आगरा- किसानों से खाद की कालाबाजारी और निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत वसूलने की शिकायतों के बाद कृषि विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। जिले में कृषि विभाग ने तीन उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। विभाग की इस कार्रवाई के बाद संबंधित दुकानदार जांच पूरी होने तक उर्वरक की खरीद और बिक्री नहीं कर सकेंगे।
कृषि विभाग की कार्रवाई किसानों की शिकायतों के आधार पर की गई है। किसानों ने विभाग के कंट्रोल रूम पर शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि कुछ दुकानदार यूरिया को निर्धारित कीमत से अधिक दर पर बेच रहे हैं। इसके अलावा दुकानदारों पर खाद की कमी होने की बात कहकर किसानों को भ्रमित करने और जरूरत से ज्यादा कीमत वसूलने के आरोप भी लगाए गए थे।
किसानों की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार के अनुसार, कृषि विभाग के कंट्रोल रूम पर किसानों की ओर से तीन उर्वरक विक्रेताओं के खिलाफ शिकायतें प्राप्त हुई थीं। शिकायतों में बताया गया था कि दुकानदार किसानों को निर्धारित मूल्य पर यूरिया उपलब्ध नहीं करा रहे हैं और अधिक कीमत की मांग कर रहे हैं।
किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ दुकानदार खाद की कमी बताकर उन्हें परेशान कर रहे हैं। यूरिया की उपलब्धता को लेकर किसानों में भ्रम की स्थिति पैदा की जा रही थी। शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए कृषि विभाग ने मामले की जांच शुरू की।
प्रारंभिक जांच और शिकायतों के आधार पर विभाग ने तीन दुकानदारों के उर्वरक लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने तक इन दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।
इन तीन दुकानदारों पर हुई कार्रवाई
कृषि विभाग ने जिन तीन उर्वरक विक्रेताओं के लाइसेंस निलंबित किए हैं, उनमें मोनू खाद बीज भंडार, अरनौटा पिनाहट, मां दुर्गा खाद बीज भंडार, बिहारीपुर, एत्मादपुर और कृष्णा बीज भंडार, ककुआ बरौली अहीर शामिल हैं।
विभाग की कार्रवाई के बाद इन दुकानदारों को उर्वरक की खरीद-बिक्री से रोक दिया गया है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि इन दुकानदारों ने निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर यूरिया की बिक्री की थी या नहीं। इसके साथ ही खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों को गलत जानकारी देने और किसी तरह की अनियमितता किए जाने की भी जांच की जाएगी।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
किसानों से अधिक कीमत वसूलने का आरोप
कृषि विभाग को मिली शिकायतों में सबसे प्रमुख आरोप यूरिया की निर्धारित कीमत से अधिक वसूली का है। किसानों के लिए यूरिया का अधिकतम खुदरा मूल्य सरकार द्वारा निर्धारित किया जाता है। ऐसे में दुकानदारों द्वारा इससे अधिक कीमत वसूलना नियमों का उल्लंघन माना जाता है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे खाद खरीदते समय पैकेट पर दर्ज अधिकतम खुदरा मूल्य यानी MRP जरूर देखें। यदि कोई दुकानदार निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत मांगता है तो किसान इसकी शिकायत कृषि विभाग के कंट्रोल रूम या संबंधित कृषि अधिकारियों से कर सकते हैं।
विभाग का कहना है कि किसानों को खाद की कमी की अफवाहों पर भरोसा करने की जरूरत नहीं है। जिले में पर्याप्त मात्रा में प्रमुख उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध बताया गया है।
जिले में यूरिया का पर्याप्त स्टॉक
जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि जिले में फिलहाल 17.23 हजार मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। इसके अलावा 11.43 हजार मीट्रिक टन डीएपी और 13.13 हजार मीट्रिक टन एनपीके का स्टॉक भी मौजूद है।
विभाग की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, जिले में इन प्रमुख उर्वरकों का स्टॉक मौजूद है। ऐसे में किसानों को खाद की कमी की बात कहकर परेशान करने या उन्हें निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर उर्वरक बेचने की शिकायतों को विभाग गंभीरता से ले रहा है।
