क्षमता निर्माण, नवाचार, डिजिटल कृषि और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार कृषि पेशेवरों के निर्माण पर विशेष जोर दिया गया। समारोह में कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार को एक साथ जोड़कर कृषि एवं खाद्य प्रणालियों को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव तथा ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने ICAR–NAARM की पांच दशक लंबी यात्रा और कृषि क्षेत्र में उसके योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अकादमी से कृषि क्षेत्र में एग्री-फूड सिस्टम्स अप्रोच को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। उनके अनुसार कृषि के बदलते स्वरूप को देखते हुए अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार सेवाओं को अलग-अलग देखने के बजाय एक समग्र प्रणाली के रूप में आगे बढ़ाना आवश्यक है।
उन्होंने कृषि क्षेत्र में मजबूत नेतृत्व और क्षमता आधारित प्रशिक्षण (Competency-based Capacity Building) को समय की आवश्यकता बताया। डॉ. जाट ने कहा कि कृषि क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में सक्षम और भविष्य के लिए तैयार पेशेवरों का निर्माण भारत के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य से जोड़ते हुए कृषि नेतृत्व को मजबूत करने पर बल दिया।
पांच दशकों की यात्रा का मना गोल्डन जुबली वर्ष
ICAR–NAARM की 50 वर्षों की यात्रा कृषि अनुसंधान प्रबंधन और मानव संसाधन विकास के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मानी जाती है। बदलते कृषि परिदृश्य में वैज्ञानिक अनुसंधान को बेहतर प्रबंधन, नेतृत्व और संस्थागत क्षमता के साथ जोड़ना लगातार जरूरी हुआ है।
कृषि क्षेत्र अब केवल फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है। इसमें जलवायु परिवर्तन, डिजिटल तकनीक, कृषि बाजार, खाद्य प्रसंस्करण, कृषि उद्यमिता, डेटा आधारित निर्णय, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और वैश्विक खाद्य प्रणालियों जैसे अनेक विषय शामिल हो चुके हैं। ऐसे समय में कृषि पेशेवरों को केवल तकनीकी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें नेतृत्व, प्रबंधन, नवाचार और भविष्य की चुनौतियों को समझने की क्षमता से भी लैस करना जरूरी है।
ICAR–NAARM की गोल्डन जुबली इसी व्यापक भूमिका को रेखांकित करती है। अकादमी ने पांच दशकों में कृषि क्षेत्र के मानव संसाधन और नेतृत्व क्षमता को मजबूत करने की दिशा में अपनी भूमिका निभाई है।
कृषि को एग्री-फूड सिस्टम के रूप में देखने की जरूरत
समारोह में डॉ. एम. एल. जाट ने Agri-Food Systems Approach को आगे बढ़ाने की बात कही। कृषि व्यवस्था आज उत्पादन से आगे बढ़कर पूरी खाद्य प्रणाली से जुड़ी हुई है। किसान से लेकर उपभोक्ता तक उत्पादन, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन, बाजार और खाद्य सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
ऐसे में कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक है। यदि वैज्ञानिक संस्थानों में विकसित तकनीकों को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना है तो अनुसंधान और विस्तार व्यवस्था के बीच मजबूत कड़ी बनानी होगी। इसी प्रकार कृषि शिक्षा को भी बदलती तकनीक और बाजार की जरूरतों के अनुरूप विकसित करना होगा।
ICAR–NAARM को कृषि क्षेत्र में नेतृत्व और प्रबंधन क्षमता विकसित करने वाली संस्था के रूप में इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
विकसित भारत 2047 के लिए कृषि नेतृत्व जरूरी
भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में कृषि क्षेत्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश की बड़ी आबादी की आजीविका कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है। इसलिए विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कृषि क्षेत्र को उत्पादक, टिकाऊ, तकनीक आधारित और बाजार से जुड़ा बनाना आवश्यक है।
इसके लिए ऐसे कृषि पेशेवरों की जरूरत होगी जो केवल अपने क्षेत्र की तकनीकी जानकारी न रखते हों, बल्कि जटिल कृषि चुनौतियों का समाधान करने, संस्थानों का नेतृत्व करने और विभिन्न हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित करने में सक्षम हों।
