राजस्थान समेत उत्तर भारत की प्रमुख मंडियों में नई जौ फसल की आवक के साथ इस बार बाजार ने किसानों को निराश किया है। मार्च महीने की बारिश और खेतों में बढ़ी नमी के कारण जौ की गुणवत्ता प्रभावित हुई, जिससे भावों में अचानक बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। कई मंडियों में जौ के थोक दाम 500 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे आ गए, जिसके चलते किसानों की आय पर सीधा असर पड़ रहा है।
गुणवत्ता में कमी से खरीददारों ने दूरी बनाई
इस बार एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश ने जौ की कटाई और भंडारण दोनों को प्रभावित किया है। किसानों के अनुसार, कटाई के तुरंत बाद बाजार पहुंची नई फसल में नमी के स्तर अधिक पाया गया, जिसके कारण माल्ट और ब्रेवरिज कंपनियों ने खरीद में कटौती कर दी है। परिणामस्वरूप सीकर मंडी में जौ के दाम, जो पहले 2150–2500 रुपये प्रति क्विंटल थे, अब गिरकर 1900 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास पहुंच चुके हैं।
कारोबारियों का कहना है कि मंडी में जौ की रोजाना आवक पहले जहां 1500 कट्टों तक थी, वह अब घटकर लगभग 1000 कट्टे रह गई है। व्यापारियों के खरीद बंद करने के बाद कई खरीदार अब सीधे खेतों से ही जौ खरीद रहे हैं, ताकि बेहतर गुणवत्ता का दाना मिल सके।
ज्यादा नमी से फसल खराब होने का खतरा
स्थानीय थोक व्यापारियों के मुताबिक, अधिक नमी की वजह से जौ के दानों के काले पड़ने और फफूंद लगने की आशंका बढ़ जाती है। यह समस्या न केवल गुणवत्ता गिराती है, बल्कि बाजार मूल्य पर भी गहरा प्रभाव डालती है। यही कारण है कि कई किसान फिलहाल अपनी उपज रोककर बैठे हैं और सही समय का इंतजार कर रहे हैं।
उत्पादन बढ़ा, लेकिन कीमतों में गिरावट ने बढ़ाई चिंता
कृषि विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, जिले में इस बार लगभग 40 हजार हेक्टेयर में जौ की बुवाई की गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में करीब 3000 हेक्टेयर अधिक है। उत्पादन भी बढ़कर 1.30 लाख टन तक पहुंचने का अनुमान है। लेकिन बढ़ी पैदावार के बावजूद वर्तमान मूल्य गिरावट ने किसानों की कमाई कम कर दी है।
अप्रैल से सुधार की संभावना
कारोबारियों का अनुमान है कि अप्रैल के पहले सप्ताह से जौ के भाव में सुधार देखने को मिल सकता है। हर वर्ष की तरह इस बार भी ब्रेवरिज और माल्ट कंपनियों द्वारा ओपन मार्केट में खरीद की संभावना है, लेकिन फिलहाल कंपनियों ने अपनी खरीद धीमी कर दी है। यदि मौसम साफ रहा और नमी कम हुई, तो बाजार धीरे-धीरे संभल सकता है।
किसानों में चिंता, बाजार में अनिश्चितता
जौ किसानों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि आने वाले दिनों में भाव स्थिर नहीं हुए, तो उनकी लागत निकलना मुश्किल हो जाएगा। वहीं व्यापारी यह मानते हैं कि बाजार फिलहाल बारिश और गुणवत्ता दोनों से प्रभावित है, और स्थिरता तभी लौटेगी जब माल्टिंग क्वालिटी जौ की आवक बढ़ेगी।

