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ATMA Yojana: किसानों को मिलेगी नई खेती की ट्रेनिंग, तकनीक और बाजार की जानकारी, जानें कैसे उठाएं लाभ

ATMA Scheme: Farmers to receive training in modern farming, technology, and market information; find out how to avail the benefits.

Fiza by Fiza
June 12, 2026
in योजना
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ATMA Yojana

ATMA Yojana

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ATMA Yojana: भारत में खेती तेजी से बदल रही है। पहले किसान अपनी पारंपरिक जानकारी और अनुभव के आधार पर खेती करते थे, लेकिन अब मौसम में बदलाव, मिट्टी की घटती उर्वरता, बढ़ती लागत, नई बीमारियां, बाजार की अनिश्चितता और तकनीकी बदलावों ने खेती को पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में किसानों को केवल बीज, खाद और सिंचाई की जानकारी ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, जल प्रबंधन, बाजार व्यवस्था और मूल्य संवर्धन की जानकारी भी जरूरी हो गई है।

इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए कृषि तकनीकी प्रबंधन एजेंसी यानी ATMA योजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में काम कर रही है। ATMA का पूरा नाम Agricultural Technology Management Agency है। हिंदी में इसे कृषि तकनीकी प्रबंधन एजेंसी कहा जाता है। यह योजना किसानों को नई कृषि तकनीकों से जोड़ने, उन्हें प्रशिक्षण देने, खेत स्तर पर प्रदर्शन कराने, किसान मेलों में जानकारी उपलब्ध कराने और कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्रों, वैज्ञानिकों तथा किसानों के बीच मजबूत संबंध बनाने का काम करती है।

ATMA योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों तक सही समय पर सही जानकारी पहुंचाना है, ताकि वे अपनी खेती को अधिक लाभदायक, टिकाऊ और बाजार आधारित बना सकें। यह योजना किसानों को बताती है कि कौन सी फसल लगानी चाहिए, मिट्टी और मौसम के अनुसार खेती कैसे करनी चाहिए, लागत कैसे घटाई जा सकती है, उत्पादन कैसे बढ़ाया जा सकता है और फसल को बेहतर दाम पर कैसे बेचा जा सकता है।

ATMA योजना क्या है?

ATMA योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण कृषि विस्तार योजना है। इसे “Support to State Extension Programmes for Extension Reforms” के नाम से भी जाना जाता है। इस योजना के तहत जिला स्तर पर एक संस्था बनाई जाती है, जिसे ATMA कहा जाता है। यह संस्था जिले में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों जैसे बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन, डेयरी, रेशम, जैविक खेती और प्राकृतिक खेती से जुड़ी गतिविधियों को किसानों तक पहुंचाती है।

इस योजना की खास बात यह है कि यह ऊपर से नीचे तक आदेश देने वाली व्यवस्था नहीं है, बल्कि किसानों की जरूरतों के हिसाब से काम करने वाली योजना है। यानी किसी जिले में अगर किसानों को मोटे अनाज की खेती, ड्रिप सिंचाई, जैविक खाद, धान की सीधी बुवाई, गेहूं की नई किस्म, सब्जी उत्पादन, मशरूम फार्मिंग या पशुपालन की जानकारी चाहिए, तो ATMA उसी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण और कार्यक्रम आयोजित कर सकती है।

योजना का उद्देश्य

ATMA योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य कृषि विस्तार व्यवस्था को किसान केंद्रित बनाना है। इस योजना के जरिए किसानों को नई तकनीक, आधुनिक खेती के तरीके और बाजार से जुड़ी जानकारी दी जाती है।

इस योजना के प्रमुख उद्देश्य हैं:

किसानों को नई कृषि तकनीकों की जानकारी देना।
फसल उत्पादन के साथ-साथ फसल कटाई के बाद प्रबंधन और मार्केटिंग की जानकारी देना।
कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभाग और किसानों के बीच संपर्क मजबूत करना।
किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और जलवायु अनुकूल खेती के लिए तैयार करना।
किसानों को प्रदर्शन प्लॉट के माध्यम से नई तकनीक दिखाना।
किसान समूहों, महिला किसानों और युवा किसानों को प्रशिक्षण देना।
ग्रामीण युवाओं को कृषि आधारित कौशल से जोड़ना।
किसानों को बाजार, मूल्य संवर्धन और प्रसंस्करण की दिशा में जागरूक करना।

किसानों के लिए ATMA कैसे काम करती है?

