आंध्र प्रदेश के लाखों तोतापुरी आम उत्पादक किसानों के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए राहत का रास्ता खोल दिया है। लंबे समय से तोतापुरी आम की कीमतों में लगातार गिरावट से जूझ रहे किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के माध्यम से एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति के गठन के निर्देश दिए हैं। यह समिति न केवल मौजूदा मूल्य संकट के कारणों का वैज्ञानिक और आर्थिक विश्लेषण करेगी, बल्कि उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात तक पूरी वैल्यू चेन का अध्ययन कर किसानों के हित में ठोस और व्यावहारिक सुझाव भी प्रस्तुत करेगी।
यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब आंध्र प्रदेश के कई जिलों में तोतापुरी आम की कीमतें उत्पादन लागत से भी नीचे पहुंच गई हैं। इससे हजारों किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उनके सामने अपनी लागत निकालना भी चुनौती बन गया है। केंद्र सरकार का मानना है कि यदि समय रहते वैज्ञानिक और बाजार आधारित समाधान तैयार किए जाएं, तो किसानों को स्थायी राहत देने के साथ-साथ इस क्षेत्र को नई विकास दिशा भी दी जा सकती है।
किसानों से सीधे संवाद के बाद लिया गया निर्णय
हाल ही में आंध्र प्रदेश के दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने तोतापुरी आम उत्पादक किसानों के साथ विस्तृत बातचीत की। इस दौरान किसानों ने बताया कि प्रसंस्करण उद्योगों में मांग कम होने, बाजार में असंतुलन और अन्य व्यावसायिक कारणों से आम की कीमतों में तेज गिरावट आई है। किसानों ने यह भी कहा कि मेहनत और बढ़ती लागत के बावजूद उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है।
किसानों की समस्याओं को सुनने के बाद केंद्रीय मंत्री ने तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस पूरे मामले का गहराई से अध्ययन कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों की आय की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसके लिए आवश्यक हर कदम उठाया जाएगा।
आईसीएआर की विशेषज्ञ समिति करेगी व्यापक अध्ययन
केंद्रीय मंत्री के निर्देशों के बाद आईसीएआर के अंतर्गत केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (सीआईएसएच), लखनऊ ने विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। इस समिति का नेतृत्व संस्थान के निदेशक डॉ. टी. दमोदरन करेंगे।
समिति में बागवानी, अनुसंधान, वैज्ञानिक प्रबंधन और राज्य स्तर के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इनमें आईसीएआर-आईआईएचआर, बेंगलुरु के फल फसल विशेषज्ञ, सीआईएसएच के वरिष्ठ वैज्ञानिक, वाईएसआर हॉर्टिकल्चर विश्वविद्यालय, आंध्र प्रदेश के विशेषज्ञ तथा राज्य उद्यानिकी विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं। इन विशेषज्ञों का उद्देश्य तोतापुरी आम से जुड़े प्रत्येक पहलू का अध्ययन कर सरकार को व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराना है।
10 दिनों में होगा जमीनी सर्वे
विशेषज्ञ समिति को निर्देश दिया गया है कि वह अगले 10 दिनों के भीतर आंध्र प्रदेश के प्रमुख तोतापुरी आम उत्पादक क्षेत्रों का दौरा करे। इस दौरान समिति केवल सरकारी आंकड़ों पर निर्भर नहीं रहेगी, बल्कि सीधे किसानों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), प्रसंस्करण उद्योगों, निर्यातकों, व्यापारियों तथा राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर वास्तविक स्थिति का आकलन करेगी।
समिति यह समझने का प्रयास करेगी कि आखिर किन कारणों से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि उत्पादन, खरीद, प्रसंस्करण और विपणन के विभिन्न चरणों में कहां-कहां सुधार की आवश्यकता है।
किन प्रमुख बिंदुओं पर रहेगा अध्ययन
विशेषज्ञ समिति अपने अध्ययन के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेष ध्यान देगी। इनमें सबसे पहले तोतापुरी आम की वर्तमान खेती की स्थिति, उत्पादन लागत और किसानों की वास्तविक आय का मूल्यांकन किया जाएगा।
इसके अलावा प्रसंस्करण उद्योगों की मौजूदा क्षमता, उनकी उपयोग दर, मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन, घरेलू बाजार की स्थिति, निर्यात संभावनाएं तथा अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा का भी विश्लेषण किया जाएगा।
समिति यह भी जांच करेगी कि मूल्य गिरने के पीछे कौन-कौन से आर्थिक, व्यावसायिक और संरचनात्मक कारण जिम्मेदार हैं। यदि आपूर्ति अधिक होने, प्रसंस्करण क्षमता सीमित होने या विपणन व्यवस्था कमजोर होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं, तो उनके समाधान भी सुझाए जाएंगे।
वैल्यू एडिशन पर रहेगा विशेष जोर
