पंजाब में गेहूं की फसल में बालियों पर बैंगनी रंग दिखाई देने को लेकर किसानों की बढ़ती चिंता के बीच Punjab Agricultural University के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह कोई रोग नहीं है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि इस स्थिति में फफूंदनाशक दवाओं का छिड़काव करने की आवश्यकता नहीं है।
विश्वविद्यालय के प्लांट पैथोलॉजी विभाग के प्रमुख D. S. Bhuttar ने बताया कि इस समय पंजाब के अधिकांश क्षेत्रों में गेहूं की फसल बालियां निकलने की अवस्था में है। हाल के दिनों में कई किसानों ने गेहूं की बालियों (ग्लूम्स) और डंठल (पेडुनकल) पर बैंगनी रंग दिखाई देने की शिकायत की है। कुछ किसानों ने बिना कृषि वैज्ञानिकों या विस्तार विशेषज्ञों से सलाह लिए ही फफूंदनाशक का छिड़काव भी कर दिया है।
डॉ. भुट्टर ने बताया कि इस समस्या को समझने के लिए विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने विभिन्न क्षेत्रों में विस्तृत सर्वेक्षण किया। जांच में पाया गया कि यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि केवल बालियों की बाहरी परत पर रंग परिवर्तन दिखाई देता है। इसके अंदर विकसित हो रहा गेहूं का दाना पूरी तरह स्वस्थ रहता है और उसमें किसी प्रकार का रंग परिवर्तन नहीं होता।
उन्होंने बताया कि ऐसी ही स्थिति वर्ष 2022 में भी देखने को मिली थी, जब मार्च महीने में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया गया था। वैज्ञानिकों के अनुसार यह रंग परिवर्तन संभवतः मेलानिन नामक पिगमेंट बनने के कारण होता है, जो कुछ लोकप्रिय गेहूं किस्मों की स्वाभाविक विशेषता हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि फरवरी और मार्च के दौरान दिन और रात के तापमान में सामान्य से अधिक वृद्धि होने के कारण यह स्थिति और स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगती है। अलग-अलग गेहूं किस्मों में यह बैंगनी रंग अलग-अलग स्तर पर दिखाई देता है।
क्योंकि यह कोई रोग नहीं है, इसलिए इसके नियंत्रण के लिए फफूंदनाशक दवाओं के उपयोग की जरूरत नहीं है। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे अनावश्यक छिड़काव से बचें और फसल की देखभाल पर ध्यान दें।
पीएयू विशेषज्ञों के अनुसार किसानों को समय-समय पर जरूरत के अनुसार सिंचाई करनी चाहिए और गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए विश्वविद्यालय की सिफारिश के अनुसार पोटेशियम नाइट्रेट का छिड़काव किया जा सकता है। इससे फसल को तापमान के तनाव से बचाने में मदद मिलेगी और किसानों को बेहतर उत्पादन प्राप्त हो सकेगा।

