भारत की बड़ी यूरिया खरीद ने अंतरराष्ट्रीय उर्वरक बाजार में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है। भारत के नए टेंडर के बाद यूरिया की कीमतों में तेजी देखने को मिली है और नॉर्थ अफ्रीका के उत्पादक इस रैली में सबसे आगे हैं। दूसरी ओर, प्रोसेस्ड फॉस्फेट बाजार में उत्पादकों को ऊंची कीमतों को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि पोटाश बाजार में मुख्य खरीद सीजन समाप्त होने के कारण कीमतों पर दबाव बढ़ गया है।
अंतरराष्ट्रीय उर्वरक बाजार के ताजा आकलन के मुताबिक, यूरिया के लिए बाजार का रुख फिलहाल मजबूत है। दानेदार यूरिया की इंडिकेटिव कीमत 380-420 डॉलर प्रति टन FOB के दायरे में बनी हुई है। भारत की खरीद, यूरोप में महंगी गैस, होर्मुज स्ट्रेट के आसपास जारी लॉजिस्टिक जोखिम और ब्राजील की नई मांग ने बाजार में उपलब्धता को प्रभावित किया है।
भारत के टेंडर ने यूरिया बाजार को दी नई ताकत
भारत की नई यूरिया खरीद ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार को फिर से सक्रिय कर दिया है। राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स (RCF) के टेंडर में कुल 17,79,500 टन यूरिया के ऑफर स्वीकार किए गए हैं। इसमें भारत के ईस्ट कोस्ट के लिए 7,46,500 टन यूरिया करीब 390.25 डॉलर प्रति टन CFR और वेस्ट कोस्ट के लिए 10,33,000 टन करीब 393.65 डॉलर प्रति टन CFR पर स्वीकार किए गए।
बाजार में सबसे अधिक मात्रा चीन से आने की उम्मीद है। चीनी यूरिया करीब 350-365 डॉलर प्रति टन FOB के स्तर पर उपलब्ध होने की बात कही गई है। उत्तरी चीन से भारत के ईस्ट कोस्ट तक माल ढुलाई करीब 20 डॉलर प्रति टन के दायरे में बताई गई है, जबकि 50,000 टन के वेस्ट कोस्ट कार्गो के लिए फ्रेट करीब 30-32 डॉलर प्रति टन रहने का अनुमान है।
भारत की इस बड़ी खरीद से आसपास के बाजारों में उपलब्धता कम हुई है और प्रिल्ड तथा ग्रेन्युलर यूरिया दोनों में सेंटीमेंट मजबूत हुआ है।
नॉर्थ अफ्रीका में यूरिया कीमतों में तेज उछाल
यूरिया बाजार में फिलहाल नॉर्थ अफ्रीका सबसे मजबूत क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। अल्जीरिया के AOA द्वारा सितंबर डिलीवरी का यूरिया ओपन-डेस्टिनेशन आधार पर करीब 467 डॉलर प्रति टन FOB पर बेचे जाने की खबर है। यह पिछली ऊंची कीमत से करीब 12 डॉलर अधिक है।
मिस्र में भी अबू क़िर ने करीब 475 डॉलर प्रति टन FOB का भाव हासिल किया है। हालांकि यह कीमत जुलाई के अंत में दर्ज करीब 555 डॉलर प्रति टन के स्तर से नीचे है, लेकिन हाल की बिक्री की तुलना में बाजार में स्पष्ट मजबूती दिखाई दे रही है।
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि नॉर्थ अफ्रीका में कीमतों की यह मजबूती अगस्त के बाकी दिनों में भी बनी रहती है या नहीं।
ब्राजील की मांग से भी मिला समर्थन
ब्राजील में सफरिन्हा खरीद अवधि के कारण यूरिया की मांग बढ़ने की उम्मीद है। नॉन-चाइनीज यूरिया के ऑफर करीब 450 डॉलर प्रति टन CFR तक पहुंच गए हैं। रूस से हाल की एक डील करीब 413 डॉलर प्रति टन CFR पर होने की जानकारी है, जबकि रिप्लेसमेंट ऑफर करीब 435 डॉलर प्रति टन के आसपास बताए गए हैं।
