केंद्र सरकार ने देश को खाद्य तेल उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने नेशनल ऑयल पाम मिशन (NMEO-OP) की शुरुआत की है, जिसके तहत देश में पाम तेल का घरेलू उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस योजना से किसानों को सीधे तौर पर लाभ पहुंचेगा और उनकी आमदनी में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी।
भारत में हर साल बड़ी मात्रा में पाम तेल का आयात किया जाता है, जिससे सरकार के बजट पर भारी बोझ पड़ता है। मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे देशों से होने वाले इस आयात को कम करने और आत्मनिर्भर बनने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने पाम ऑयल मिशन की शुरुआत की है।
क्या है नेशनल ऑयल पाम मिशन?
NMEO-OP, यानी नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल्स–ऑयल पाम, एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है जिसके तहत सरकार ने 2029 तक देश में पाम तेल उत्पादन को 3.5 लाख टन से बढ़ाकर 23 लाख टन करने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए पाम की खेती के लिए 10 लाख हेक्टेयर भूमि को कवर किया जाएगा, जो फिलहाल लगभग 6 लाख हेक्टेयर है।
किसानों को कैसे मिलेगा लाभ?
सरकार इस मिशन के अंतर्गत पाम की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए किसानों को विशेष इंसेंटिव दे रही है। इससे किसानों को पाम बागवानी अपनाने में आर्थिक सहयोग मिलेगा। इतना ही नहीं, देश की प्रमुख कंपनियां जैसे गोदरेज एग्रोवेट, पतंजलि फूड्स और 3F ऑयल पाम एग्रोटेक भी किसानों के साथ साझेदारी कर इस अभियान में भाग ले रही हैं।
कहां-कहां पर सबसे ज्यादा असर?
उत्तर-पूर्वी राज्यों को इस मिशन का सबसे ज्यादा लाभ मिलने वाला है। खासकर असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा जैसे राज्यों में पाम की बागवानी को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। यहां पाम को अन्य फसलों जैसे सब्जियों, दालों और कोकोआ के साथ इंटरक्रॉपिंग के रूप में उगाया जाएगा, जिससे किसानों को दोहरी कमाई होगी।
नेशनल ऑयल पाम मिशन सिर्फ तेल उत्पादन बढ़ाने की योजना नहीं, बल्कि यह किसानों की आमदनी बढ़ाने और देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। सरकारी सहायता और कॉरपोरेट भागीदारी के जरिए यह मिशन देश के कृषि क्षेत्र में नई क्रांति ला सकता है।

