गांवों में रहने वाले ज्यादातर लोग खेती पर निर्भर होते हैं और उनके लिए जमीन ही सबसे बड़ी संपत्ति होती है. इसी जमीन से उनकी रोजी-रोटी चलती है और परिवार का पालन-पोषण होता है. लेकिन कई बार किसानों की इस कीमती जमीन पर बिजली की हाईटेंशन लाइनें गुजर जाती हैं या खेत के बीच में बड़े-बड़े टावर खड़े कर दिए जाते हैं. इससे किसानों को खेती करने में दिक्कत होती है और उनकी जमीन का पूरा उपयोग नहीं हो पाता. लंबे समय से किसान इस समस्या को लेकर आवाज उठा रहे थे. अब इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है, जिससे किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है.
सरकार के नए फैसले के तहत अब जिन किसानों के खेत में बिजली का टावर लगाया जाएगा, उन्हें उस जमीन की कीमत का 200 प्रतिशत यानी दोगुना मुआवजा दिया जाएगा. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी जमीन की कीमत 1 लाख रुपये है, तो किसान को 2 लाख रुपये मिलेंगे. यह फैसला किसानों के लिए एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है.
इतना ही नहीं, जिन खेतों के ऊपर से केवल बिजली की तारें गुजरती हैं, वहां भी किसानों को अब मुआवजा मिलेगा. ऐसे मामलों में जमीन की कीमत का 30 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा. पहले इन किसानों को किसी तरह का मुआवजा नहीं मिलता था, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था. नए नियम से यह स्थिति अब बदल जाएगी.
अगर पहले की व्यवस्था पर नजर डालें, तो 2018 से पहले किसानों को इस तरह की जमीन के लिए लगभग कोई मुआवजा नहीं दिया जाता था. इसके बाद 2018 में कुछ सुधार किए गए और टावर के नीचे आने वाली जमीन के लिए करीब 85 प्रतिशत तक मुआवजा तय किया गया. हालांकि, तब भी बिजली की लाइनों के नीचे आने वाली जमीन के लिए कोई भुगतान नहीं होता था. इस कारण किसान अपनी जमीन का पूरा उपयोग नहीं कर पाते थे और उन्हें नुकसान झेलना पड़ता था.
नई नीति में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब मुआवजा सीधे जिलाधिकारी द्वारा तय किए गए सर्किल रेट के आधार पर दिया जाएगा. इससे किसानों को उनकी जमीन की वास्तविक कीमत के हिसाब से भुगतान मिलेगा और किसी तरह की अनिश्चितता नहीं रहेगी.
इस फैसले का सीधा फायदा किसानों की आय पर पड़ेगा. उन्हें अब अपनी जमीन के बदले उचित और पहले से ज्यादा पैसा मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी. साथ ही, यह निर्णय किसानों में संतोष और भरोसा भी बढ़ाएगा कि सरकार उनकी समस्याओं को समझ रही है और समाधान के लिए कदम उठा रही है.
कुल मिलाकर, यह फैसला किसानों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है. इससे न केवल उनकी आय में बढ़ोतरी होगी, बल्कि उनकी जमीन की सही कीमत भी सुनिश्चित होगी. आने वाले समय में यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देने में अहम भूमिका निभा सकता है.

