गुजरात के वडोदरा में आयोजित आदिवासी अधिकार संविधान सम्मेलन में Rahul Gandhi ने केंद्र सरकार और Rashtriya Swayamsevak Sangh–Bharatiya Janata Party पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि “विकास” के नाम पर आदिवासियों की जमीनें लगातार छीनी जा रही हैं और उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है।
राहुल गांधी ने “आदिवासी” शब्द के महत्व को समझाते हुए कहा कि यह केवल एक पहचान नहीं बल्कि इस देश के मूल निवासियों का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “अगर हजारों साल पहले कोई यहां आता, तो पूरी जमीन आदिवासियों की होती। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें हाशिए पर धकेल दिया गया।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी और आरएसएस “आदिवासी” की जगह “वनवासी” शब्द का इस्तेमाल करते हैं, जिससे यह संदेश दिया जाता है कि वे इस देश के मूल मालिक नहीं हैं।
प्रधानमंत्री Narendra Modi पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे Birsa Munda, B. R. Ambedkar और Mahatma Gandhi की मूर्तियों के सामने श्रद्धा तो जताते हैं, लेकिन उनके विचारों और सिद्धांतों की रक्षा नहीं करते। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों की जमीन छीनकर बड़े उद्योगपतियों को सौंपना इन महान नेताओं के आदर्शों के खिलाफ है।
राहुल गांधी ने उद्योगपति Gautam Adani का नाम लेते हुए कहा कि निजीकरण की नीतियां चुनिंदा 5-7 लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले सार्वजनिक क्षेत्र में आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग के लोगों को अवसर मिलते थे, लेकिन अब निजीकरण के चलते ये मौके सीमित हो गए हैं।
उन्होंने जाति जनगणना की मांग को भी दोहराया और कहा कि देश की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति समझने के लिए यह जरूरी है। राहुल गांधी ने कहा, “देश में करीब 10% आदिवासी, 15% दलित और 50% ओबीसी हैं, लेकिन संसाधनों और अवसरों में उनकी हिस्सेदारी बेहद कम है।”
अपने संबोधन में उन्होंने टैक्स व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आम जनता और बड़े उद्योगपति समान दर से जीएसटी देते हैं, जबकि उनकी आय में भारी अंतर है। “आप जितना टैक्स देते हैं, उतना ही बड़े उद्योगपति भी देते हैं, लेकिन उनकी आय और आपकी आय में जमीन-आसमान का फर्क है,” उन्होंने कहा।
राहुल गांधी ने दावा किया कि देश की 500 सबसे बड़ी कंपनियों, निजी अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों में आदिवासियों की भागीदारी बेहद कम है। उन्होंने इसे सामाजिक और आर्थिक असमानता का बड़ा उदाहरण बताया।
सम्मेलन के दौरान राहुल गांधी के इस बयान ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया आना बाकी है, लेकिन यह साफ है कि आदिवासी अधिकार और जमीन के मुद्दे पर राजनीतिक बहस आने वाले समय में और तेज हो सकती है।

