ग्रामीण भारत के विकास, रोजगार सृजन और पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक में 1 जुलाई 2026 से लागू होने जा रही नई ग्रामीण विकास व्यवस्था और “विकसित भारत-ग्रामीण भारत” अभियान के क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक में केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि केंद्र सरकार ग्रामीण विकास और रोजगार कार्यक्रमों के लिए कुल 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान कर रही है। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692 करोड़ रुपये का अंतरिम आवंटन जारी कर दिया गया है, जबकि मनरेगा के तहत पहले ही 30,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
“एक भी मजदूर बेरोजगार न रहे” : शिवराज सिंह चौहान
बैठक को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह केवल किसी योजना का प्रशासनिक परिवर्तन नहीं है, बल्कि करोड़ों ग्रामीण मजदूरों की आजीविका और जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि नई व्यवस्था लागू होने के दौरान ऐसा कोई हालात नहीं बनने चाहिए जिससे किसी मजदूर को रोजगार से वंचित होना पड़े।
उन्होंने कहा, “एक दिन भी कोई मजदूर बिना काम के न रहे। रोजगार, मजदूरी भुगतान और श्रमिकों के वैधानिक अधिकारों में किसी प्रकार की बाधा स्वीकार नहीं की जाएगी।”
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों से आग्रह किया कि वे पर्याप्त संख्या में विकास कार्यों को पूर्व स्वीकृति प्रदान करें ताकि 1 जुलाई से ही गांवों में रोजगार सृजन और विकास कार्यों की गति बनी रहे।
2.80 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगा विकास का धन
शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई राशि देश की लगभग 2.80 लाख ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगी। इससे प्रत्येक पंचायत को विकास कार्यों के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे।
उन्होंने कहा कि पंचायतों को मिलने वाले इन संसाधनों का उपयोग अधिनियम के तहत स्वीकृत विकास कार्यों में किया जाना चाहिए ताकि रोजगार सृजन के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण भी हो सके। सड़क, जल संरक्षण, सिंचाई, ग्रामीण अधोसंरचना और सामुदायिक परिसंपत्तियों जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
पंचायतों के माध्यम से गांवों में विकास को मिलेगी रफ्तार
केंद्रीय मंत्री ने पंचायतों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि गांवों के विकास की असली ताकत ग्राम पंचायत और ग्राम सभा में निहित है। उन्होंने निर्देश दिए कि विकास कार्यों का चयन ग्राम सभा और पंचायतों की भागीदारी से किया जाए ताकि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाएं तैयार हो सकें।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की मंशा केवल धन उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीण जनता तक पहुंचे और विकास कार्यों में पारदर्शिता बनी रहे।
डिजिटल प्रणाली से बढ़ेगी पारदर्शिता और जवाबदेही
बैठक में डिजिटल प्रक्रियाओं की समीक्षा करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), ई-केवाईसी, फेस ऑथेंटिकेशन और एसएमएस आधारित सूचना प्रणाली जैसी व्यवस्थाओं में राज्यों ने उल्लेखनीय प्रगति की है।
उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के सफल संचालन के लिए डिजिटल तकनीक का अधिकतम उपयोग आवश्यक है। इससे मजदूरी भुगतान समय पर होगा, फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा और लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचेगा।
उन्होंने सभी राज्यों को 100 प्रतिशत ई-केवाईसी सुनिश्चित करने तथा जिला और ब्लॉक स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
26 राज्यों ने किया बजटीय प्रावधान
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने जानकारी दी कि 26 राज्यों ने पहले ही “विकसित भारत-ग्रामीण भारत” के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अपने बजट में आवश्यक वित्तीय प्रावधान कर दिए हैं।
हालांकि झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और मिजोरम जैसे राज्यों से उन्होंने जल्द से जल्द इस प्रक्रिया को पूरा करने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि इस संबंध में संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी पत्र लिखा जाएगा ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई देरी न हो।
उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 9,721 करोड़ रुपये
राज्यों को जारी किए गए अंतरिम आवंटन में उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 9,721.48 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा पश्चिम बंगाल को 8,508 करोड़ रुपये, तमिलनाडु को 7,585.49 करोड़ रुपये, राजस्थान को 7,581.87 करोड़ रुपये, आंध्र प्रदेश को 7,707.21 करोड़ रुपये तथा बिहार को 6,715.83 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
मध्य प्रदेश को 6,252.03 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 5,709.90 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र को 4,420.32 करोड़ रुपये का प्रावधान मिला है। वहीं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भी अलग से 1,291.52 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में होगी विस्तृत चर्चा
शिवराज सिंह चौहान ने सभी राज्यों को 28 और 29 जून को नई दिल्ली स्थित पूसा संस्थान में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन, पंचायतों की भूमिका और ग्रामीण विकास की भावी रणनीति पर व्यापक चर्चा की जाएगी।
विकसित गांव से ही बनेगा विकसित भारत
बैठक के समापन पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह पहल केवल वित्तीय सहायता का कार्यक्रम नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047” विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्यों के सहयोग और पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलेगी, करोड़ों मजदूरों को स्थायी रोजगार मिलेगा और गांव आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से आगे बढ़ेंगे। उनके अनुसार, विकसित गांव ही विकसित भारत की मजबूत नींव बनेंगे और यही देश के समग्र विकास का सबसे प्रभावी मॉडल साबित होगा।

