देश में साइबर सुरक्षा जागरूकता को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए Centre for Development of Telematics (सी-डॉट) ने Jumps Automation LLP के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की है। इस सहयोग के तहत एक आधुनिक गेमिफिकेशन आधारित प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य व्यक्तियों और संगठनों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और उनकी सुरक्षा तैयारियों को बेहतर बनाना है।
यह समझौता सी-डॉट के सहयोगात्मक अनुसंधान कार्यक्रम (CCRP) के अंतर्गत किया गया है। इस अवसर पर सी-डॉट के सीईओ Dr. Rajkumar Upadhyay और जंप्स ऑटोमेशन के प्रौद्योगिकी प्रमुख Rohan Chandak सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
गेमिफिकेशन के जरिए सीखने का नया तरीका
इस प्लेटफॉर्म की खास बात यह है कि यह पारंपरिक साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को रोचक और इंटरैक्टिव अनुभव में बदल देगा। इसमें गेमिंग एरिना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS), चर्चा मंच और वास्तविक सिमुलेशन-आधारित परिदृश्य शामिल होंगे। उपयोगकर्ताओं को फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग, मैलवेयर हमलों से बचाव और संकट प्रबंधन जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
यह प्लेटफॉर्म न केवल सीखने को आसान बनाएगा, बल्कि उपयोगकर्ताओं की भागीदारी भी बढ़ाएगा। प्रतियोगिता आधारित मॉडल के जरिए लोग बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे साइबर सुरक्षा कौशल में सुधार होगा।
AI आधारित स्मार्ट सिस्टम से होगा मूल्यांकन
इस प्लेटफॉर्म में एक उन्नत एआई-आधारित व्यवहार विश्लेषण इंजन भी शामिल होगा, जो उपयोगकर्ताओं के प्रदर्शन का लगातार मूल्यांकन करेगा। यह सिस्टम उपयोगकर्ता के स्तर के अनुसार चुनौतियों की कठिनाई को स्वतः समायोजित करेगा और नए साइबर खतरों के अनुसार कंटेंट को अपडेट करता रहेगा।
इसमें पुरस्कार और प्रदर्शन ट्रैकिंग सिस्टम भी होगा, जिससे उपयोगकर्ताओं को उनकी प्रगति का स्पष्ट आकलन मिल सकेगा। यह फीचर विशेष रूप से संगठनों के लिए उपयोगी होगा, जो अपने कर्मचारियों की साइबर सुरक्षा तैयारी को मापना चाहते हैं।
स्वदेशी तकनीक और आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा
इस परियोजना में सी-डॉट की स्वदेशी दूरसंचार और सुरक्षा तकनीक विशेषज्ञता को जंप्स ऑटोमेशन की एआई और ऑटोमेशन क्षमताओं के साथ जोड़ा जाएगा। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को मजबूत करती है और देश में स्वदेशी तकनीक के विकास को बढ़ावा देती है।
सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने इस सहयोग को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह प्लेटफॉर्म लोगों को साइबर खतरों को पहचानने और उनसे प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाएगा। वहीं, रोहन चंदक ने इसे साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण के क्षेत्र में एक परिवर्तनकारी कदम बताया, जो व्यवहारिक बदलाव लाने में मदद करेगा।
भविष्य में SaaS मॉडल के रूप में तैनाती
इस प्लेटफॉर्म को एक व्यावसायिक स्तर के SaaS (Software as a Service) समाधान के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसे विभिन्न संगठनों के साथ आसानी से जोड़ा जा सकेगा। फिलहाल इसका विकास, परीक्षण और सत्यापन नई दिल्ली स्थित सी-डॉट केंद्रों में किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में बढ़ते साइबर खतरों के बीच यह पहल देश में साइबर सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी। यह न केवल संगठनों की सुरक्षा को बढ़ाएगी, बल्कि आम नागरिकों को भी डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए सशक्त बनाएगी।

