देश में जैविक एवं सतत कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही अग्रणी कृषि कंपनी एशिया डॉन बायोकेयर द्वारा 14 मई 2026 को अजमेर, राजस्थान स्थित एक रिसॉर्ट में भव्य “विक्रेता स्नेह मिलन एवं विक्रेता सम्मेलन” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की मुख्य थीम “मेक इन इंडिया” एवं “सस्टेनेबल फार्मिंग” रही, जिसमें राजस्थान सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए 125 से अधिक विक्रेताओं तथा कंपनी के 12 वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।
सम्मेलन का उद्देश्य विक्रेताओं के साथ संबंधों को मजबूत करना, जैविक कृषि के क्षेत्र में कंपनी द्वारा किए जा रहे नवाचारों की जानकारी साझा करना तथा किसानों तक गुणवत्तापूर्ण जैविक उत्पादों की पहुंच को और प्रभावी बनाना था। पूरे आयोजन के दौरान जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण और कृषि लागत कम करने जैसे विषय चर्चा के केंद्र में रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर कंपनी के रिसर्च एवं प्रोडक्शन हेड डॉ. एच.एल. चौधरी, नेशनल सेल्स हेड चारु दत्ता, वरिष्ठ एग्रोनॉमिस्ट संजय श्रीवास्तव सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। स्थानीय प्रबंधक नटवर शर्मा ने मुख्यालय से आए अतिथियों का पुष्पगुच्छ एवं शॉल भेंट कर स्वागत किया, जबकि कंपनी कर्मचारियों ने सभी विक्रेताओं का अंगवस्त्र पहनाकर आत्मीय अभिनंदन किया।
अपने संबोधन में नेशनल सेल्स हेड चारु दत्ता ने कहा कि एशिया डॉन बायोकेयर का लक्ष्य किसानों तक उच्च गुणवत्ता वाले जैविक एवं बायोलॉजिकल उत्पाद पहुंचाना है, जिससे खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके। उन्होंने कंपनी की भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आने वाले समय में जैविक कृषि उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ेगी और कंपनी इस क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए निरंतर अनुसंधान एवं नवाचार कर रही है।
कार्यक्रम में डॉ. एच.एल. चौधरी ने कंपनी की अत्याधुनिक उत्पादन तकनीकों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कंपनी लायोफिलाइजेशन (Lyophilization) तकनीक आधारित जैव उत्पाद तैयार करती है, जिससे उत्पादों की गुणवत्ता, शेल्फ लाइफ और फील्ड परफॉर्मेंस काफी बेहतर रहती है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक जैविक उत्पादों को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और किसानों को बेहतर परिणाम देने में सहायक है।
सम्मेलन के दौरान कई अनुभवी विक्रेताओं ने अपने अनुभव भी साझा किए। राजस्थान के सबसे पुराने एवं सबसे नए विक्रेताओं ने बताया कि कंपनी के उत्पादों ने किसानों के बीच तेजी से विश्वास बनाया है। एक विक्रेता ने कहा कि उन्होंने पहले अपने खेतों में कंपनी के जैविक उत्पादों का उपयोग किया और सकारात्मक परिणाम मिलने के बाद ही इसके व्यापार से जुड़े। इससे अन्य किसानों और विक्रेताओं का भी कंपनी पर विश्वास मजबूत हुआ।
वरिष्ठ एग्रोनॉमिस्ट संजय श्रीवास्तव ने फील्ड स्तर पर किसानों एवं विक्रेताओं को आने वाली समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में कृषि लागत लगातार बढ़ रही है और रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। ऐसे में जैविक एवं बायोलॉजिकल इनपुट खेती को टिकाऊ बनाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित खाद्यान्न उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने किसानों से अधिक से अधिक जैव उर्वरकों एवं जैव कीटनाशकों के उपयोग का आह्वान किया।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने, “मेक इन India” और “सस्टेनेबल फार्मिंग” को बढ़ावा देने के संदेश की भी व्यापक चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में जैविक कृषि की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और आने वाला समय बायोलॉजिकल एवं जैविक कृषि उत्पादों का ही है।
सम्मेलन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विक्रेताओं को विशेष सम्मान भी प्रदान किया गया। सर्वाधिक बायोलॉजिकल इनपुट विक्रय करने वाले विक्रेता को सम्मानित कर कंपनी ने अन्य विक्रेताओं को भी प्रेरित किया।
इस अवसर पर कंपनी के एम.डी. एवं सीईओ भद्र भंसाली ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कंपनी किसानों एवं विक्रेताओं के साथ मिलकर सतत कृषि और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण उत्पाद समय पर उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिलाया।
पूरे आयोजन में स्थानीय प्रबंधक नटवर शर्मा ने मुख्य आयोजक की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी अतिथियों एवं विक्रेताओं का आभार व्यक्त करते हुए आश्वासन दिया कि कंपनी के सभी उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता समय पर सुनिश्चित की जाएगी।
सम्मेलन का समापन
“स्वच्छ अनाज – स्वस्थ समाज – सुरक्षित पर्यावरण,
मेक इन इंडिया – सस्टेनेबल फार्मिंग – खुशहाल किसान”
के उद्घोष के साथ हुआ।
कार्यक्रम में उपस्थित विक्रेताओं के बीच यह संदेश प्रमुखता से उभरकर सामने आया कि भारतीय कृषि का भविष्य जैविक एवं बायोलॉजिकल समाधानों में निहित है। किसानों तक अधिकतम जैविक समाधान पहुंचाकर ही खेती को लाभकारी, सुरक्षित एवं पर्यावरण अनुकूल बनाया जा सकता है।

