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Home कृषि समाचार

पशुपालन एवं डेयरी विभाग का विशेष अभियान 6.0 सफलतापूर्वक संपन्न, 247 स्थानों पर हुई सफाई; स्क्रैप निपटान से मिला 25.93 लाख रुपये

Animal Husbandry and Dairying Department's Special Campaign 6.0 successfully concluded

Emran Khan by Emran Khan
November 4, 2026
in कृषि समाचार
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Animal Husbandry and Dairying Department's Special Campaign 6.0 successfully concluded, cleaning up 247 locations; scrap disposal yielded ₹25.93 lakh.

Animal Husbandry and Dairying Department's Special Campaign 6.0 successfully concluded, cleaning up 247 locations; scrap disposal yielded ₹25.93 lakh.

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केंद्र सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग (Department of Animal Husbandry and Dairying – DAHD) ने राष्ट्रव्यापी विशेष अभियान 6.0 (Special Campaign 6.0) को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक आयोजित इस अभियान के दौरान विभाग ने कार्यालयों में स्वच्छता को बढ़ावा देने, लंबित मामलों के निपटान, रिकॉर्ड प्रबंधन में सुधार और अनुपयोगी सामग्री के निस्तारण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया।

प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप चलाए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में Cleanliness को प्रशासनिक कार्यसंस्कृति का स्थायी हिस्सा बनाना और लंबित कार्यों को समयबद्ध तरीके से निपटाना था। अभियान के दौरान विभाग और उसके अधीनस्थ कार्यालयों ने स्वच्छता, बेहतर कार्यस्थल प्रबंधन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की।

सचिव नरेश पाल गंगवार ने की अभियान की समीक्षा

विशेष अभियान 6.0 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव श्री नरेश पाल गंगवार ने 29 सितंबर 2026 को अभियान के तैयारी चरण की समीक्षा की थी। इस दौरान उन्होंने विभाग के अधीन आने वाले सभी कार्यालयों को अभियान के उद्देश्यों और महत्व के बारे में जानकारी दी। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों से पूरी प्रतिबद्धता एवं उत्साह के साथ अभियान में भाग लेने का आग्रह किया।

अभियान की प्रगति पर निगरानी रखने के लिए 15 अक्टूबर 2026 को अपर सचिव, जो इस अभियान के नोडल अधिकारी भी हैं, ने विभाग के सभी उप-नोडल अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। इसमें निर्धारित लक्ष्यों को प्राथमिकता के आधार पर समयसीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए।

पूरे अभियान के दौरान नियमित समीक्षा बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों में विभिन्न कार्यालयों की Progress Report का मूल्यांकन किया गया और निर्धारित लक्ष्यों के मुकाबले हासिल की गई उपलब्धियों की समीक्षा हुई। इसके साथ ही कार्यान्वयन में आने वाली समस्याओं की पहचान कर उन्हें दूर करने के प्रयास किए गए।

247 स्थानों पर स्वच्छता अभियान, निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपलब्धि

विशेष अभियान 6.0 के दौरान DAHD ने स्वच्छता से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करने में बेहतर प्रदर्शन किया। विभाग ने कुल 226 स्थानों की सफाई का लक्ष्य निर्धारित किया था, जबकि अभियान के दौरान 247 स्थानों पर सफाई की गई। इस प्रकार विभाग ने निर्धारित लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की।

कार्यालयों में अनुपयोगी सामग्री और स्क्रैप (Scrap Material) के निपटान पर भी विशेष ध्यान दिया गया। इसके माध्यम से 25,93,896 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। इसके अलावा, स्क्रैप के निपटान और फाइलों की छंटाई से कुल 16,341 वर्ग फुट जगह खाली कराई गई।

यह उपलब्धि केवल कार्यालयों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी परिसरों में उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग, संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन और कार्यस्थलों की उपयोगिता बढ़ाने में भी मदद मिली।