ATMA योजना किसानों के लिए जमीन पर कई तरीकों से काम करती है। यह केवल कागजी योजना नहीं है, बल्कि इसके तहत गांव, ब्लॉक और जिला स्तर पर कृषि कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

1. किसान प्रशिक्षण

ATMA योजना के तहत किसानों को खेती की नई तकनीकों पर प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें फसल उत्पादन, कीट प्रबंधन, बीज उपचार, मिट्टी जांच, जैविक खाद, प्राकृतिक खेती, ड्रिप सिंचाई, उन्नत बीज, पशुपालन, बागवानी और कृषि मशीनरी जैसे विषय शामिल होते हैं।

इन प्रशिक्षणों में कृषि विभाग के अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक और विषय विशेषज्ञ किसानों को आसान भाषा में जानकारी देते हैं। किसान अपनी समस्या भी सीधे विशेषज्ञों से पूछ सकते हैं।

2. खेतों पर प्रदर्शन

किसानों को नई तकनीक केवल बताई नहीं जाती, बल्कि खेत पर दिखाकर समझाई जाती है। इसे डिमॉन्स्ट्रेशन या प्रदर्शन कहा जाता है। उदाहरण के लिए किसी गांव में नई धान की किस्म, गेहूं की उन्नत तकनीक, ड्रिप सिंचाई, जैविक खाद या कम लागत वाली खेती का प्रदर्शन कराया जा सकता है।

इससे किसानों को भरोसा होता है कि नई तकनीक उनके क्षेत्र में काम कर सकती है या नहीं। जब किसान अपने गांव में ही परिणाम देखते हैं, तो वे उसे अपनाने के लिए अधिक तैयार होते हैं।

3. किसान मेला और गोष्ठी

ATMA योजना के तहत किसान मेले, किसान गोष्ठी और कृषि प्रदर्शनियां आयोजित की जाती हैं। इन कार्यक्रमों में किसानों को नई किस्मों, कृषि यंत्रों, सरकारी योजनाओं, बीज, उर्वरक, जैविक उत्पाद और बाजार से जुड़ी जानकारी मिलती है।

किसान मेले किसानों के लिए बहुत उपयोगी होते हैं, क्योंकि यहां उन्हें एक ही स्थान पर कृषि विशेषज्ञ, सरकारी विभाग, कृषि कंपनियां, किसान उत्पादक संगठन और सफल किसान मिल जाते हैं।

4. एक्सपोजर विजिट

ATMA योजना के तहत किसानों को दूसरे जिलों या राज्यों में सफल खेती मॉडल देखने के लिए भेजा जा सकता है। इसे एक्सपोजर विजिट कहा जाता है। इस दौरान किसान यह देखते हैं कि दूसरे किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कैसे ले रहे हैं, कौन सी तकनीक अपना रहे हैं और बाजार से कैसे जुड़ रहे हैं।  ऐसी यात्राओं से किसानों में आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपने खेत में नए प्रयोग करने के लिए प्रेरित होते हैं।

5. फार्म स्कूल

ATMA योजना में फार्म स्कूल की व्यवस्था भी होती है। फार्म स्कूल का मतलब है कि किसी प्रगतिशील किसान के खेत को सीखने का केंद्र बनाया जाता है। आसपास के किसान वहां जाकर पूरी फसल अवधि के दौरान खेती की प्रक्रिया सीखते हैं।इसमें बुवाई से लेकर कटाई तक हर चरण पर जानकारी दी जाती है। किसान कीट, रोग, खाद, सिंचाई और कटाई से जुड़ी वास्तविक समस्याओं को खेत में ही समझते हैं।

6. किसान समूहों को बढ़ावा

ATMA योजना किसानों को समूह के रूप में काम करने के लिए प्रेरित करती है। किसान समूह बनाकर प्रशिक्षण, तकनीक, उपकरण, बाजार और सरकारी योजनाओं का बेहतर लाभ उठा सकते हैं। महिला किसान समूहों और युवा किसानों को भी योजना से जोड़ने पर जोर दिया जाता है।