केंद्र सरकार का मानना है कि केवल कच्चे आम की बिक्री पर निर्भर रहने के बजाय यदि मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) को बढ़ावा दिया जाए तो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
इसी दृष्टिकोण से समिति यह भी अध्ययन करेगी कि तोतापुरी आम से जूस, पल्प, प्यूरी, स्क्वैश, जैम, सॉस, फ्रोजन उत्पाद और अन्य प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्माण को कैसे बढ़ावा दिया जा सकता है। यदि प्रसंस्करण उद्योगों की क्षमता बढ़ेगी और किसानों को सीधे उद्योगों से जोड़ा जाएगा, तो बाजार में मूल्य स्थिरता लाने में भी मदद मिलेगी।
निर्यात बढ़ाने की संभावनाओं का होगा मूल्यांकन
भारत विश्व के सबसे बड़े आम उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन प्रसंस्कृत आम उत्पादों के वैश्विक बाजार में अभी भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं। विशेषज्ञ समिति यह भी अध्ययन करेगी कि तोतापुरी आम के निर्यात को बढ़ाने के लिए किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।
इसमें गुणवत्ता मानकों का पालन, पैकेजिंग, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स, अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मांग तथा निर्यातकों के सामने आने वाली चुनौतियों का विश्लेषण शामिल होगा। यदि निर्यात में वृद्धि होती है तो किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
एफपीओ और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय
समिति का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), प्रसंस्करण उद्योगों और निर्यातकों के बीच मजबूत समन्वय स्थापित करने के उपाय सुझाना भी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान संगठित होकर अपनी उपज का विपणन करें और सीधे उद्योगों से जुड़ें, तो बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी तथा किसानों को अधिक लाभ मिल सकेगा। इसके अलावा अनुबंध खेती, सामूहिक विपणन और आधुनिक सप्लाई चेन मॉडल को भी बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा।
सरकार को सौंपी जाएगी विस्तृत रिपोर्ट
जमीनी अध्ययन पूरा होने के बाद विशेषज्ञ समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्री को सौंपेगी। इस रिपोर्ट में मूल्य स्थिरीकरण के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक उपाय, प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहन, निर्यात विस्तार की रणनीति, वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने की योजनाएं तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए नीति संबंधी सुझाव शामिल होंगे।
इसके आधार पर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर सकती हैं, जिससे तोतापुरी आम क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके।
किसानों की आय बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट कहा है कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनकी आजीविका को सुरक्षित बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विशेषज्ञ समिति की अनुशंसाओं पर गंभीरता से अमल किया जाएगा और ऐसे सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, जिनसे किसानों को स्थायी राहत मिल सके।
उन्होंने कहा कि सरकार केवल मौजूदा संकट का समाधान ही नहीं चाहती, बल्कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा उत्पन्न न हों, इसके लिए भी मजबूत व्यवस्था विकसित की जाएगी। किसानों, उद्योगों और सरकार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित कर तोतापुरी आम क्षेत्र को नई मजबूती देने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी।
कृषि क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्र सरकार का यह कदम केवल आंध्र प्रदेश के तोतापुरी आम किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अन्य बागवानी क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। यदि इस अध्ययन के आधार पर प्रभावी नीतियां लागू होती हैं, तो अन्य फलों और बागवानी फसलों के लिए भी इसी प्रकार की वैल्यू चेन आधारित रणनीति तैयार की जा सकती है।
कुल मिलाकर, केंद्र सरकार की यह पहल किसानों की आय बढ़ाने, बाजार को संतुलित करने, प्रसंस्करण उद्योगों को मजबूत करने और निर्यात क्षमता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब किसानों की निगाहें विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली सरकारी कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे उन्हें बेहतर मूल्य, स्थिर बाजार और भविष्य में अधिक सुरक्षित आजीविका मिलने की उम्मीद है।