16,707 भौतिक फाइलों की समीक्षा, 10,710 फाइलें हटाई गईं

अभियान के दौरान विभाग ने पुराने रिकॉर्ड और फाइलों की समीक्षा को भी प्राथमिकता दी। इसके तहत 16,541 भौतिक फाइलों की समीक्षा का लक्ष्य रखा गया था, जबकि कुल 16,707 भौतिक फाइलों की समीक्षा की गई। इनमें से 10,710 फाइलों को हटाया गया।

इसी तरह डिजिटल रिकॉर्ड प्रबंधन (Digital Record Management) को बेहतर बनाने के लिए ई-फाइलों की समीक्षा की गई। विभाग ने 2,163 ई-फाइलों की समीक्षा का लक्ष्य निर्धारित किया था, जबकि कुल 2,171 ई-फाइलों की समीक्षा की गई। इनमें से 1,327 ई-फाइलें बंद कर दी गईं।

पुरानी और अनावश्यक फाइलों की छंटाई से रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने, जरूरी दस्तावेजों तक पहुंच आसान बनाने और कार्यालयों में उपलब्ध स्थान का बेहतर उपयोग करने में सहायता मिलती है। इस तरह अभियान ने Physical Records के साथ-साथ Digital Files के प्रबंधन पर भी ध्यान केंद्रित किया।

जन शिकायतों और अपीलों के निपटान में लक्ष्य से अधिक प्रदर्शन

विशेष अभियान 6.0 के दौरान लंबित मामलों के निपटान (Pending Cases Disposal) पर भी विशेष जोर दिया गया। विभाग ने जन शिकायतों और उनसे संबंधित अपीलों के निपटान में अपने निर्धारित लक्ष्यों से अधिक उपलब्धि हासिल की।

अभियान के तहत 189 जन शिकायतों के निपटान का लक्ष्य था, जबकि 250 शिकायतों का निपटारा किया गया। इसी प्रकार जन शिकायतों से जुड़ी 10 अपीलों के निपटान के लक्ष्य के मुकाबले 16 अपीलों का निपटारा हुआ।

राज्य सरकारों से प्राप्त संदर्भों के मामले में विभाग ने निर्धारित चार में से चार संदर्भों का निपटान कर 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से प्राप्त संदर्भों में सात के लक्ष्य के मुकाबले छह मामलों का निपटान किया गया। संसदीय आश्वासनों के मामले में दो के लक्ष्य के मुकाबले एक का निपटान हुआ।

सांसदों से प्राप्त संदर्भों में 12 के लक्ष्य के मुकाबले नौ मामलों का निपटान किया गया। वहीं नियमों और प्रक्रियाओं में ढील से जुड़े तीन मामलों के लक्ष्य के मुकाबले दो मामलों पर कार्रवाई की गई।

विशेष अभियान 6.0 में DAHD की प्रमुख उपलब्धियां

प्रमुख पैरामीटर निर्धारित लक्ष्य उपलब्धि
PMO संदर्भ 7 6
संसदीय आश्वासन 2 1
राज्य सरकार के संदर्भ 4 4
जन शिकायतें 189 250
जन शिकायतों की अपील 10 16
सांसदों से प्राप्त संदर्भ 12 9
नियमों/प्रक्रियाओं में ढील 3 2
भौतिक फाइलों की समीक्षा 16,541 16,707
ई-फाइलों की समीक्षा 2,163 2,171
स्थानों की सफाई 226 247
स्क्रैप निपटान से राजस्व — ₹25,93,896
फाइलों की छंटाई और स्क्रैप निपटान से खाली जगह — 16,341 वर्ग फुट
सोशल मीडिया पोस्ट और ट्वीट — 246

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि विभाग ने स्वच्छता, शिकायत निवारण और फाइलों की समीक्षा जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निर्धारित लक्ष्यों को पार किया। हालांकि, PMO संदर्भ, संसदीय आश्वासन, सांसदों से प्राप्त संदर्भ और नियमों में ढील से संबंधित मामलों में लक्ष्य के मुकाबले कुछ कार्य शेष रहे।