7. बाजार और मूल्य संवर्धन की जानकारी

पहले कृषि विस्तार का फोकस अधिकतर उत्पादन बढ़ाने पर था, लेकिन अब ATMA योजना में बाजार को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। किसानों को बताया जाता है कि फसल बेचने से पहले उसकी ग्रेडिंग, पैकिंग, स्टोरेज, प्रसंस्करण और बाजार संपर्क कैसे बेहतर किया जा सकता है।

अगर किसान केवल उत्पादन करेगा लेकिन सही बाजार तक नहीं पहुंचेगा, तो लाभ सीमित रहेगा। इसलिए ATMA योजना किसानों को उत्पादन से बाजार तक की पूरी श्रृंखला से जोड़ने का प्रयास करती है।

किन किसानों को लाभ मिल सकता है?

ATMA योजना का लाभ छोटे, सीमांत, मध्यम और बड़े सभी किसान ले सकते हैं। इसमें विशेष ध्यान छोटे और सीमांत किसानों, महिला किसानों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, युवा किसानों और किसान समूहों पर दिया जाता है।

इस योजना से वे किसान लाभ उठा सकते हैं जो नई तकनीक सीखना चाहते हैं, खेती की लागत कम करना चाहते हैं, उत्पादन बढ़ाना चाहते हैं, प्राकृतिक या जैविक खेती अपनाना चाहते हैं, पशुपालन या बागवानी से आय बढ़ाना चाहते हैं या बाजार से बेहतर तरीके से जुड़ना चाहते हैं।

ATMA योजना किन राज्यों में चल रही है?

ATMA योजना देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू है। यह योजना कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सहयोग से राज्यों के कृषि विभागों के माध्यम से चलाई जाती है। पहले उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार यह योजना 28 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों के सैकड़ों जिलों में लागू रही है।

इसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, असम, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, केरल, गोवा और पूर्वोत्तर राज्यों जैसे कई प्रदेश शामिल हैं। केंद्र शासित प्रदेशों में भी कृषि विभाग के माध्यम से ATMA गतिविधियां चलाई जाती हैं।

हालांकि किसी जिले में कौन सी गतिविधि कब चलेगी, यह राज्य और जिला कृषि विभाग की वार्षिक योजना पर निर्भर करता है। इसलिए किसानों को अपने जिले के कृषि विभाग, ब्लॉक कृषि कार्यालय, ATMA कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से ताजा जानकारी जरूर लेनी चाहिए।

किसान इस योजना के लिए कैसे अप्लाई करें?

ATMA योजना में आवेदन की प्रक्रिया राज्य और जिले के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। कई जगह किसान सीधे ऑनलाइन आवेदन नहीं करते, बल्कि कृषि विभाग, ब्लॉक कृषि कार्यालय या ATMA कार्यालय के माध्यम से प्रशिक्षण, प्रदर्शन, किसान मेला या एक्सपोजर विजिट में शामिल किए जाते हैं।

आवेदन या पंजीकरण की सामान्य प्रक्रिया

किसान सबसे पहले अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय, ब्लॉक कृषि अधिकारी, ग्राम कृषि सहायक, ATMA कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें। किसान को अपनी खेती, फसल, गांव और जरूरत से जुड़ी जानकारी देनी होती है। अगर जिले में कोई प्रशिक्षण, प्रदर्शन, किसान मेला या फार्म स्कूल कार्यक्रम चल रहा है, तो किसान का नाम उसमें शामिल किया जा सकता है।

कुछ राज्यों में किसान राज्य कृषि पोर्टल, किसान पंजीकरण पोर्टल या कृषि विभाग की वेबसाइट के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। कई राज्यों में किसान को मोबाइल नंबर, आधार नंबर, बैंक विवरण, भूमि संबंधी जानकारी और फसल विवरण देना पड़ सकता है।

जरूरी दस्तावेज

  1. आधार कार्ड
  2. मोबाइल नंबर
  3. बैंक पासबुक
  4. भूमि रिकॉर्ड या खेती से संबंधित जानकारी
  5. पासपोर्ट साइज फोटो
  6. किसान पंजीकरण संख्या, अगर राज्य में लागू हो
  7. समूह या FPO से जुड़े होने पर संबंधित दस्तावेज

यह दस्तावेज हर गतिविधि के लिए जरूरी हों, ऐसा नहीं है। लेकिन किसान के पास ये दस्तावेज तैयार रहें तो पंजीकरण और योजना से जुड़ने में आसानी होती है।

योजना से किसानों को क्या लाभ मिलता है?

