नई दिल्ली: देश के कृषि क्षेत्र में बायोस्टिमुलेंट के नाम पर चल रही बड़ी गड़बड़ी अब खुलकर सामने आ गई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में चौंकाने वाला आंकड़ा पेश करते हुए बताया कि बाजार में मौजूद लगभग 8000 बायोस्टिमुलेंट उत्पादों में से केवल करीब 500 ही निर्धारित मानकों पर खरे उतरे हैं। बाकी उत्पाद या तो अप्रभावी हैं या उन्हें आधिकारिक अनुमति ही नहीं मिली है।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्षों से निजी कंपनियां “पौधों के टॉनिक” के नाम पर किसानों को गुमराह कर रही थीं। इन उत्पादों के इस्तेमाल से किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला, बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। यह समस्या अब कृषि क्षेत्र में एक गंभीर चुनौती बन चुकी है।
सरकार ने इस पर सख्त कदम उठाते हुए तय किया है कि अब केवल Indian Council of Agricultural Research (ICAR) से प्रमाणित बायोस्टिमुलेंट ही बाजार में बेचे जा सकेंगे। इसके अलावा, इन उत्पादों को उर्वरकों के साथ टैग करके बेचना भी अब अवैध माना जाएगा।
चौहान ने बताया कि नए नियमों के तहत कोई भी बायोस्टिमुलेंट तभी बाजार में आएगा जब उसे ICAR के संस्थानों और कृषि विश्वविद्यालयों में कम से कम तीन स्वतंत्र परीक्षणों में प्रभावी साबित किया जाएगा। इससे फर्जी और घटिया उत्पादों पर लगाम लगने की उम्मीद है।
सरकार जल्द ही नया Pesticide Act और Seed Act भी लाने जा रही है। इन कानूनों के जरिए किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, मानक खाद और सुरक्षित कीटनाशक उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत की जाएगी।
डिजिटल कृषि की दिशा में भी सरकार तेजी से काम कर रही है। मंत्री के अनुसार, Digital Agriculture Mission के तहत अब तक करीब 9 करोड़ Farmer ID तैयार की जा चुकी हैं। इस ID के जरिए किसान की जमीन, फसल और वित्तीय प्रोफाइल डिजिटल रूप में उपलब्ध होगी, जिससे बैंक से लोन मंजूरी की प्रक्रिया मिनटों में पूरी हो सकेगी। पहले जहां किसानों को कई बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे, अब यह प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी।
तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने ‘भारत विस्तार’ नाम का AI प्लेटफॉर्म भी तैयार किया है। इसके जरिए किसान अपनी फसल की तस्वीर भेजकर या कॉल के माध्यम से बीमारी, दवा और खेती से जुड़े सवालों के जवाब अपनी भाषा में तुरंत प्राप्त कर सकेगा। इसे किसानों के लिए एक डिजिटल सलाहकार के रूप में देखा जा रहा है।
प्राकृतिक खेती को लेकर भी सरकार गंभीर है। चौहान ने कहा कि अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 1 करोड़ किसानों को जागरूक करने और 75 लाख हेक्टेयर भूमि को इसके दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि वैज्ञानिक तरीके से की गई प्राकृतिक खेती में उत्पादन घटता नहीं, बल्कि कई मामलों में बढ़ भी सकता है और लागत में भारी कमी आती है। सरकार इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए “मिट्टी की अमानत” मानकर आगे बढ़ा रही है।