कृषि विभाग का कहना है कि किसानों को खाद खरीदने के लिए घबराने की जरूरत नहीं है। उन्हें अपनी जरूरत के अनुसार ही उर्वरक खरीदना चाहिए और अधिक कीमत मांगने वाले विक्रेताओं की सूचना विभाग को देनी चाहिए।
खाद की कमी बताकर किसानों को भ्रमित करने का आरोप
कृषि विभाग के अनुसार, किसानों की शिकायतों में यह भी कहा गया था कि कुछ विक्रेता खाद की कमी का हवाला देकर किसानों को भ्रमित कर रहे थे। किसानों से कहा जा रहा था कि बाजार में खाद की उपलब्धता कम है, इसलिए उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी किसान को निर्धारित मूल्य पर उर्वरक नहीं दिया जाता है या उससे अधिक कीमत मांगी जाती है तो वह इसकी शिकायत कर सकता है। विभाग शिकायत मिलने के बाद संबंधित दुकान और स्टॉक की जांच कर सकता है।
उर्वरक बिक्री में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए विभाग की ओर से विक्रेताओं के रिकॉर्ड की भी जांच की जा सकती है। इसमें दुकान पर उपलब्ध स्टॉक, खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड और किसानों को जारी की गई बिक्री की जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
किसानों को खाद खरीदते समय इन बातों का रखना चाहिए ध्यान
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि खाद खरीदते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें। सबसे पहले किसान उर्वरक के पैकेट पर दर्ज MRP की जांच करें। इसके बाद दुकानदार से खरीद की रसीद जरूर लें।
यदि दुकानदार निर्धारित कीमत से अधिक पैसे मांगता है तो किसान बिना रसीद के भुगतान करने से बचें। किसान दुकान पर उपलब्ध खाद की कीमत और बिल की जानकारी सुरक्षित रखें। शिकायत की स्थिति में यही जानकारी विभाग के लिए जांच में उपयोगी हो सकती है।
किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि किसी एक उर्वरक की कथित कमी की अफवाह सुनकर जरूरत से ज्यादा खरीदारी न करें। इससे बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति पैदा हो सकती है और वास्तविक जरूरत वाले किसानों को परेशानी हो सकती है।
कालाबाजारी पर विभाग की नजर
उर्वरकों की कालाबाजारी और अधिक कीमत पर बिक्री रोकने के लिए कृषि विभाग की ओर से दुकानों की निगरानी की जा रही है। खासकर यूरिया, डीएपी और एनपीके जैसे प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता पर विभाग नजर रख रहा है।
किसानों की शिकायतों को विभाग के लिए महत्वपूर्ण सूचना माना जा रहा है। कंट्रोल रूम पर मिलने वाली शिकायतों के आधार पर संबंधित दुकानों की जांच की जा सकती है। यदि किसी विक्रेता के खिलाफ शिकायत सही पाई जाती है तो उसके लाइसेंस पर कार्रवाई की जा सकती है।
तीन दुकानदारों के लाइसेंस निलंबित किए जाने से अन्य उर्वरक विक्रेताओं को भी स्पष्ट संदेश गया है कि निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर खाद बेचने या किसानों को भ्रमित करने पर विभाग सख्त कार्रवाई कर सकता है।
किसानों से अपील, घबराकर खाद न खरीदें
जिला कृषि अधिकारी ने किसानों से अपील की है कि वे खाद की उपलब्धता को लेकर भ्रमित न हों। जिले में यूरिया, डीएपी और एनपीके का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध बताया गया है। किसानों को अपनी आवश्यकता के अनुसार ही खाद खरीदनी चाहिए।
विभाग ने यह भी कहा है कि किसान खाद खरीदते समय पैकेट पर दर्ज मूल्य को जरूर देखें। अगर कोई विक्रेता इससे अधिक कीमत पर खाद बेचता है या खाद उपलब्ध होने के बावजूद कमी की बात कहकर किसान से अतिरिक्त पैसा मांगता है तो इसकी शिकायत विभाग से की जानी चाहिए।
कृषि विभाग की इस कार्रवाई को किसानों के हित में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। उर्वरक की कीमतों में पारदर्शिता बनाए रखना और किसानों को समय पर उचित दर पर खाद उपलब्ध कराना कृषि विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है।
फिलहाल तीन दुकानदारों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और मामले की जांच जारी है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। वहीं विभाग ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि जिले में उर्वरकों की उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा रही है और कालाबाजारी या अधिक कीमत वसूलने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