ATMA योजना का लाभ केवल एक सब्सिडी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह योजना किसानों को ज्ञान, तकनीक और नेटवर्क देती है। कई बार किसानों को नई जानकारी ही सबसे बड़ा लाभ देती है, क्योंकि सही तकनीक अपनाने से लागत घटती है और उत्पादन बढ़ता है।

प्रमुख लाभ

  • किसानों को नई कृषि तकनीक की जानकारी मिलती है।
  • वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा मिलता है।
  • कीट और रोग प्रबंधन में मदद मिलती है।
  • मिट्टी स्वास्थ्य और पोषक तत्व प्रबंधन की जानकारी मिलती है।
  • प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है।
  • जलवायु अनुकूल खेती के तरीके बताए जाते हैं।
  • किसानों को बाजार और पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट की जानकारी मिलती है।
  • महिला और युवा किसानों को कौशल विकास का अवसर मिलता है।
  • किसान समूहों और FPO को मजबूत करने में मदद मिलती है।
  • किसानों को कृषि विभाग और वैज्ञानिकों से सीधा संपर्क मिलता है।

ATMA और आधुनिक खेती

आज खेती केवल खेत तक सीमित नहीं है। किसान को मौसम की जानकारी, बाजार भाव, मिट्टी जांच, बीज चयन, सिंचाई प्रबंधन, कीट नियंत्रण, कृषि मशीनरी, डिजिटल कृषि और मार्केटिंग जैसे कई क्षेत्रों में जानकारी चाहिए। ATMA योजना इन्हीं जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।

योजना के नए फोकस में प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, डिजिटल कृषि, राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली, मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड और कृषि मूल्य श्रृंखला जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। इसका मतलब है कि ATMA अब केवल उत्पादन बढ़ाने की योजना नहीं है, बल्कि किसान की आय, बाजार पहुंच और टिकाऊ खेती पर भी ध्यान दे रही है।

छोटे किसानों के लिए क्यों जरूरी है ATMA?

भारत में बड़ी संख्या में किसान छोटे और सीमांत हैं। इनके पास सीमित जमीन, कम पूंजी और बाजार तक कम पहुंच होती है। ऐसे किसानों के लिए सही सलाह और सही समय पर जानकारी बहुत महत्वपूर्ण होती है।

अगर छोटा किसान गलत बीज खरीद ले, गलत समय पर दवा छिड़क दे या बाजार में बिना जानकारी के फसल बेच दे, तो उसे नुकसान हो सकता है। ATMA योजना ऐसे किसानों को सही मार्गदर्शन देती है। किसान प्रशिक्षण, प्रदर्शन और किसान गोष्ठी के माध्यम से सीखते हैं कि कम जमीन में भी बेहतर उत्पादन और आय कैसे ली जा सकती है।

महिला किसानों और युवाओं की भूमिका

ATMA योजना में महिला किसानों और ग्रामीण युवाओं को भी जोड़ने पर जोर दिया जाता है। महिला किसान खेती, पशुपालन, मशरूम उत्पादन, सब्जी उत्पादन, बागवानी, खाद निर्माण और मूल्य संवर्धन में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं। ग्रामीण युवा कृषि आधारित उद्यमों जैसे नर्सरी, ड्रोन सेवा, कृषि मशीनरी सेवा, जैविक इनपुट, डेयरी, मत्स्य पालन और प्रोसेसिंग से जुड़ सकते हैं।

अगर युवाओं को सही प्रशिक्षण मिले, तो वे गांव में रहकर ही कृषि से जुड़ा रोजगार खड़ा कर सकते हैं। ATMA योजना ऐसे कौशल विकास कार्यक्रमों में मददगार हो सकती है।

किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

किसानों को योजना का लाभ लेने के लिए अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारियों से नियमित संपर्क रखना चाहिए। कई बार प्रशिक्षण या किसान मेला की जानकारी गांव तक देर से पहुंचती है। किसान अगर सक्रिय रहेंगे, तो उन्हें योजना का लाभ जल्दी मिल सकता है।

किसान अपने गांव में किसान समूह बनाएं। समूह के रूप में प्रशिक्षण और प्रदर्शन मिलने की संभावना बढ़ जाती है। किसान अपने मोबाइल नंबर को कृषि विभाग में अपडेट रखें, ताकि उन्हें योजना, प्रशिक्षण और कार्यक्रमों की जानकारी मिलती रहे।

किसानों को केवल सुनने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जो तकनीक उनके खेत और मौसम के हिसाब से सही हो, उसे छोटे स्तर पर आजमाना चाहिए। सफल होने पर उसे बड़े क्षेत्र में अपनाया जा सकता है।

निष्कर्ष

कृषि तकनीकी प्रबंधन एजेंसी यानी ATMA योजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कृषि विस्तार योजना है। यह योजना किसानों को नई तकनीक, प्रशिक्षण, प्रदर्शन, किसान मेला, फार्म स्कूल और बाजार से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराती है। बदलते मौसम, बढ़ती लागत और बाजार की चुनौतियों के बीच ATMA किसानों को वैज्ञानिक और आधुनिक खेती की दिशा में आगे बढ़ाने का काम कर रही है।

इस योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि किसान अपने जिले में ही कृषि विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। वे नई तकनीक को खेत पर देखकर समझ सकते हैं और अपने क्षेत्र की जरूरत के अनुसार खेती में बदलाव कर सकते हैं। अगर किसान ATMA योजना से सक्रिय रूप से जुड़ते हैं, तो वे खेती की लागत घटाने, उत्पादन बढ़ाने और अपनी आय में सुधार करने की दिशा में बेहतर कदम उठा सकते हैं।

किसानों को चाहिए कि वे अपने नजदीकी कृषि विभाग, ब्लॉक कृषि कार्यालय, ATMA कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें और जिले में चल रही ATMA गतिविधियों की जानकारी लेकर योजना का लाभ उठाएं।

FAQ

ATMA योजना क्या है?

ATMA योजना एक कृषि विस्तार योजना है, जिसके तहत किसानों को नई कृषि तकनीक, प्रशिक्षण, प्रदर्शन, किसान मेला, फार्म स्कूल और बाजार से जुड़ी जानकारी दी जाती है।

ATMA का पूरा नाम क्या है?

ATMA का पूरा नाम Agricultural Technology Management Agency है। हिंदी में इसे कृषि तकनीकी प्रबंधन एजेंसी कहा जाता है।

क्या ATMA योजना किसानों को सीधे पैसा देती है?

यह योजना मुख्य रूप से प्रशिक्षण, तकनीकी जानकारी, प्रदर्शन और कृषि विस्तार गतिविधियों पर आधारित है। कुछ गतिविधियों में राज्य और जिला योजना के अनुसार सहायता मिल सकती है, लेकिन यह सीधे नकद लाभ वाली योजना नहीं है।

किसान ATMA योजना का लाभ कैसे लें?

किसान अपने ब्लॉक कृषि अधिकारी, जिला कृषि विभाग, ATMA कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करके प्रशिक्षण, प्रदर्शन, किसान मेला या अन्य गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं।

क्या छोटे किसान भी इस योजना का लाभ ले सकते हैं?

हां, छोटे और सीमांत किसान इस योजना के मुख्य लाभार्थियों में शामिल हैं। महिला किसान, युवा किसान और किसान समूह भी इसका लाभ ले सकते हैं।

ATMA योजना किन राज्यों में चल रही है?

यह योजना देश के कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कृषि विभाग के माध्यम से लागू है। किसान अपने जिले के कृषि विभाग से स्थानीय जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

क्या ATMA योजना प्राकृतिक खेती में मदद करती है?

हां, योजना में प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण और मिट्टी स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी किसानों को जानकारी दी जाती है।

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