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ICAR-DWR जबलपुर ने किसान फर्स्ट कार्यक्रम के तहत चलाया ‘खेत बचाओ अभियान’, किसानों को दी जलवायु-स्मार्ट खेती की ट्रेनिंग और वितरित किए उन्नत बीज

खरीफ 2026 की तैयारी को मिलेगी मजबूती, आदिवासी क्षेत्रों के किसानों को वैज्ञानिक खेती

Emran Khan by Emran Khan
June 29, 2026
in कृषि समाचार, समाचार
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ICAR-DWR जबलपुर ने किसान फर्स्ट कार्यक्रम के तहत चलाया ‘खेत बचाओ अभियान’, किसानों को दी जलवायु-स्मार्ट खेती की ट्रेनिंग और वितरित किए उन्नत बीज
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बदलते मौसम और अनिश्चित मानसून के बीच किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत डायरेक्टोरेट ऑफ वीड रिसर्च (ICAR-DWR), जबलपुर ने किसान फर्स्ट कार्यक्रम (Farmer FIRST Programme) के तहत “खेत बचाओ अभियान एवं महत्वपूर्ण कृषि आदानों के वितरण” विषय पर एक जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए आधुनिक कृषि तकनीकों से परिचित कराना और खरीफ सीजन 2026 के लिए उनकी तैयारियों को मजबूत बनाना था।

इस कार्यक्रम में जबलपुर जिले के कुंडम विकासखंड के खुक्खम, पड़रिया और रानीपुर जैसे आदिवासी बहुल गांवों के 45 किसानों ने भाग लिया, जिनमें 19 महिला किसान भी शामिल थीं। प्रशिक्षण के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को मौसम आधारित खेती, संसाधन संरक्षण तकनीकों, खरपतवार नियंत्रण, उन्नत धान किस्मों और संतुलित पोषण प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी।

बदलते मौसम में वैज्ञानिक खेती अपनाने पर दिया गया जोर

भारत में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव कृषि पर लगातार बढ़ रहा है। मानसून की अनिश्चितता, कम या अधिक वर्षा, लंबे सूखे अंतराल और तापमान में बदलाव जैसी परिस्थितियां किसानों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं।

इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ जलवायु-स्मार्ट कृषि (Climate Smart Agriculture) अपनाना समय की आवश्यकता बन चुका है।

विशेषज्ञों ने कहा कि यदि किसान मौसम के अनुसार वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करें, तो फसल उत्पादन को सुरक्षित रखने के साथ-साथ लागत भी कम की जा सकती है।

डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक की दी गई जानकारी

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डायरेक्ट सीडेड राइस (Direct-Seeded Rice – DSR) तकनीक पर विशेष प्रशिक्षण रहा।

वैज्ञानिकों ने किसानों को बताया कि DSR तकनीक में धान की रोपाई करने के बजाय सीधे खेत में बीज बोए जाते हैं। इससे—

  • पानी की बचत होती है।
  • मजदूरी की लागत कम होती है।
  • समय की बचत होती है।
  • फसल जल्दी तैयार होती है।
  • जलवायु परिवर्तन की परिस्थितियों में बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना रहती है।

विशेषज्ञों ने कहा कि जिन क्षेत्रों में मजदूरों की कमी या पानी की उपलब्धता सीमित है, वहां DSR तकनीक किसानों के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकती है।

अनिश्चित वर्षा से बचाव के लिए बताए गए महत्वपूर्ण उपाय

प्रशिक्षण कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने किसानों को मानसून की अनिश्चितता से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव दिए।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे

  • खेत में वर्षा जल का संरक्षण (In-situ Moisture Conservation)
  • संतुलित उर्वरक प्रबंधन
  • जरूरत के अनुसार यूरिया एवं डीएपी का उपयोग
  • लंबे सूखे के दौरान स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाना
  • समय पर बुवाई और फसल प्रबंधन

विशेषज्ञों ने बताया कि इन उपायों को अपनाने से फसल की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है और उत्पादन में गिरावट की संभावना कम हो जाती है।

किसानों को वितरित किए गए उन्नत धान बीज

खरीफ सीजन की तैयारी को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम के दौरान किसानों को महत्वपूर्ण कृषि आदान भी वितरित किए गए।

किसानों को उच्च उत्पादकता वाली धान की उन्नत किस्मों के बीज उपलब्ध कराए गए, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • स्वर्णा श्रेया
  • अभिषेक
  • DRR-47
  • पूर्णा
  • CR धान-207 (IMI Herbicide Tolerant)

इन किस्मों का चयन वैज्ञानिक परीक्षणों के आधार पर किया गया है और इन्हें विशेष रूप से DSR प्रणाली तथा खरपतवार प्रतिस्पर्धा वाले क्षेत्रों के लिए उपयुक्त माना जाता है।

खरपतवार प्रबंधन पर वैज्ञानिकों ने दी विशेष जानकारी

धान की खेती में खरपतवार एक बड़ी समस्या है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।

कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को वैज्ञानिक खरपतवार प्रबंधन की आधुनिक तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि

  • समय पर खरपतवार नियंत्रण करने से उत्पादन बढ़ता है।
  • उचित शाकनाशी (Herbicide) का सही मात्रा में उपयोग जरूरी है।
  • उन्नत किस्मों के चयन से खरपतवार का प्रभाव कम किया जा सकता है।
  • DSR प्रणाली में वैज्ञानिक खरपतवार प्रबंधन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खरपतवार नियंत्रण से जुड़ी सावधानियों की भी जानकारी दी।

संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाने की सलाह

कार्यक्रम में किसानों को यह भी समझाया गया कि केवल अधिक मात्रा में खाद डालने से उत्पादन नहीं बढ़ता।

वैज्ञानिकों ने कहा कि खेत की आवश्यकता के अनुसार संतुलित मात्रा में यूरिया, डीएपी तथा अन्य पोषक तत्वों का उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने मृदा परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के प्रयोग पर भी जोर दिया ताकि लागत कम हो और मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहे।

Tags: AgricultureFarmingICAR-DWRJabalpur
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