अधीनस्थ कार्यालयों ने बढ़ावा दिया Waste to Wealth की अवधारणा को

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधीनस्थ कार्यालयों ने भी राष्ट्रव्यापी विशेष अभियान 6.0 में सक्रिय भागीदारी की। इन कार्यालयों ने स्वच्छता के साथ पर्यावरणीय स्थिरता (Environmental Sustainability) और बेकार सामग्री के रचनात्मक पुनः उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित कीं।

अभियान के दौरान Waste to Wealth यानी कचरे से संपदा की अवधारणा पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके तहत बेकार और अनुपयोगी सामग्री को नए तथा उपयोगी उत्पादों में बदलने के प्रयास किए गए। इसका उद्देश्य केवल कचरे का निपटान करना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का दोबारा उपयोग कर उनकी उपयोगिता बढ़ाना भी था।

इन गतिविधियों के माध्यम से कार्यालयों में Waste Management, Resource Conservation और Sustainable Practices के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया गया। विभाग के अधीनस्थ कार्यालयों ने स्वच्छता को बढ़ावा देने, कचरे का उत्पादन कम करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार कार्यसंस्कृति विकसित करने में योगदान दिया।

कृषि भवन में श्रमदान के साथ अभियान का समापन

विशेष अभियान 6.0 के अंतिम चरण में 31 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में श्रमदान (Voluntary Shramdaan) कार्यक्रम आयोजित किया गया। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव श्री नरेश पाल गंगवार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में अधिकारियों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इस दौरान अधिकारियों ने कार्यस्थल पर साफ-सफाई बनाए रखने और स्वच्छ वातावरण विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। कार्यक्रम के समापन अवसर पर सचिव द्वारा हाउसकीपिंग स्टाफ और अधिकारियों को स्वच्छता किट वितरित की गईं।

इस पहल के माध्यम से विभाग ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता बनाए रखना केवल किसी विशेष अभियान तक सीमित गतिविधि नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

सरकारी कार्यालयों में प्रशासनिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

विशेष अभियान 6.0 की उपलब्धियां बताती हैं कि स्वच्छता अभियान को प्रशासनिक दक्षता (Administrative Efficiency), जवाबदेही और बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन से जोड़कर प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं। पुराने रिकॉर्ड की छंटाई, डिजिटल फाइलों की समीक्षा, शिकायतों का निपटान और अनुपयोगी सामग्री का निस्तारण सरकारी कार्यालयों की कार्यक्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

DAHD द्वारा 247 स्थानों पर सफाई, 16,707 भौतिक फाइलों और 2,171 ई-फाइलों की समीक्षा तथा स्क्रैप निपटान से लगभग 25.94 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त करना अभियान की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।

इसके साथ ही Waste to Wealth की पहल और श्रमदान कार्यक्रम ने पर्यावरणीय जिम्मेदारी तथा सामूहिक भागीदारी का महत्व भी सामने रखा। विभाग का यह प्रयास सरकारी कार्यालयों में स्वच्छता, पारदर्शिता और समयबद्ध कार्य निष्पादन की संस्कृति को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

 