चीनी ग्रेन्युलर यूरिया के ऑफर भी बढ़कर करीब 400-410 डॉलर प्रति टन FOB हो गए हैं, हालांकि वास्तविक बिक्री अभी 380 डॉलर प्रति टन के दायरे में बनी हुई है।
चीन ने जनवरी से जुलाई के दौरान करीब 9.07 लाख टन यूरिया का निर्यात किया, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में लगभग 41 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान ब्राजील, दक्षिण एशिया और भारत की ओर निर्यात में भी वृद्धि हुई है।
ईरानी यूरिया करीब 345 डॉलर प्रति टन FOB के आसपास कम कीमत पर उपलब्ध बताया जा रहा है, लेकिन इसके वास्तविक भौतिक शिपमेंट के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं।
फॉस्फेट बाजार में अफोर्डेबिलिटी सबसे बड़ी चुनौती
यूरिया के विपरीत प्रोसेस्ड फॉस्फेट बाजार में तेजी का माहौल नहीं है। MAP की ब्राजीलियन इंडिकेटिव कीमत करीब 850-860 डॉलर प्रति टन CFR है और बाजार का रुख स्थिर से कमजोर बताया जा रहा है।
फॉस्फेट उत्पादकों के सामने समस्या उपलब्धता से ज्यादा किसानों और खरीदारों की भुगतान क्षमता की है। सीमित सप्लाई और ऊंची इनपुट लागत के बावजूद उत्पादक कीमतों को बनाए रखने में मुश्किल महसूस कर रहे हैं।
ब्राजील में हाल की MAP डील करीब 850 डॉलर प्रति टन CFR पर हुई है। पिछले तीन सप्ताह में कीमत लगभग 30 डॉलर प्रति टन कम हुई है। हालांकि, वर्ष 2026 की शुरुआत की तुलना में MAP अभी भी लगभग 185 डॉलर प्रति टन और पिछले साल की तुलना में करीब 110 डॉलर प्रति टन महंगा है।
ब्राजील में जनवरी-मई के दौरान फॉस्फेट उर्वरक आयात सालाना आधार पर 7.1 प्रतिशत घटकर करीब 16.7 लाख टन P2O5 रह गया है। घरेलू उत्पादन भी कमजोर रहने की बात कही गई है।
चीन में DAP-MAP की मांग कमजोर
फॉस्फेट बाजार में चीन सबसे बड़ी अनिश्चितताओं में से एक बना हुआ है। DAP और MAP की घरेलू मांग धीमी है। NPK उत्पादकों ने शरद ऋतु के लिए जरूरी कच्चे माल की खरीद अभी तक तेज नहीं की है।
चीन में प्लांट ऑपरेटिंग रेट करीब 35-40 प्रतिशत क्षमता के आसपास रहने की जानकारी है। सल्फर की ऊंची कीमतों ने उत्पादन लागत बढ़ाई है और कुछ उत्पादकों को उत्पादन घटाने के लिए मजबूर किया है।
चीन के DAP एक्सपोर्ट की कीमत करीब 850-905 डॉलर प्रति टन FOB है, जबकि उत्पादन लागत 950-1,100 डॉलर प्रति टन FOB तक बताई गई है। इससे पता चलता है कि मौजूदा कीमतों पर उत्पादकों के मार्जिन पर काफी दबाव है।
हाल के टेंडरों में भी खरीदारों की कीमत संवेदनशीलता दिखाई दी है। इंडोनेशिया में पुपुक को करीब 950 डॉलर प्रति टन CFR का DAP ऑफर मिला। भारत की NFL को 90 दिन के क्रेडिट के साथ करीब 928 डॉलर प्रति टन CFR का ऑफर बताया गया है। बांग्लादेश के टेंडर में DAP के लिए करीब 978.89 डॉलर प्रति टन CFR और TSP के लिए 767 डॉलर प्रति टन CFR का न्यूनतम ऑफर सामने आया।
पोटाश बाजार में नरमी
