देश में बढ़ते जलवायु परिवर्तन, घटते वन क्षेत्र और बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन के बीच केंद्र सरकार ने पर्यावरण संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली स्थित पूसा परिसर में आयोजित ‘पर्यावरण संरक्षण संकल्प कार्यक्रम एवं वृक्ष मित्र संवाद’ में देशभर से जुड़े हजारों वृक्ष मित्रों को संबोधित करते हुए पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। इस अवसर पर उन्होंने ‘वृक्ष मित्र परिवार’ नामक एक राष्ट्रीय अभियान की घोषणा की, जिसका उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को वृक्षारोपण और पौधों की देखभाल से जोड़ना है।
कार्यक्रम में देशभर से लगभग 17 हजार वृक्ष मित्र वर्चुअल और प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुए। इस दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट, पद्म भूषण पर्यावरणविद् अनिल जोशी, प्रख्यात चिकित्सक एवं समाजसेवी डॉ. अनूप हजेला सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी जिम्मेदारी न मानकर सामाजिक आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
हर परिवार बनेगा ‘वृक्ष मित्र’
अपने संबोधन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पर्यावरण संकट अब भविष्य की नहीं बल्कि वर्तमान की चुनौती बन चुका है। बढ़ता तापमान, अनियमित वर्षा, जल संकट और जैव विविधता का लगातार नुकसान मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक परिवार अपने जीवन के हर शुभ अवसर—जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ, बच्चों के जन्म, माता-पिता की पुण्यतिथि या किसी अन्य सामाजिक आयोजन—पर एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे, तो देश में करोड़ों नए वृक्ष तैयार किए जा सकते हैं।
उन्होंने प्रत्येक नागरिक से वर्ष में कम से कम एक पौधा लगाने और पांच नए लोगों को इस अभियान से जोड़ने का संकल्प लेने की अपील की। उनका कहना था कि जब यह प्रयास घर-घर तक पहुंचेगा, तभी पर्यावरण संरक्षण वास्तव में जनआंदोलन का रूप ले सकेगा।
राष्ट्रीय स्तर पर बनेगा ‘वृक्ष मित्र परिवार’
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वृक्षारोपण के प्रयासों को संगठित स्वरूप देने के लिए राष्ट्रीय, राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर तक ‘वृक्ष मित्र परिवार’ की संरचना तैयार की जाएगी। यह केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पौधों के संरक्षण, निगरानी और जनजागरूकता का भी कार्य करेगा।
उन्होंने कहा कि पंचायतों और नगर निकायों में वृक्षारोपण के लिए स्थायी स्थान चिन्हित किए जाएंगे ताकि पौधों की नियमित देखभाल सुनिश्चित हो सके। सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों की शुरुआत भी वृक्षारोपण के साथ करने का सुझाव दिया गया।
हरियाली अमावस्या बनेगी ‘पेड़ पर्व’
शिवराज सिंह चौहान ने भारतीय संस्कृति में प्रकृति और वृक्षों के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि 12 अगस्त को आने वाली हरियाली अमावस्या को पूरे देश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने इसे केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि “पेड़ पर्व” के रूप में स्थापित करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि यदि हरियाली अमावस्या, विश्व पर्यावरण दिवस, स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और अन्य राष्ट्रीय अवसरों पर सामूहिक वृक्षारोपण की परंपरा विकसित हो जाए, तो आने वाले वर्षों में देश का हरित क्षेत्र उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है।
पौधे लगाना नहीं, उन्हें बड़ा करना लक्ष्य
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि केवल पौधे लगाने से पर्यावरण नहीं बचेगा, बल्कि उनकी सुरक्षा और देखभाल भी उतनी ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अक्सर वृक्षारोपण कार्यक्रम फोटो खिंचवाने तक सीमित रह जाते हैं, जबकि सबसे बड़ी जिम्मेदारी पौधों को जीवित रखना है।
उन्होंने पंचायतों और शहरी निकायों से अपील की कि वे वृक्षारोपण के लिए सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराएं और स्थानीय समुदाय उनकी देखभाल की जिम्मेदारी उठाए। इससे पौधों की जीवित रहने की दर बढ़ेगी और हरित अभियान अधिक प्रभावी होगा।
कृषि और पर्यावरण का गहरा संबंध
शिवराज सिंह चौहान ने पर्यावरण संरक्षण को कृषि और किसानों के भविष्य से जोड़ते हुए कहा कि मिट्टी की उर्वरता, जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग ही टिकाऊ कृषि की आधारशिला है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल और मिट्टी का अंधाधुंध दोहन जारी रहा तो आने वाले समय में कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने किसानों से वैज्ञानिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग, जल संरक्षण तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की अपील की। उनका कहना था कि स्वस्थ पर्यावरण ही समृद्ध किसान और सुरक्षित भविष्य की गारंटी है।
मिशन लाइफ और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली पर जोर
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मिशन लाइफ (Lifestyle for Environment)’ का भी उल्लेख किया गया। शिवराज सिंह चौहान ने लोगों से ऊर्जा बचाने, पानी की बर्बादी रोकने, प्लास्टिक का कम उपयोग करने और पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि एलईडी बल्ब, ऊर्जा दक्ष उपकरण, जल संरक्षण, कचरे का पृथक्करण और स्थानीय उत्पादों का उपयोग जैसे छोटे-छोटे कदम भी पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान दे सकते हैं।
विशेषज्ञों ने दिया व्यवहार परिवर्तन का संदेश
पद्म भूषण पर्यावरणविद् अनिल जोशी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के व्यवहार में बदलाव आवश्यक है। उन्होंने शिवराज सिंह चौहान के वृक्षारोपण अभियान को दीर्घकालिक और प्रेरणादायक पहल बताया।
वहीं प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अनूप हजेला ने “एक पेड़ लगाओ, एक पेड़ पालो” का संदेश देते हुए कहा कि जो लोग जमीन के अभाव में पौधे नहीं लगा सकते, वे किसी सार्वजनिक स्थान पर लगे पौधे की नियमित देखभाल करके भी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने जल संरक्षण, पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) और प्लास्टिक के कम उपयोग को जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रभावी उपाय बताया।
जनभागीदारी से ही बनेगा हरित भारत
कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं का विषय नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति हर वर्ष एक पौधा लगाए, उसकी देखभाल करे और अन्य लोगों को भी इस अभियान से जोड़े, तो भारत को हरित, स्वच्छ और पर्यावरणीय रूप से अधिक सुरक्षित बनाया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘वृक्ष मित्र परिवार’ अभियान देशभर में पर्यावरण संरक्षण का एक मजबूत जनआंदोलन बनेगा और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ हवा, सुरक्षित जल और हरित धरती का उपहार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

