भारत और जापान ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देने का फैसला किया है। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने एआई को भविष्य की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक बताते हुए इसे सुरक्षित, भरोसेमंद, समावेशी, मानव-केंद्रित और टिकाऊ बनाने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई है। दोनों नेताओं ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल तकनीकी बदलाव का माध्यम नहीं है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था, उद्योग, विज्ञान, शिक्षा, शासन, व्यापार, सुरक्षा और समाज के हर क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन ला रही है। इसलिए इसके विकास और उपयोग से जुड़े निर्णयों का असर आने वाले कई वर्षों तक वैश्विक व्यवस्था, नवाचार, आर्थिक सुरक्षा और सामाजिक कल्याण पर पड़ेगा।
भारत-जापान संयुक्त बयान में दोनों देशों ने एआई के क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने, अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने तथा एक सुरक्षित और जिम्मेदार एआई इकोसिस्टम विकसित करने का संकल्प दोहराया। दोनों देशों ने यह भी स्वीकार किया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में तकनीकी सहयोग को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से भारत के ‘महासागर’ (MAHASAGAR) विजन और जापान की “फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक (FOIP)” नीति के अनुरूप मजबूत आर्थिक और तकनीकी साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत और जापान ग्लोबल साउथ तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एआई आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए समान विचारधारा वाले देशों और साझेदारों के साथ मिलकर कार्य करेंगे। दोनों देशों ने माना कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का विकास केवल तकनीकी दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी जिम्मेदारीपूर्ण होना चाहिए। इसके लिए नवाचार को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ एआई से जुड़े संभावित जोखिमों को कम करना और मजबूत एवं विश्वसनीय एआई सप्लाई चेन तैयार करना आवश्यक है।
दोनों नेताओं ने अप्रैल 2026 में आयोजित पहले भारत-जापान एआई रणनीतिक संवाद की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और भविष्य में भी इस संवाद को नियमित रूप से जारी रखने पर सहमति जताई। इस मंच के माध्यम से दोनों देश एआई से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों पर साझा समझ विकसित करेंगे तथा विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक सहयोग को बढ़ावा देंगे।
संयुक्त बयान में एआई गवर्नेंस, साइबर सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को विशेष महत्व दिया गया। दोनों देशों ने सुरक्षित और भरोसेमंद एआई के लिए वैश्विक स्तर पर एक प्रभावी गवर्नेंस फ्रेमवर्क विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई का नियमन ऐसा होना चाहिए जो नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ पारदर्शिता, जवाबदेही, सुरक्षा और मानव हितों की रक्षा भी सुनिश्चित करे। इस दिशा में दोनों देशों ने जी-20, ओईसीडी, ग्लोबल पार्टनरशिप ऑन एआई (GPAI) तथा संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग को और मजबूत बनाने का निर्णय लिया।
भारत और जापान ने एआई आधारित साइबर सुरक्षा सहयोग को भी प्राथमिकता दी है। दोनों देशों ने माना कि अत्याधुनिक एआई मॉडल साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने में सक्षम हैं, लेकिन इनके दुरुपयोग की आशंका भी बनी रहती है। इसलिए जोखिम आधारित मूल्यांकन, सुरक्षित तैनाती और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। इसके अलावा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एआई तकनीकों के विकास और उपयोग के दौरान विशेष सुरक्षा उपाय अपनाने पर भी सहमति बनी, ताकि यह तकनीक शिक्षा और विकास का माध्यम बने, न कि किसी प्रकार के नुकसान का कारण।
दोनों देशों ने एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को भविष्य की साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार माना। इसके अंतर्गत डेटा सेंटर, उच्च क्षमता वाले जीपीयू, कंप्यूटिंग संसाधन, सेमीकंडक्टर तथा डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया जाएगा। साथ ही एआई टेक्नोलॉजी स्टैक की मजबूत और विश्वसनीय सप्लाई चेन विकसित करने तथा आर्थिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से संभावित चुनौतियों का संयुक्त मूल्यांकन करने का भी निर्णय लिया गया।
भारत और जापान ने बहुभाषी, ओपन-सोर्स और डोमेन-विशिष्ट एआई मॉडल विकसित करने के लिए सरकार, उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इस दिशा में कई महत्वपूर्ण समझौतों का भी स्वागत किया गया। इनमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे, भारतजेन टेक्नोलॉजी फाउंडेशन और जापान के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेटिक्स के बीच बड़े भाषा मॉडल (एलएलएम) के संयुक्त अनुसंधान और विकास का समझौता शामिल है। इसके अलावा भारतीय और जापानी कंपनियों के बीच एआई टेक्नोलॉजी स्टैक तथा औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भी कई समझौते किए गए हैं।
दोनों देशों ने एआई आधारित वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा शोध संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। इसके तहत संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, शोधकर्ताओं के आदान-प्रदान, इंटर्नशिप कार्यक्रमों और तकनीकी प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। भारत की मजबूत एआई प्रतिभा को देखते हुए जापान ने भारतीय विशेषज्ञों और इंजीनियरों की भागीदारी बढ़ाने की इच्छा जताई है। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक भारत से 500 उच्च प्रशिक्षित एआई पेशेवरों को जापान में अवसर उपलब्ध कराने के लक्ष्य को भी दोहराया।
संयुक्त बयान में कौशल विकास और मानव संसाधन तैयार करने को भी एआई सहयोग का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। दोनों देशों ने माना कि जिम्मेदार एआई विकास के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन आवश्यक है। इसलिए स्किलिंग और री-स्किलिंग कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि युवाओं को भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा सके।
भारत और जापान ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग, परिवहन और सार्वजनिक सेवाओं जैसे क्षेत्रों के लिए एआई आधारित समाधान विकसित करने का भी निर्णय लिया। दोनों देशों ने कंपनियों, स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और निवेशकों से मिलकर ऐसे एआई समाधान विकसित करने का आह्वान किया जिन्हें बड़े पैमाने पर लागू किया जा सके और जिनका लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे।
संयुक्त बयान में “एआई फॉर ऑल” यानी “सबके लिए एआई” के दृष्टिकोण को विशेष महत्व दिया गया। दोनों नेताओं ने दोहराया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उद्देश्य केवल तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि मानवता के हित में समावेशी और सतत विकास सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने तीसरे देशों तथा वैश्विक साझेदारों के साथ भी सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई ताकि सुरक्षित, भरोसेमंद और समावेशी एआई इकोसिस्टम का निर्माण किया जा सके।
बैठक के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान की प्रधानमंत्री ताकाइची सनाए द्वारा भविष्य में एआई समिट की मेजबानी करने की घोषणा का स्वागत किया और इसे वैश्विक एआई सहयोग को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और जापान के बीच यह नई रणनीतिक साझेदारी न केवल दोनों देशों की तकनीकी क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि एआई के जिम्मेदार और सुरक्षित उपयोग के लिए वैश्विक मानकों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

