पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना के विस्तार शिक्षा निदेशालय के कौशल विकास केंद्र द्वारा किसानों, कृषि वैज्ञानिकों एवं ग्रामीण महिलाओं के लिए मशरूम उत्पादन एवं जैविक खेती पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। किसानों की बढ़ती रुचि और भारी मांग को देखते हुए “मशरूम कल्टीवेशन” विषय पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा बैच आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम माइक्रोबायोलॉजी विभाग के सहयोग से डॉ. माखन सिंह भुल्लर के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
इसके साथ ही नौ विस्तार वैज्ञानिकों को रसायन मुक्त उत्पादन हेतु जैविक खेती से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों और कृषि विशेषज्ञों को आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि तकनीकों से परिचित कराना था, ताकि वे खेती को लाभकारी व्यवसाय में बदल सकें।
कार्यक्रम के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. रुपिंदर कौर ने बताया कि पंजाब के विभिन्न जिलों से आए 55 प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। विश्वविद्यालय के विषय विशेषज्ञों ने उन्हें मशरूम उत्पादन से जुड़ी विभिन्न तकनीकों, उत्पादन पद्धतियों और व्यवसायिक संभावनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
अपने संबोधन में डॉ. रुपिंदर कौर ने कहा कि वर्तमान समय में मशरूम उत्पादन और जैविक खेती अत्यंत लाभकारी व्यवसाय के रूप में उभर रहे हैं। इन क्षेत्रों में कार्य करके किसान और ग्रामीण महिलाएं न केवल अपनी आय बढ़ा सकती हैं, बल्कि सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान भी बना सकती हैं। उन्होंने किसानों को मशरूम प्रसंस्करण को बढ़ावा देने की सलाह देते हुए कहा कि मशरूम पाउडर, अचार और अन्य पौष्टिक खाद्य उत्पाद तैयार करके अतिरिक्त आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जैविक खेती के माध्यम से अवशेष मुक्त खाद्यान्न उत्पादन एवं उपभोग को बढ़ावा दिया जा सकता है, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। बढ़ते प्रदूषण और खाद्य पदार्थों में मिलावट की समस्या को देखते हुए अब लोग सुरक्षित और प्राकृतिक खाद्य उत्पादों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं।
प्रशिक्षण कार्यक्रम की समन्वयक डॉ. कुलवीर कौर ने बताया कि कौशल विकास केंद्र द्वारा वर्ष में दो बार मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, ताकि ग्रामीण एवं शहरी पंजाब में इस सहायक व्यवसाय को बढ़ावा दिया जा सके। उन्होंने कहा कि बाजार में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बढ़ती समस्या के कारण जैविक खेती की मांग लगातार बढ़ रही है और किसान भी अब रसायन मुक्त खेती को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को मशरूम उत्पादन के विविध पहलुओं पर जानकारी दी। माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. शिवानी शर्मा, डॉ. जसप्रीत कौर और डॉ. अन्ना गोयल ने मशरूम की वैज्ञानिक खेती, उत्पादन तकनीकों और रोग प्रबंधन पर चर्चा की। वहीं खाद्य एवं पोषण विभाग की डॉ. सोनिका शर्मा ने मशरूम के पोषण मूल्य और स्वास्थ्य लाभों के बारे में जानकारी दी।
खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. अर्शदीप सिंह ने मशरूम प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मूल्य संवर्धन तकनीकों पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि मशरूम से तैयार किए गए उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग है और उचित प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग के माध्यम से किसान बेहतर लाभ कमा सकते हैं।
स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज के डॉ. राकेश राठौर ने प्रतिभागियों को मशरूम व्यवसाय की मार्केटिंग रणनीतियों और उद्यमिता विकास के बारे में मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसान उत्पादन के साथ-साथ विपणन पर भी ध्यान दें, तो वे अपने उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाकर अधिक मुनाफा अर्जित कर सकते हैं।
एंटोमोलॉजी विभाग की डॉ. अनुरित कौर चांदी तथा राज्य बागवानी विभाग की डॉ. जसप्रीत कौर गिल सिद्धू ने भी मशरूम उत्पादन और जैविक खेती के विभिन्न व्यावहारिक पहलुओं पर जानकारी साझा की। विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को खेती में कीट प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण और सुरक्षित उत्पादन तकनीकों के बारे में भी जागरूक किया।
जैविक खेती पर आयोजित प्रशिक्षण सत्र में डॉ. ए.एस. सिद्धू, डॉ. गुलाब पांडोव, डॉ. सुभाष सिंह, डॉ. नमिशा, डॉ. अजय कुमार चौधरी और डॉ. मनीषा ठाकुर ने जैविक खेती की अवधारणा, इसके लाभ और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि रसायनों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ऐसे में जैविक खेती टिकाऊ कृषि प्रणाली के रूप में तेजी से उभर रही है।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. कुलवीर कौर और श्रीमती कंवलजीत कौर ने प्रतिभागियों को मशरूम अचार बनाने की विधि का व्यावहारिक प्रदर्शन भी दिया। इस दौरान किसानों और ग्रामीण महिलाओं ने बड़ी रुचि के साथ विभिन्न मूल्य संवर्धित उत्पादों को तैयार करने की तकनीक सीखी।
विस्तार वैज्ञानिक डॉ. लवलीश गर्ग ने कौशल विकास केंद्र द्वारा आयोजित विभिन्न कौशल आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी और किसानों से इन कार्यक्रमों का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में श्रीमती कंवलजीत कौर ने सभी प्रतिभागियों एवं विश्वविद्यालय विशेषज्ञों का धन्यवाद किया। उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किसानों एवं महिलाओं को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और तकनीकों का उपयोग कर वे सफल उद्यमी बन सकते हैं तथा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं।