डॉ. जाट ने कृषि नेतृत्व और क्षमता निर्माण को इसी व्यापक लक्ष्य के संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया। उनका जोर इस बात पर रहा कि भविष्य के कृषि पेशेवरों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया जाए।
नवाचार और डिजिटल कृषि पर विशेष जोर
समारोह में पद्मभूषण डॉ. आर. एस. पारोडा, पूर्व महानिदेशक, ICAR ने भी कृषि क्षेत्र में क्षमता निर्माण की नई प्राथमिकताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने Innovation Systems, Agricultural Foresight, Digital Agriculture और Innovation-led Entrepreneurship जैसे क्षेत्रों में क्षमता मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
कृषि में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। रिमोट सेंसिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ड्रोन, सैटेलाइट डेटा, डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म और डेटा आधारित निर्णय प्रणाली कृषि उत्पादन और प्रबंधन को नई दिशा दे रहे हैं।
ऐसे में कृषि पेशेवरों को इन तकनीकों की जानकारी के साथ-साथ उनके व्यावहारिक उपयोग और प्रभाव को समझना भी जरूरी होगा। डिजिटल कृषि केवल तकनीक अपनाने का विषय नहीं है, बल्कि यह किसानों तक सही जानकारी पहुंचाने, संसाधनों के बेहतर उपयोग और कृषि निर्णयों को अधिक प्रभावी बनाने से भी जुड़ा है।
Agricultural Foresight की बढ़ती भूमिका
डॉ. आर. एस. पारोडा ने Agricultural Foresight पर भी जोर दिया। कृषि क्षेत्र में भविष्य की संभावित परिस्थितियों का आकलन करना अब पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
जलवायु परिवर्तन, बदलते बाजार, वैश्विक व्यापार, खाद्य मांग, नई तकनीकों और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव के कारण कृषि क्षेत्र के सामने नई चुनौतियां लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में कृषि संस्थानों और नीति निर्माताओं को केवल वर्तमान समस्याओं पर प्रतिक्रिया देने के बजाय भविष्य की संभावित परिस्थितियों के लिए पहले से तैयारी करनी होगी।
Agricultural Foresight कृषि क्षेत्र को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करने में मदद कर सकता है। इससे नीतियों, अनुसंधान प्राथमिकताओं और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी तरीके से तैयार किया जा सकता है।
इनोवेशन आधारित उद्यमिता से जुड़ेंगे कृषि पेशेवर
समारोह में Innovation-led Entrepreneurship को भी महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में सामने रखा गया। कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप और नवाचार आधारित उद्यमिता के लिए लगातार नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
कृषि मशीनरी, डिजिटल एग्रीकल्चर, एग्री-इनपुट, फूड प्रोसेसिंग, सप्लाई चेन, प्रिसिजन फार्मिंग और कृषि सेवाओं के क्षेत्र में नई तकनीकों के साथ उद्यमिता को जोड़ा जा सकता है।
यदि कृषि पेशेवरों को अनुसंधान के साथ उद्यमिता और व्यावसायिक कौशल का प्रशिक्षण दिया जाए, तो वे वैज्ञानिक विचारों को व्यावहारिक समाधानों में बदलने में अधिक सक्षम हो सकते हैं।
यह मॉडल रोजगार पैदा करने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के प्रसार को भी गति दे सकता है।
ICAR–NAARM के योगदान की सराहना
समारोह में ICAR के उप महानिदेशक (शिक्षा) डॉ. वाई. एस. मलिक ने ICAR–NAARM के बहुआयामी योगदान की सराहना की। उन्होंने अकादमी की भविष्य की गतिविधियों और पहलों के लिए पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
उन्होंने कृषि क्षेत्र में मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण की जरूरत को रेखांकित करते हुए अकादमी के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया। कृषि शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में संस्थागत क्षमता को मजबूत करना आने वाले समय में कृषि विकास की गति बनाए रखने के लिए आवश्यक होगा।
भविष्य की योजनाओं पर भी हुई चर्चा
ICAR–NAARM के निदेशक डॉ. आर. एम. सुंदरम ने अकादमी की उपलब्धियों, वर्तमान पहलों और भविष्य की कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। उन्होंने संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों और आगे की संभावित दिशाओं को सामने रखा।
