• About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Fasal Kranti Agriculture News
Advertisement
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
  • Login
No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry
No Result
View All Result
Fasal Kranti Agriculture News
No Result
View All Result
Home कृषि समाचार

धान की नर्सरी कैसे तैयार करें, बेहतर पौध तैयार करने की वैज्ञानिक विधि

How to prepare paddy nursery, scientific method to prepare better seedlings

Emran Khan by Emran Khan
May 20, 2026
in कृषि समाचार
0
धान की नर्सरी कैसे तैयार करें, बेहतर पौध तैयार करने की वैज्ञानिक विधि
0
SHARES
4
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत में धान एक प्रमुख खाद्यान्न फसल है और इसकी अच्छी पैदावार काफी हद तक स्वस्थ एवं मजबूत पौध पर निर्भर करती है। यदि धान की नर्सरी सही तरीके से तैयार की जाए तो पौधे मजबूत बनते हैं, रोग कम लगते हैं और मुख्य खेत में रोपाई के बाद फसल तेजी से बढ़ती है। इसलिए किसान भाइयों के लिए धान की नर्सरी तैयार करने की सही जानकारी होना बहुत आवश्यक है।

धान की नर्सरी का महत्व

धान की खेती में नर्सरी वह स्थान होता है जहाँ बीजों को पहले बोया जाता है और बाद में तैयार पौधों को मुख्य खेत में रोपित किया जाता है। अच्छी नर्सरी से निम्न लाभ प्राप्त होते हैं—

  • स्वस्थ एवं मजबूत पौधे मिलते हैं
  • बीज की बचत होती है
  • फसल में रोग एवं कीटों का प्रकोप कम होता है
  • पौधों की समान वृद्धि होती है
  • उत्पादन क्षमता बढ़ती है

नर्सरी के लिए उपयुक्त स्थान का चयन

धान की नर्सरी तैयार करने के लिए ऐसे खेत का चयन करना चाहिए जहाँ पानी की पर्याप्त सुविधा हो और जल निकास भी अच्छा हो। भूमि उपजाऊ तथा समतल होनी चाहिए। नर्सरी मुख्य खेत के पास हो तो पौध उखाड़ने और रोपाई में सुविधा रहती है।

स्थान चयन करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • खेत ऊँचा एवं समतल हो
  • सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो
  • पानी का ठहराव अधिक न हो
  • मिट्टी दोमट या चिकनी दोमट हो
  • खेत में खरपतवार कम हों

नर्सरी की तैयारी का सही समय

धान की नर्सरी तैयार करने का समय क्षेत्र और किस्म पर निर्भर करता है। सामान्यतः खरीफ मौसम में जून से जुलाई के बीच नर्सरी तैयार की जाती है। समय पर नर्सरी तैयार करने से पौध सही उम्र में रोपाई के लिए उपलब्ध हो जाती है।

बीज का चयन

अच्छी उपज के लिए प्रमाणित एवं उन्नत किस्म के बीजों का चयन करना चाहिए। रोगग्रस्त या टूटे हुए बीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

प्रमुख उन्नत धान किस्में

  • पूसा बासमती
  • स्वर्णा
  • IR-64
  • MTU-1010
  • सरयू-52
  • PR-126

क्षेत्र के अनुसार कृषि वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित किस्मों का ही चयन करें।

बीज की मात्रा

एक हेक्टेयर क्षेत्र की रोपाई के लिए सामान्यतः 25 से 35 किलोग्राम बीज पर्याप्त होता है। संकर धान के लिए बीज की मात्रा कम लगती है।

बीज उपचार का महत्व

बीज उपचार करने से बीज जनित रोगों से बचाव होता है तथा अंकुरण अच्छा होता है। किसान बीजों को फफूंदनाशक दवा से उपचारित करें।

बीज उपचार की विधि

  • 10 लीटर पानी में नमक घोलकर बीज डालें
  • ऊपर तैरते हल्के बीज निकाल दें
  • अच्छे बीज साफ पानी से धो लें
  • फफूंदनाशक से उपचार करें
  • उपचार के बाद बीजों को 24 घंटे पानी में भिगोएँ
  • फिर 24 घंटे ढककर रखें ताकि अंकुर निकल आएँ

नर्सरी की भूमि की तैयारी

नर्सरी खेत की अच्छी तरह जुताई करनी चाहिए। खेत को भुरभुरा एवं समतल बनाना जरूरी है। खेत में गोबर की सड़ी खाद मिलाने से पौधों की वृद्धि अच्छी होती है।

भूमि तैयारी के मुख्य चरण

  1. खेत की 2–3 जुताई करें
  2. पाटा लगाकर भूमि समतल करें
  3. गोबर की खाद मिलाएँ
  4. छोटे-छोटे बेड तैयार करें
  5. सिंचाई की नालियाँ बनाएँ

नर्सरी में खाद एवं उर्वरक प्रबंधन

स्वस्थ पौध तैयार करने के लिए संतुलित उर्वरक देना आवश्यक है।

प्रति 100 वर्गमीटर नर्सरी हेतु

  • गोबर की खाद – 100 से 150 किलोग्राम
  • यूरिया – 1 किलोग्राम
  • सिंगल सुपर फॉस्फेट – 2 किलोग्राम
  • पोटाश – 500 ग्राम