पोटाश बाजार का रुख यूरिया से बिल्कुल अलग है। MOP की ब्राजीलियन इंडिकेटिव कीमत करीब 390-403 डॉलर प्रति टन CFR है और बाजार में नरमी बनी हुई है।
यूरोप और दक्षिण-पूर्व एशिया में ग्रेन्युलर पोटाश की मांग धीमी होने के कारण कीमतों पर दबाव आया है। ब्राजील में सफरिन्हा सीजन की अधिकांश जरूरत अप्रैल तक खरीदी जा चुकी थी। जून तक ब्राजील का पोटाश आयात करीब 88 लाख टन तक पहुंच गया था।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार ब्राजील, चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया में मांग कमजोर रहने तथा सप्लाई पर्याप्त होने से निकट अवधि में पोटाश की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। अक्टूबर के लिए 370-380 डॉलर प्रति टन CFR के संकेत भी कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं।
अमोनिया बाजार में दो तस्वीर
अमोनिया बाजार में क्षेत्रीय अंतर साफ दिखाई दे रहा है। स्वेज नहर के पश्चिम में कीमतों को यूरोप में प्राकृतिक गैस की ऊंची कीमतों से समर्थन मिल रहा है, जबकि स्वेज के पूर्व में कमजोर मांग और पर्याप्त सप्लाई के कारण बाजार दबाव में है।
नॉर्थ-वेस्ट यूरोप में अमोनिया की कीमत 700 डॉलर प्रति टन CFR से ऊपर बनी हुई है। 20 अगस्त को डच TTF गैस की कीमत 63.93 यूरो प्रति MWh रही, जिससे यूरोपीय अमोनिया बाजार को समर्थन मिला।
इसके विपरीत स्वेज के पूर्व में बाजार का सेंटीमेंट कमजोर है। चीन के करीब 430 डॉलर प्रति टन FOB के ऑफर क्षेत्रीय कीमतों के लिए आधार बना रहे हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया में कीमतें घटकर करीब 420-500 डॉलर प्रति टन FOB तक आ गई हैं। मलेशियाई अमोनिया के भारत में करीब 450 डॉलर प्रति टन CFR पर बिकने की जानकारी है।
आगे कैसी रहेगी उर्वरक कीमतों की दिशा?
अंतरराष्ट्रीय उर्वरक बाजार में फिलहाल अलग-अलग उत्पादों के लिए अलग-अलग तस्वीर दिखाई दे रही है। यूरिया में भारत की बड़ी खरीद और नॉर्थ अफ्रीका की मजबूती तेजी का संकेत दे रही है, जबकि पोटाश में पर्याप्त सप्लाई और मौसमी मांग में कमी कीमतों को नीचे खींच रही है। फॉस्फेट में ऊंची कीमतों के कारण खरीदारों की अफोर्डेबिलिटी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ब्राजील की मांग, यूरोप की खरीद, होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति और ऊर्जा कीमतें आने वाले दिनों में उर्वरक बाजार की दिशा तय करेंगी।
विश्लेषकों के अनुसार, अल्पकालिक कीमतों में गिरावट को उर्वरक बाजार के पुराने सामान्य दौर में वापसी नहीं माना जाना चाहिए। मिडिल ईस्ट में शिपिंग जोखिम, अमोनिया संयंत्रों की कम ऑपरेटिंग दर, ऊर्जा की ऊंची लागत और फॉस्फेट की सीमित उपलब्धता अभी भी बाजार के लिए बड़े जोखिम हैं।
इसलिए आने वाले महीनों में उर्वरक बाजार में यूरिया की मजबूती, फॉस्फेट की अफोर्डेबिलिटी समस्या और पोटाश की कमजोरी एक साथ देखने को मिल सकती है। भारत की अगली खरीद और वैश्विक सप्लाई की स्थिति इस बाजार की अगली दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

