भारत और गुयाना के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत-गुयाना संयुक्त कृषि कार्य समूह (Joint Working Group-JWG) की पहली बैठक 1 जुलाई 2026 को सफलतापूर्वक आयोजित की गई। इस बैठक में दोनों देशों ने कृषि अनुसंधान, आधुनिक तकनीक, क्षमता निर्माण, मूल्यवर्धन और कृषि व्यापार को बढ़ावा देने के लिए दीर्घकालिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के संयुक्त सचिव (अंतरराष्ट्रीय सहयोग) अजीत कुमार साहू और गुयाना के कृषि मंत्रालय के महानिदेशक धनेश्वर देओनाराइन ने की। दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र में साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया।
कृषि साझेदारी को मजबूत बनाने पर जोर
बैठक के दौरान दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और गुयाना के बीच कृषि सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए अनुसंधान, प्रशिक्षण, तकनीकी सहयोग और आधुनिक कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देना आवश्यक है।
भारत ने कृषि उत्पादन, अनुसंधान, बीज विकास, सिंचाई, कृषि यंत्रीकरण और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करने की प्रतिबद्धता दोहराई, जबकि गुयाना ने कृषि विकास में भारत के सहयोग का स्वागत करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की।
दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि कृषि क्षेत्र में मजबूत सहयोग न केवल किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि खाद्य सुरक्षा और सतत कृषि विकास के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाएगा।
पांच प्रमुख क्षेत्रों में होगा सहयोग
संयुक्त कार्य समूह की बैठक में कृषि क्षेत्र के पांच महत्वपूर्ण क्षेत्रों को सहयोग के लिए प्राथमिकता दी गई। इनमें नारियल उत्पादन, डेयरी विकास, चीनी उद्योग, धान (चावल) उत्पादन और पशुपालन शामिल हैं।
इन सभी क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, बेहतर प्रबंधन और मूल्यवर्धन के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आय में सुधार लाने पर विशेष जोर दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास इन क्षेत्रों में व्यापक अनुभव और वैज्ञानिक क्षमता उपलब्ध है, जिसका लाभ गुयाना को भी मिल सकेगा।
प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग पर रहेगा विशेष फोकस
बैठक में दोनों देशों ने कृषि वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों और किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी सहमति जताई। इसके तहत आधुनिक कृषि तकनीकों, बेहतर फसल प्रबंधन, पशुपालन, डेयरी उत्पादन तथा खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।
इसके अलावा आधुनिक कृषि उपकरणों, उन्नत बीजों, नई तकनीकों और अनुसंधान आधारित समाधानों तक किसानों की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
भारत की कृषि अनुसंधान प्रणाली और प्रशिक्षण संस्थानों के अनुभव का लाभ गुयाना के कृषि क्षेत्र को उपलब्ध कराने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल की जाएगी।
फसल सुधार और मूल्यवर्धन पर होगा काम
संयुक्त बैठक में फसल सुधार (Crop Improvement) और कृषि उत्पादों के मूल्यवर्धन (Value Addition) को भी सहयोग का प्रमुख आधार बनाया गया।
दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, प्रसंस्करण सुविधाओं का विस्तार करने और उन्हें अधिक मूल्य वाले उत्पादों में बदलने की दिशा में भी मिलकर कार्य किया जाएगा।
इससे किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा, कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
डेयरी और पशुपालन क्षेत्र में नए अवसर
बैठक के दौरान डेयरी और पशुपालन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी विशेष चर्चा हुई। भारत ने डेयरी सहकारिता, पशु स्वास्थ्य, नस्ल सुधार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और पशुपालन प्रबंधन में अपने अनुभव साझा करने की इच्छा जताई।
इसी प्रकार पशुधन विकास, पशु पोषण और आधुनिक पशुपालन तकनीकों के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच ज्ञान और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान पर सहमति बनी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों देशों के पशुपालकों को आधुनिक तकनीकों का लाभ मिलेगा और पशुधन आधारित आय में वृद्धि होगी।
धान और चीनी उद्योग में भी सहयोग
भारत और गुयाना दोनों ही कृषि प्रधान देश हैं और धान उत्पादन दोनों देशों की कृषि अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। बैठक में उन्नत धान किस्मों के विकास, उत्पादकता बढ़ाने और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने पर चर्चा की गई।
इसके अलावा चीनी उद्योग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी सहयोग बढ़ाने की सहमति बनी। आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण, उत्पादन क्षमता में वृद्धि और उद्योग के आधुनिकीकरण के माध्यम से इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने पर विचार किया गया।
प्रभावी कार्यान्वयन तंत्र तैयार करने पर सहमति
संयुक्त कार्य समूह की बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सहयोग केवल समझौतों तक सीमित न रहे, बल्कि उसे प्रभावी ढंग से लागू भी किया जाए।
इसी उद्देश्य से दोनों देशों ने कार्यान्वयन तंत्र (Implementation Mechanism) को मजबूत बनाने पर सहमति जताई ताकि तय किए गए कार्यक्रम समयबद्ध तरीके से पूरे किए जा सकें और सहयोग के परिणाम किसानों तक पहुंच सकें।
दोनों पक्षों ने नियमित संवाद, विशेषज्ञों की बैठकें और संयुक्त परियोजनाओं के माध्यम से इस साझेदारी को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
भारत की वैश्विक कृषि साझेदारी को मिलेगा विस्तार
भारत पिछले कुछ वर्षों से दुनिया के अनेक देशों के साथ कृषि सहयोग को लगातार मजबूत कर रहा है। अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और कैरेबियाई देशों के साथ कृषि अनुसंधान, तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भारत की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
गुयाना के साथ आयोजित पहली संयुक्त कृषि कार्य समूह बैठक इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इससे दोनों देशों के बीच कृषि अनुसंधान, नवाचार, तकनीकी सहयोग और व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और गुयाना के बीच यह साझेदारी भविष्य में कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण समृद्धि और सतत कृषि प्रणाली को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रशिक्षण और मूल्यवर्धन पर आधारित यह सहयोग दोनों देशों के किसानों के लिए नए अवसर पैदा करेगा और कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।