उर्वरकों को अंतिम जुताई के समय मिला देना चाहिए।

बीज बुवाई की विधि

अंकुरित बीजों को समान रूप से नर्सरी में छिड़काव विधि से बोना चाहिए। ध्यान रखें कि बीज बहुत अधिक घने न हों, अन्यथा पौधे कमजोर हो जाते हैं।

बुवाई के समय सावधानियाँ

  • खेत में हल्की नमी हो
  • बीज समान रूप से फैलाएँ
  • अधिक गहराई में बीज न जाएँ
  • बुवाई के बाद हल्की सिंचाई करें

सिंचाई प्रबंधन

धान की नर्सरी में नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है। शुरुआत में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। अधिक पानी भरने से अंकुर खराब हो सकते हैं।

सिंचाई संबंधी सुझाव

  • अंकुरण तक हल्की नमी रखें
  • बाद में 2–3 सेमी पानी रखें
  • अत्यधिक जलभराव न होने दें
  • वर्षा के समय जल निकास का ध्यान रखें

खरपतवार एवं रोग नियंत्रण

नर्सरी में खरपतवार पौधों की वृद्धि रोकते हैं। समय-समय पर खरपतवार हटाना जरूरी है। रोग एवं कीटों की निगरानी भी करते रहें।

सामान्य रोग एवं बचाव

  1. झुलसा रोग

फफूंदनाशक का छिड़काव करें।

  1. तना छेदक कीट

उचित कीटनाशक का प्रयोग करें।

  1. पत्ती लपेटक

फसल की नियमित निगरानी करें।

पौध उखाड़ने का सही समय

धान की पौध सामान्यतः 20 से 25 दिन में रोपाई योग्य हो जाती है। पौधे स्वस्थ, हरे और मजबूत होने चाहिए।

पौध उखाड़ते समय ध्यान दें

  • खेत में पहले हल्की सिंचाई करें
  • पौध सावधानी से उखाड़ें
  • जड़ों को नुकसान न पहुँचाएँ
  • पौधों को छाया में रखें

धान की नर्सरी तैयार करते समय सामान्य गलतियाँ

  • अधिक बीज का प्रयोग
  • खराब जल निकास
  • बिना उपचारित बीज बोना
  • अत्यधिक पानी भरना
  • समय पर खरपतवार नियंत्रण न करना

इन गलतियों से पौध कमजोर हो सकती है और उत्पादन घट सकता है।

धान की अच्छी पैदावार के लिए मजबूत और स्वस्थ पौध तैयार करना अत्यंत आवश्यक है। यदि किसान वैज्ञानिक विधि से नर्सरी तैयार करें, अच्छे बीजों का चयन करें, संतुलित उर्वरक एवं उचित सिंचाई प्रबंधन अपनाएँ, तो धान की फसल अधिक उत्पादन दे सकती है। सही नर्सरी प्रबंधन न केवल लागत कम करता है बल्कि किसानों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

Tags: #DarjeelingTea #FirstFlushTea #TeaIndustry #Darjeeling #TeaProduction #WestBengal #IndianTea #PremiumTea #TeaExport #AgricultureNews #TeaGarden #Rainfall #Economy #FarmersNews #TeaBusinessPaddy Farming
Previous Post

Dasheri mango की देखभाल कैसे करें मीठे और स्वस्थ फलों के लिए आसान गाइड

Next Post

cockroach janata party: कौन हैं अभिजीत दीपके? बॉस्टन रिटर्न युवा जिसने राजनीति में मचा दी हलचल

Next Post
cockroach janata party

cockroach janata party: कौन हैं अभिजीत दीपके? बॉस्टन रिटर्न युवा जिसने राजनीति में मचा दी हलचल

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • जानें, क्या है अधिक फर्टिलाइजर के उपयोग से होने वाले दुष्प्रभाव?
  • ग्लोबल एग्रोकेमिकल सोर्सिंग में भारत क्यों बन रहा है सबसे भरोसेमंद पार्टनर?
  • Bihar Vegetable Mall Scheme: बिहार में ‘सब्जी मॉल’ से बदलेंगे खेती के हालात, हर मोहल्ले तक पहुंचेगा ‘तरकारी आउटलेट’
  • अनार की खेती: लाभकारी खेती की संपूर्ण वैज्ञानिक मार्गदर्शिका
  • ksheer dhara yojana: डेयरी किसानों की आय बढ़ाने वाली नई पहल, जानिए कैसे मिलेगा फायदा

Recent Comments

No comments to show.
Fasal Kranti is a leading monthly agricultural magazine dedicated to empowering Indian farmers. Published scince 2013 in Hindi, Punjabi, Marathi, and Gujarati, it provides valuable insights, modern farming techniques, and the latest agricultural updates. With a vision to support 21st-century farmers, Fasal Kranti strives to be a trusted source of knowledge and innovation in the agricultural sector.

Category

  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes

Newsletter

Subscribe to our Newsletter. You choose the topics of your interest and we’ll send you handpicked news and latest updates based on your choice.

Subscribe Now

Contact

Promote your brand with Fasalkranti. Connect with us for advertising.
  • E-Mail: info@fasalkranti.in
  • Phone: +91 9625941688
Copyrights © 2026. Fasal Kranti, Inc. All Rights Reserved. Maintained By Fasalkranti Team .

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Home
  • Agriculture News
  • Success Stories
  • Interviews
  • Weather
  • Articles
  • Schemes
  • Animal Husbandry

© 2026 Fasalkranti - News and Magazine by Fasalkranti news.