देश में कृषि और उर्वरक क्षेत्र को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए The Fertiliser Association of India (एफएआई) द्वारा “आईसीटी फॉर स्मार्ट फर्टिलाइजर मैनेजमेंट” विषय पर चार दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम 19 से 22 मई 2026 तक हिमाचल प्रदेश के कुफरी स्थित स्टर्लिंग रिजॉर्ट में आयोजित होगा।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य उर्वरक एवं कृषि-इनपुट क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों को कृषि मूल्य श्रृंखला में डिजिटल तकनीकों के प्रभावी उपयोग के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना है। कार्यक्रम में उत्पादन, सप्लाई चेन प्रबंधन, प्रिसिजन फार्मिंग, पर्यावरण निगरानी और डेटा आधारित कृषि समाधान जैसे विषयों पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन दिया जाएगा।
कार्यक्रम का उद्घाटन एफएआई के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी करेंगे। इस अवसर पर वे प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उर्वरक उद्योग में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) की बढ़ती आवश्यकता और इसकी भविष्य में भूमिका पर प्रकाश डालेंगे। उनका संबोधन इस बात पर केंद्रित रहेगा कि वर्तमान समय में डिजिटल तकनीकों को अपनाना केवल विकल्प नहीं बल्कि उर्वरक उद्योग के भविष्य के लिए अनिवार्य बन चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत तेजी से पारदर्शी, कुशल और डेटा आधारित कृषि व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में उर्वरक उपयोग दक्षता बढ़ाने, मिट्टी और फसल की वास्तविक समय में निगरानी करने तथा पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में आईसीटी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), सेंसर नेटवर्क, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन तकनीक, सैटेलाइट इमेजिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एडवाइजरी सिस्टम जैसे आधुनिक डिजिटल उपकरणों के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इन तकनीकों के माध्यम से कृषि और उर्वरक क्षेत्र को अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और टिकाऊ बनाने की संभावनाओं पर चर्चा होगी।
कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे। इनमें मांग और आपूर्ति पूर्वानुमान के लिए प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, आयात प्रबंधन में आईसीटी की भूमिका, लॉजिस्टिक्स के लिए ब्लॉकचेन तकनीक, एआई आधारित स्मार्ट सलाह प्रणाली, रिमोट सेंसिंग, मिट्टी एवं फसल निगरानी के लिए IoT सेंसर नेटवर्क, पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ाने हेतु बिग डेटा एनालिटिक्स तथा उर्वरक संयंत्रों में सुरक्षा एवं अनुपालन के लिए साइबर सिस्टम जैसे विषय शामिल हैं।
इसके अलावा “ब्लू ओशन स्ट्रेटेजी” में डिजिटल तकनीकों की भूमिका और “स्मार्ट फार्मिंग” के अंतर्गत प्रिसिजन एग्रीकल्चर द्वारा अधिक उत्पादन एवं बेहतर दक्षता हासिल करने पर भी चर्चा की जाएगी। विशेषज्ञ बताएंगे कि किस प्रकार आधुनिक डिजिटल उपकरण किसानों को सही समय पर सही मात्रा में उर्वरक उपयोग करने में मदद कर सकते हैं, जिससे लागत कम होगी और उत्पादन में वृद्धि होगी।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम विशेष रूप से उत्पादन योजना, सप्लाई चेन एवं लॉजिस्टिक्स, बिक्री एवं विपणन, डिजिटल कृषि, वित्त और एग्री-बिजनेस संचालन से जुड़े पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है। कार्यक्रम में उर्वरक उद्योग, कृषि संस्थानों, एग्री-टेक स्टार्टअप्स और कंसल्टेंसी संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी एवं विशेषज्ञ प्रशिक्षण देंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीकों के उपयोग से कृषि क्षेत्र में कई नई संभावनाएं खुल रही हैं। ड्रोन आधारित निगरानी, सेंसर आधारित मिट्टी परीक्षण और एआई आधारित सलाह प्रणालियां किसानों को अधिक सटीक निर्णय लेने में मदद कर रही हैं। इससे उर्वरकों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित होगा और पर्यावरणीय नुकसान भी कम होगा।
एफएआई ने कहा कि भविष्य की कृषि पूरी तरह डेटा आधारित और तकनीक संचालित होगी। ऐसे में उर्वरक उद्योग को भी डिजिटल परिवर्तन के लिए तैयार रहना होगा। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रतिभागियों को नई तकनीकों को समझने और उन्हें व्यावहारिक रूप से अपनाने में सहायता करेगा।
गौरतलब है कि The Fertiliser Association of India की स्थापना वर्ष 1955 में हुई थी। यह देश का एक प्रमुख गैर-लाभकारी संगठन है, जो उर्वरक निर्माताओं, आयातकों, तकनीकी सेवा प्रदाताओं, उपकरण आपूर्तिकर्ताओं और शोधकर्ताओं का प्रतिनिधित्व करता है। संगठन का उद्देश्य उर्वरक क्षेत्र की कार्यकुशलता बढ़ाना और वैज्ञानिक एवं संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना है।
एफएआई देश की कृषि उत्पादकता और खाद्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह संगठन उद्योग और सरकार के बीच संवाद का सेतु बनने के साथ-साथ नीतिगत सुझाव भी प्रदान करता है। इसके चार क्षेत्रीय कार्यालय, तकनीकी प्रभाग, प्रशिक्षण कार्यक्रम, विशेष अध्ययन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग उर्वरक उत्पादन, वितरण, टिकाऊ कृषि और उर्वरक उपयोग दक्षता में निरंतर सुधार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
इसके अतिरिक्त एफएआई द्वारा प्रकाशित शोध पत्रिकाएं और तकनीकी सामग्री उर्वरक उद्योग एवं नीति निर्माण में व्यापक रूप से उपयोग की जाती हैं। यही कारण है कि संगठन आज देश के कृषि एवं उर्वरक क्षेत्र में एक विश्वसनीय और प्रभावशाली संस्था के रूप में अपनी पहचान बनाए हुए है।

