विदेशों में करियर बनाने के बाद अब कई युवा अपनी मातृभूमि और कृषि क्षेत्र की ओर लौट रहे हैं। इसी कड़ी में पंजाब के होशियारपुर जिले के गांव हरता निवासी युवा उद्यमी सिमरदीप सिंह ने खेती और कृषि-आधारित उद्योग में नई शुरुआत करने का संकल्प लिया है। लगभग आठ वर्ष कनाडा में बिताने के बाद भारत लौटे सिमरदीप सिंह ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना का दौरा कर अपने प्रस्तावित प्रीमियम सरसों तेल ब्रांड के लिए विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त किया।
सिमरदीप सिंह एक किसान परिवार से संबंध रखते हैं तथा उन्होंने सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) में शिक्षा प्राप्त की है। कनाडा में लंबे समय तक रहने के बाद उन्होंने भारत लौटकर कृषि क्षेत्र में उद्यमिता के माध्यम से योगदान देने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि उनका उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाला प्रीमियम सरसों तेल तैयार कर उपभोक्ताओं तक शुद्ध एवं भरोसेमंद उत्पाद पहुंचाना है।
यह दौरा कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बहोवाल, होशियारपुर के एग्रोनॉमी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. गुरप्रताप सिंह की सलाह पर आयोजित किया गया। इस दौरान सिमरदीप सिंह ने स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज (SBS) और टीम NIDHI-TBI (DST, भारत सरकार) के विशेषज्ञों से मुलाकात कर अपने व्यवसायिक विचार साझा किए और उद्योग से जुड़ी तकनीकी एवं विपणन संबंधी जानकारी प्राप्त की।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के अतिरिक्त निदेशक विस्तार शिक्षा डॉ. तरसेम सिंह ढिल्लों ने युवा उद्यमी की योजना को ध्यानपूर्वक सुना और सरसों तेल उत्पादन में बीज गुणवत्ता के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने सलाह दी कि उच्च गुणवत्ता वाले तेल उत्पादन के लिए पीएयू द्वारा अनुशंसित सरसों की उन्नत किस्मों का उपयोग किया जाना चाहिए। इससे तेल की गुणवत्ता बेहतर होगी, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के बीच उत्पाद की विश्वसनीयता भी मजबूत होगी।
डॉ. ढिल्लों ने कहा कि आज के समय में उपभोक्ता केवल उत्पाद नहीं बल्कि उसकी गुणवत्ता, शुद्धता और विश्वसनीयता को भी महत्व देते हैं। ऐसे में यदि किसान एवं युवा उद्यमी वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाते हैं, तो वे कृषि आधारित उद्योगों में बड़ी सफलता प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में मूल्य संवर्धन आधारित उद्योगों की अपार संभावनाएं हैं।
स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज के निदेशक एवं NIDHI-TBI के प्रधान अन्वेषक डॉ. रमणदीप सिंह ने सिमरदीप सिंह का स्वागत करते हुए उनके प्रयास की सराहना की। उन्होंने कहा कि विदेश में सफल करियर के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़कर कृषि क्षेत्र में योगदान देना प्रेरणादायक कदम है। डॉ. सिंह ने उद्यमी को मजबूत वितरण नेटवर्क विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने प्रभावी डीलर नियुक्ति, बाजार में पैठ बनाने की रणनीतियों और ग्राहकों के साथ भरोसेमंद संबंध स्थापित करने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी खाद्य बाजार में केवल उत्पाद बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं तक सही तरीके से पहुंच बनाना भी उतना ही आवश्यक है। यदि ब्रांड की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी मार्केटिंग और वितरण प्रणाली मजबूत हो, तो नया उद्यम भी कम समय में बाजार में अपनी पहचान बना सकता है।
खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की प्रधान खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. पूनम ए. सचदेव ने सरसों तेल उद्योग से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने खाद्य सुरक्षा मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण, उत्पाद की शेल्फ लाइफ बढ़ाने की तकनीकों तथा नियामकीय आवश्यकताओं के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि खाद्य उत्पादों के क्षेत्र में उपभोक्ता सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होती है, इसलिए उत्पादन प्रक्रिया में स्वच्छता एवं गुणवत्ता मानकों का पालन अत्यंत आवश्यक है।
पीएयू के प्रोसेसिंग एवं फूड इंजीनियरिंग विभाग की प्रधान वैज्ञानिक डॉ. प्रीतिंदर कौर ने सरसों तेल निष्कर्षण तकनीकों, मशीनरी चयन और उत्पादन दक्षता पर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने उद्यमी को आधुनिक तेल निष्कर्षण इकाइयों की कार्यप्रणाली के बारे में समझाते हुए बताया कि सही मशीनरी और वैज्ञानिक प्रसंस्करण तकनीक उत्पादन लागत कम करने तथा गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इसके अलावा उन्होंने पैकेजिंग और भंडारण संबंधी उपायों पर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आकर्षक एवं सुरक्षित पैकेजिंग किसी भी खाद्य उत्पाद की बाजार में पहचान और उपभोक्ता विश्वास को मजबूत करती है। उचित भंडारण व्यवस्था उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने में सहायक होती है और इसकी शेल्फ लाइफ को भी बढ़ाती है।
टीम NIDHI-TBI की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी गुरिंदर सिंह और बिजनेस मैनेजर समीर गौतम ने उद्यमी को ब्रांडिंग, लेबलिंग और उत्पाद की बाजार में सही स्थिति तय करने के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि आज के समय में उपभोक्ता उत्पाद की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी प्रस्तुति और ब्रांड छवि को भी महत्व देते हैं। इसलिए प्रभावी ब्रांडिंग किसी भी नए उद्यम की सफलता में अहम भूमिका निभाती है।
उन्होंने सिमरदीप सिंह को NIDHI-TBI के अंतर्गत उपलब्ध इन्क्यूबेशन सुविधाओं, स्टार्टअप सहायता, मेंटरशिप एवं व्यवसायिक सहयोग योजनाओं के बारे में जानकारी दी और आगे के उद्यमी सहयोग के लिए उनके पंजीकरण की प्रक्रिया भी पूरी करवाई।
यह पहल न केवल कृषि क्षेत्र में युवाओं की बढ़ती रुचि को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि आधुनिक शिक्षा और वैश्विक अनुभव रखने वाले युवा अब भारतीय कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को नए दृष्टिकोण और तकनीकी नवाचारों के साथ आगे बढ़ाने के लिए तैयार हैं।

