Bhupender Yadav ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रथम इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) शिखर सम्मेलन 2026 की आधिकारिक वेबसाइट और लोगो का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने शिखर सम्मेलन की प्रचार फिल्म भी जारी की। कार्यक्रम में बड़ी बिल्ली प्रजातियों वाले कई देशों के राजनयिक, पर्यावरण मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और आईबीसीए के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
भारत 01 और 02 जून 2026 को नई दिल्ली में पहले इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। यह वैश्विक सम्मेलन ‘सेव बिग कैट्स, सेव ह्यूमैनिटी, सेव इकोसिस्टम्स’ थीम पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें दुनिया भर से 400 से अधिक संरक्षण विशेषज्ञ, नीति निर्माता, वैज्ञानिक, वित्तीय संस्थान, बहुपक्षीय एजेंसियां और सामुदायिक प्रतिनिधि भाग लेंगे।
International Big Cat Alliance एक अंतर-सरकारी वैश्विक संगठन है, जिसका मुख्यालय भारत में स्थापित किया गया है। इस गठबंधन की स्थापना सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों—शेर, बाघ, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा—के संरक्षण के उद्देश्य से की गई है। भारत ने वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व में इस पहल की शुरुआत की थी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि यह सम्मेलन वैश्विक संरक्षण कूटनीति में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने प्रोजेक्ट टाइगर, शेर संरक्षण, हिम तेंदुआ और चीता पुनर्वास जैसी पहलों के माध्यम से यह सिद्ध किया है कि संरक्षण और विकास एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि जैव विविधता संरक्षण केवल वन्यजीवों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिकी तंत्र, जलवायु संतुलन और मानव जीवन से भी सीधे जुड़ा हुआ है।
श्री यादव ने बताया कि सम्मेलन में सदस्य और पर्यवेक्षक देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों के शामिल होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि यह मंच बड़ी बिल्ली प्रजातियों वाले देशों को साझा चुनौतियों और समाधानों पर मिलकर काम करने का अवसर देगा। सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करेगा और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देगा।
उन्होंने उन देशों से भी अपील की जो अभी तक आईबीसीए का हिस्सा नहीं बने हैं कि वे इस गठबंधन में शामिल हों, ताकि बड़ी बिल्ली प्रजातियों और उनके प्राकृतिक आवासों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि संरक्षण की चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों, ज्ञान साझाकरण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ही संभव है।
सम्मेलन का एक प्रमुख परिणाम ‘दिल्ली घोषणा’ के रूप में सामने आएगा, जो बड़ी बिल्लियों के संरक्षण पर पहली वैश्विक प्रतिबद्धता मानी जा रही है। यह घोषणा साझा प्राथमिकताओं को स्पष्ट करेगी, सीमा-पार सहयोग को मजबूत करेगी और पारिस्थितिकी-आधारित संरक्षण मॉडल को बढ़ावा देगी।
शिखर सम्मेलन के बाद 1 और 2 जून को तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें 95 बड़ी बिल्ली क्षेत्रीय देशों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और संरक्षण विशेषज्ञ भाग लेंगे। इन सत्रों में वन्यजीव संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष, जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण और तकनीकी नवाचार जैसे विषयों पर चर्चा होगी।
सम्मेलन के दौरान एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी, जिसमें जनजातीय कला, बड़ी बिल्लियों पर आधारित चित्रकारी, फोटोग्राफी, फिल्में, वर्चुअल रियलिटी अनुभव और भारत की संरक्षण उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसका उद्देश्य लोगों में वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना और वैश्विक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईबीसीए सम्मेलन की वेबसाइट वैश्विक सूचना साझाकरण और जनसंपर्क का प्रमुख डिजिटल मंच होगी। वहीं सम्मेलन का लोगो प्रकृति के पांच तत्वों, सामंजस्य और पारिस्थितिक संतुलन को दर्शाता है। लोगो के केंद्र में सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों को दर्शाया गया है, जो साझा जिम्मेदारी और वैश्विक एकता का प्रतीक हैं।
कार्यक्रम में पर्यावरण मंत्रालय के सचिव Tanmay Kumar, विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) Sibi George, वन महानिदेशक Sushil Kumar Awasthi तथा आईबीसीए के महानिदेशक S. P. Yadav सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