Tags: AgricultureFarmingICARIndian Farming
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पूर्वोत्तर भारत में डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में सिक्किम में कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने मंगलवार को गंगटोक में सिक्किम मिल्क यूनियन (SMU) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लेते हुए माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर पारंपरिक डेयरी उत्पाद ‘चुरपी’ के लिए ट्रेसेबिलिटी पहल और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) द्वारा विकसित ‘फॉडर प्लस’ उत्पादों की भी शुरुआत की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य सिक्किम में डेयरी Infrastructure को मजबूत करना, सहकारी नेटवर्क का विस्तार करना, दूध एवं दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और Dairy Value Addition को बढ़ावा देना था। इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने स्वदेशी सिरी मवेशियों के संरक्षण एवं विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्र (Centre of Excellence) स्थापित करने और मंगन स्थित डेयरी प्रसंस्करण संयंत्र के आधुनिकीकरण की भी घोषणा की। राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम के तहत माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री ने राष्ट्रीय दुग्ध विकास कार्यक्रम (National Programme for Dairy Development – NPDD) के अंतर्गत सिक्किम मिल्क यूनियन की माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। यह प्रयोगशाला डेयरी उत्पादों की गुणवत्ता जांच, माइक्रोबायोलॉजिकल टेस्टिंग और खाद्य सुरक्षा मानकों के मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इस सुविधा के माध्यम से दूध और दुग्ध उत्पादों में सूक्ष्मजीवों से संबंधित परीक्षणों को मजबूत किया जा सकेगा। इससे दूध की गुणवत्ता पर बेहतर निगरानी रखने, संभावित खाद्य सुरक्षा जोखिमों की पहचान करने और उपभोक्ताओं तक सुरक्षित डेयरी उत्पाद पहुंचाने में मदद मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान करफेक्टर स्थित माइक्रोबायोलॉजी प्रयोगशाला का भी वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया गया। केंद्रीय मंत्री ने डेयरी उत्पादों और सिक्किम मिल्क यूनियन की विभिन्न पहलों को प्रदर्शित करने वाले स्टॉलों का निरीक्षण किया और डेयरी क्षेत्र में हो रहे कार्यों की जानकारी ली। चुरपी ट्रेसेबिलिटी पहल से पारंपरिक उत्पाद को मिलेगी नई पहचान कार्यक्रम में सिक्किम के पारंपरिक डेयरी उत्पाद ‘चुरपी’ के लिए Churpi Traceability Initiative की शुरुआत की गई। चुरपी पारंपरिक रूप से दूध से तैयार किया जाने वाला उत्पाद है और स्थानीय खाद्य संस्कृति तथा आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ट्रेसेबिलिटी पहल का उद्देश्य उत्पाद की पहचान, उसकी गुणवत्ता और उत्पादन से बाजार तक की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। इससे चुरपी की उत्पत्ति और उत्पाद संबंधी जानकारी को बेहतर तरीके से दर्ज करने में सहायता मिल सकती है। साथ ही, पारंपरिक उत्पाद को बाजार में अलग पहचान दिलाने और उसकी पहुंच बढ़ाने की संभावनाएं मजबूत होंगी। आज के बाजार में उपभोक्ता खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता, स्रोत और उत्पादन प्रक्रिया को लेकर अधिक जागरूक हो रहे हैं। ऐसे में Traceability System पारंपरिक डेयरी उत्पादों के लिए भी भरोसा बनाने और बेहतर बाजार अवसर विकसित करने का माध्यम बन सकता है। FPOs के ‘फॉडर प्लस’ उत्पादों की शुरुआत केंद्रीय मंत्री ने किसान उत्पादक संगठनों (Farmer Producer Organisations – FPOs) द्वारा विकसित ‘फॉडर प्लस’ उत्पादों का भी शुभारंभ किया। इस पहल के माध्यम से पशुपालन क्षेत्र में चारे की उपलब्धता, किसानों के सामूहिक प्रयासों और आय के नए अवसरों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। पशुपालन 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सामूहिक रूप से डेयरी बाजार से जुड़ सकते हैं। इससे दूध की नियमित खरीद, गुणवत्ता जांच और किसानों को भुगतान की व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिलती है। एक दशक में सिक्किम का दूध उत्पादन 79 प्रतिशत बढ़ा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने सिक्किम सरकार, सिक्किम मिल्क यूनियन और डेयरी क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों को राज्य में हुई प्रगति के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि पिछले एक दशक में सिक्किम का दूध उत्पादन 79 प्रतिशत बढ़ा है। वर्ष 2014-15 के दौरान राज्य में दूध उत्पादन लगभग 1.37 लाख लीटर प्रतिदिन था, जो 2025-26 में बढ़कर 2.45 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया है। राज्य में डेयरी सहकारी समितियों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2014-15 में जहां 389 डेयरी सहकारी समितियां थीं, वहीं 2025-26 तक इनकी संख्या बढ़कर 733 हो गई। यह लगभग 88 प्रतिशत की वृद्धि है। इसके अलावा, उपभोक्ताओं को होने वाली दैनिक दूध आपूर्ति भी दोगुनी हो गई है। पहले जहां प्रतिदिन लगभग 28,000 लीटर दूध की आपूर्ति की जाती थी, वहीं अब यह बढ़कर 56,000 लीटर प्रतिदिन हो गई है। सिक्किम के डेयरी क्षेत्र की प्रमुख उपलब्धियां प्रमुख संकेतक पहले की स्थिति वर्तमान स्थिति दूध उत्पादन 1.37 लाख लीटर/दिन 2.45 लाख लीटर/दिन डेयरी सहकारी समितियां 389 733 उपभोक्ताओं को दूध आपूर्ति 28,000 लीटर/दिन 56,000 लीटर/दिन दूध उत्पादन में वृद्धि — 79% सहकारी समितियों में वृद्धि — 88% ये आंकड़े बताते हैं कि सिक्किम में पिछले एक दशक के दौरान डेयरी उत्पादन, दूध संग्रह और सहकारी संस्थाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। हालांकि, राज्य को दूध उत्पादन और खरीद के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए अभी और प्रयासों की आवश्यकता है। सिक्किम को डेयरी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने पर जोर केंद्रीय मंत्री ने डेयरी विकास की गति तेज करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (National Dairy Development Board – NDDB) से अपने प्रयास बढ़ाने और अतिरिक्त मानव संसाधन तैनात करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सिक्किम को दूध उत्पादन और दूध खरीद के मामले में आत्मनिर्भर बनाने के लिए मजबूत सहकारी व्यवस्था, बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण और प्रभावी दुग्ध संग्रह नेटवर्क आवश्यक हैं। मंत्री ने दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने, मिलावट रोकने और किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने में डेयरी सहकारी समितियों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, संगठित डेयरी व्यवस्था से किसानों को नियमित बाजार उपलब्ध कराने के साथ उपभोक्ताओं तक गुणवत्तापूर्ण दूध पहुंचाने में मदद मिलती है। वाराणसी का उदाहरण देकर बताया डेयरी सहकारी मॉडल का महत्व अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने वाराणसी का उदाहरण देते हुए बताया कि NDDB के हस्तक्षेप से वहां दूध संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में वाराणसी में दूध संग्रह लगभग 14,000 लीटर प्रतिदिन था, जो बढ़कर करीब 2.5 लाख लीटर प्रतिदिन हो गया। इस दौरान किसानों को मिलने वाला दूध का मूल्य भी 28-30 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर लगभग 42 रुपये प्रति लीटर हो गया। यह उदाहरण बताता है कि बेहतर Milk Procurement System, संगठित सहकारी नेटवर्क और प्रभावी प्रबंधन से किसानों को अधिक बाजार अवसर और बेहतर कीमत मिल सकती है। गोबर से बायोगैस उत्पादन के जरिए किसानों की अतिरिक्त आय केंद्रीय मंत्री ने ‘गोवर्धन’ पहल का उल्लेख करते हुए बताया कि पशुओं के गोबर का उपयोग बायोगैस संयंत्रों में करके किसानों के लिए अतिरिक्त आय के अवसर तैयार किए जा सकते हैं। पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था में गोबर को केवल अपशिष्ट के रूप में देखने के बजाय ऊर्जा और जैविक संसाधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। बायोगैस उत्पादन से स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ जैविक खाद जैसे उपयोगी उत्पाद भी प्राप्त किए जा सकते हैं। इस तरह डेयरी गतिविधियों को ऊर्जा उत्पादन, जैविक खेती और Waste to Wealth जैसी