दिल्ली-NCR की हवा एक बार फिर चिंता का कारण बन गई है। आमतौर पर सर्दियों में प्रदूषण का स्तर बढ़ता है, लेकिन इस बार अप्रैल में ही हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं। गुरुवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 226 दर्ज किया गया, जो ‘खराब’ श्रेणी में आता है। इस स्थिति को देखते हुए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का पहला चरण लागू कर दिया है।
अप्रैल में GRAP-1 लागू होना विशेषज्ञों के लिए भी चौंकाने वाला है। आमतौर पर यह पाबंदियां अक्टूबर-नवंबर के दौरान लागू होती हैं, जब पराली जलाने और दिवाली के पटाखों से प्रदूषण बढ़ता है। लेकिन इस बार मौसम की खास परिस्थितियां इसकी वजह बनी हैं। तेज और शुष्क हवाएं सड़कों और निर्माण स्थलों की धूल को हवा में फैला रही हैं। इसके साथ ही बढ़ती गर्मी के कारण प्रदूषक कण तेजी से फैल रहे हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब हो गई है।
GRAP यानी ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान को प्रदूषण के स्तर के अनुसार चार चरणों में बांटा गया है। हर चरण में अलग-अलग सख्ती और उपाय लागू किए जाते हैं। फिलहाल पहला चरण लागू किया गया है, जो ‘खराब’ श्रेणी (AQI 201-300) के लिए होता है।
GRAP-1 लागू होने के बाद कई गतिविधियों पर असर पड़ता है। निर्माण कार्यों पर सख्ती बढ़ा दी जाती है। साइट्स पर धूल को नियंत्रित करने के लिए पानी का छिड़काव अनिवार्य होता है। खुले में कचरा जलाने पर पूरी तरह रोक लगाई जाती है। इसके अलावा सड़कों की नियमित सफाई और पानी का छिड़काव बढ़ाया जाता है ताकि धूल कम उड़े।
वाहनों से होने वाले प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भी कदम उठाए जाते हैं। पुराने और ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नजर रखी जाती है। ट्रैफिक मैनेजमेंट को सख्त किया जाता है ताकि जाम की स्थिति कम हो और वाहनों से निकलने वाला धुआं घटे।
औद्योगिक गतिविधियों पर भी निगरानी बढ़ा दी जाती है। जिन फैक्ट्रियों से ज्यादा प्रदूषण होता है, उन्हें निर्धारित मानकों का सख्ती से पालन करना होता है। नियमों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई की जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मौसम में बदलाव नहीं हुआ और हवा की गति धीमी रही, तो प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में GRAP के अगले चरण भी लागू किए जा सकते हैं।
लोगों को भी इस दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों को बाहर निकलने से बचने को कहा गया है। मास्क का इस्तेमाल और सुबह-शाम की सैर से परहेज करने की सलाह दी जा रही है।
अप्रैल में ही प्रदूषण का यह स्तर साफ संकेत है कि दिल्ली-NCR में वायु गुणवत्ता की समस्या अब केवल सर्दियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह सालभर की चुनौती बनती जा रही है।