गोल्डन जुबली वर्ष में अकादमी का फोकस कृषि क्षेत्र की बदलती जरूरतों के अनुरूप मानव संसाधन और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर रहेगा। कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों और प्रबंधन प्रणालियों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को भी नए आयाम देने की आवश्यकता है।
कृषि अनुसंधान और किसानों के बीच मजबूत कड़ी जरूरी
भारत में कृषि अनुसंधान संस्थानों ने फसल उत्पादन, पशुपालन, बागवानी, मत्स्य पालन और कृषि तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। लेकिन अनुसंधान का वास्तविक प्रभाव तभी बढ़ सकता है जब उसकी तकनीक और जानकारी किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।
इसके लिए Research–Education–Extension के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। वैज्ञानिक संस्थानों में विकसित तकनीक को किसानों की स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप ढालना, कृषि विस्तार व्यवस्था को मजबूत करना और किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण देना इस प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
ICAR–NAARM द्वारा कृषि नेतृत्व और क्षमता निर्माण पर दिया जा रहा जोर इस पूरी व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में योगदान दे सकता है।
बदलते कृषि क्षेत्र के लिए तैयार होंगे नए प्रोफेशनल
आज कृषि क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवरों के सामने चुनौतियां पहले की तुलना में अधिक जटिल हैं। उन्हें कृषि विज्ञान के साथ-साथ डेटा, डिजिटल तकनीक, बाजार, जलवायु परिवर्तन, नीति, उद्यमिता और प्रबंधन जैसे विषयों की भी समझ होनी चाहिए।
इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए भविष्य के कृषि पेशेवरों को Future-ready बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐसे मानव संसाधन तैयार करना है जो कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे सकें, संस्थानों का प्रभावी नेतृत्व कर सकें और किसानों तथा अन्य हितधारकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप समाधान विकसित कर सकें।
50 साल बाद नई जिम्मेदारी
ICAR–NAARM का 50वां स्थापना वर्ष अकादमी की पांच दशक लंबी उपलब्धियों का उत्सव होने के साथ-साथ भविष्य की जिम्मेदारियों को निर्धारित करने का अवसर भी है। कृषि क्षेत्र तेजी से बदल रहा है और आने वाले वर्षों में तकनीक, नवाचार, जलवायु परिवर्तन तथा बाजार की भूमिका और अधिक बढ़ने की संभावना है।
ऐसे में कृषि क्षेत्र के लिए केवल वैज्ञानिक ज्ञान पर्याप्त नहीं होगा। मजबूत नेतृत्व, संस्थागत क्षमता, नवाचार की संस्कृति और भविष्य की परिस्थितियों का आकलन करने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
गोल्डन जुबली समारोह में सामने आए विचारों से स्पष्ट है कि ICAR–NAARM भविष्य के कृषि नेतृत्व को विकसित करने और कृषि क्षेत्र में क्षमता निर्माण को नई दिशा देने की भूमिका को और मजबूत करने की ओर बढ़ रहा है।
ICAR–NAARM के 50 वर्ष पूरे होना भारतीय कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। गोल्डन जुबली समारोह में कृषि नेतृत्व, क्षमता आधारित प्रशिक्षण, एग्री-फूड सिस्टम्स, डिजिटल कृषि, Agricultural Foresight और Innovation-led Entrepreneurship जैसे विषयों पर दिया गया जोर यह दर्शाता है कि भविष्य की कृषि केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी।
विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ऐसे कृषि पेशेवरों की जरूरत होगी जो तकनीकी रूप से सक्षम होने के साथ-साथ नेतृत्व, प्रबंधन, नवाचार और भविष्य की चुनौतियों को समझने में भी सक्षम हों। ICAR–NAARM की आगामी भूमिका इसी दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।
पांच दशकों की उपलब्धियों के बाद अब अकादमी के सामने अगली पीढ़ी के कृषि नेतृत्व को तैयार करने की जिम्मेदारी है। यदि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार को एकीकृत करते हुए डिजिटल तकनीक, नवाचार और उद्यमिता को क्षमता निर्माण का हिस्सा बनाया जाता है, तो भारत के कृषि क्षेत्र को अधिक मजबूत, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