अवधारणाओं से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अधिक टिकाऊ बनाया जा सकता है। स्वदेशी सिरी मवेशियों के लिए स्थापित होगा उत्कृष्टता केंद्र कार्यक्रम में सबसे महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक स्वदेशी सिरी मवेशियों के संरक्षण और विकास के लिए Centre of Excellence की स्थापना रही। केंद्रीय मंत्री ने मंगन क्षेत्र के अपने दौरे का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां स्थानीय मवेशियों से औसतन लगभग तीन लीटर दूध प्रतिदिन प्राप्त होता है। उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार स्वदेशी सिरी मवेशियों के संरक्षण और विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने हेतु धनराशि आवंटित करेगी। प्रस्तावित केंद्र में इस नस्ल की आनुवंशिक क्षमता (Genetic Potential) और दूध उत्पादन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक प्रयास किए जाएंगे। इसके तहत IVF (In Vitro Fertilization) सहित आधुनिक प्रजनन तकनीकों को बढ़ावा देने की योजना है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय पशु नस्लों की विशेषताओं को संरक्षित रखते हुए उनकी उत्पादकता में सुधार करना है। पहाड़ी क्षेत्रों की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप विकसित स्थानीय नस्लें पशुपालन की दृष्टि से महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए उनके संरक्षण के साथ वैज्ञानिक नस्ल सुधार पर ध्यान देना जरूरी है। केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने को भी कहा, ताकि परियोजना को आगे बढ़ाया जा सके। मंगन डेयरी संयंत्र का होगा आधुनिकीकरण सिक्किम में डेयरी प्रसंस्करण क्षमता बढ़ाने के लिए मंगन स्थित डेयरी संयंत्र के व्यापक आधुनिकीकरण की भी घोषणा की गई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि NDDB मिजोरम में लागू किए गए सफल मॉडल का अनुसरण करते हुए मंगन जिले के मौजूदा डेयरी प्रसंस्करण संयंत्र के आधुनिकीकरण का वित्तपोषण करेगा और इस कार्य को स्वयं पूरा कराएगा। डेयरी संयंत्रों का आधुनिकीकरण दूध के प्रसंस्करण, भंडारण और वितरण क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करता है। इससे दूध की गुणवत्ता बनाए रखने, उत्पादों की विविधता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर Value Addition को प्रोत्साहन मिल सकता है। सिक्किम जैसे पहाड़ी राज्य में आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाएं विकसित होने से दूध को बाजार तक पहुंचाने की व्यवस्था मजबूत हो सकती है। साथ ही, स्थानीय डेयरी उत्पादों के उत्पादन और विपणन के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं। पूर्वोत्तर में डेयरी आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा प्रोत्साहन कार्यक्रम के समापन पर केंद्रीय मंत्री ने सिक्किम के डेयरी और कृषि विकास के प्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सिक्किम की आर्थिक प्रगति पूर्वोत्तर क्षेत्र को मजबूत बनाने और प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर’ के विजन को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। सिक्किम में दूध उत्पादन में 79 प्रतिशत की वृद्धि, सहकारी समितियों के नेटवर्क का विस्तार, गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला की शुरुआत और प्रसंस्करण संयंत्र के आधुनिकीकरण जैसी पहल राज्य के डेयरी क्षेत्र के विकास की नई संभावनाएं खोलती हैं। इसके साथ ही चुरपी ट्रेसेबिलिटी, FPO आधारित फॉडर उत्पाद और सिरी मवेशियों के लिए उत्कृष्टता केंद्र जैसी पहल स्थानीय संसाधनों को बेहतर बाजार और वैज्ञानिक पशुपालन से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। यदि इन योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो आने वाले वर्षों में सिक्किम के छोटे और सीमांत पशुपालकों को बेहतर बाजार, गुणवत्तापूर्ण पशु आहार, वैज्ञानिक प्रजनन सेवाएं और आधुनिक डेयरी सुविधाओं का लाभ मिल सकता है। इससे राज्य में ग्रामीण रोजगार, किसानों की आय और डेयरी आधारित उद्यमिता को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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