भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र को नई दिशा देने और वैश्विक नेतृत्व की ओर आगे बढ़ाने के उद्देश्य से ‘इंडिया फार्मा 2026’ सम्मेलन 13–14 अप्रैल को आयोजित होने जा रहा है। Department of Pharmaceuticals India और FICCI द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित यह सम्मेलन नीति निर्माताओं, उद्योग जगत, शोधकर्ताओं और वैश्विक हितधारकों को एक मंच पर लाएगा।
इंडिया फार्मा की शुरुआत वर्ष 2016 में एक रणनीतिक संवाद मंच के रूप में हुई थी, जिसका उद्देश्य सरकार और उद्योग के बीच समन्वय स्थापित करना और फार्मास्युटिकल क्षेत्र के विकास के लिए रोडमैप तैयार करना था। पिछले आठ आयोजनों में यह मंच वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है, जहां नीतिगत चर्चा, नवाचार और सहयोग के जरिए भारत के दवा उद्योग को दिशा मिली है।
हर वर्ष इस सम्मेलन ने बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाया है। शुरुआती आयोजनों में “मेक इन इंडिया” और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया, जबकि बाद के वर्षों में किफायती स्वास्थ्य सेवा, नवाचार, गुणवत्ता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे विषय प्रमुख रहे। 2022 में ‘विजन 2047’ और 2023 में ‘नवाचार के माध्यम से मूल्य सृजन’ जैसे विषयों ने दीर्घकालिक विकास रणनीति को मजबूती दी।
इस वर्ष 9वें संस्करण का थीम “भारत में खोज: जीवन विज्ञान नवाचार में छलांग” रखा गया है, जो भारत को वैश्विक फार्मा और बायोटेक हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सम्मेलन का उद्देश्य नवाचार को बढ़ावा देना, नियामक ढांचे को मजबूत करना और व्यापार सुगमता को बढ़ाकर एक प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम तैयार करना है।
इंडिया फार्मा की एक खास पहचान इसका सीईओ राउंडटेबल है, जहां उद्योग के शीर्ष नेता और सरकार के प्रतिनिधि सीधे संवाद करते हैं। यह मंच नीतिगत चुनौतियों, निवेश अवसरों और भविष्य की रणनीतियों पर खुलकर चर्चा का अवसर प्रदान करता है।
भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग आज वैश्विक स्तर पर एक मजबूत शक्ति के रूप में उभरा है। यह मात्रा के हिसाब से दुनिया में तीसरे और मूल्य के हिसाब से 14वें स्थान पर है तथा देश के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 1.7 प्रतिशत का योगदान देता है। वर्तमान में इसका आकार करीब 50 अरब डॉलर है, जो 2030 तक 130 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। निर्यात भी 30 अरब डॉलर से अधिक होने की संभावना है।
भारत ने वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में भी अपनी अहम भूमिका निभाई है। ‘वैक्सीन मैत्री’ जैसी पहलों के माध्यम से देश ने लगभग 100 देशों को करोड़ों वैक्सीन खुराकें उपलब्ध कराकर अपनी विश्वसनीयता साबित की है। इसके अलावा, भारत का जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र भी तेजी से बढ़ रहा है, जो नवाचार और स्टार्टअप इकोसिस्टम के दम पर वैश्विक स्तर पर शीर्ष देशों में शामिल हो चुका है।
सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी, जिनमें अगली पीढ़ी की तकनीकों का उपयोग, नियामक सुधार, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, डिजिटल परिवर्तन, बायोलॉजिक्स और उन्नत उपचार शामिल हैं। साथ ही, स्टार्टअप्स के लिए एक विशेष मंच भी प्रदान किया जाएगा, जहां वे अपने नवाचार प्रस्तुत कर सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडिया फार्मा 2026 न केवल नीतिगत सिफारिशें तैयार करेगा, बल्कि वैश्विक साझेदारी और निवेश के नए अवसर भी खोलेगा। यह आयोजन भारत को किफायती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाओं के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में और मजबूत करेगा।
कुल मिलाकर, यह सम्मेलन भारत के फार्मास्युटिकल और बायोटेक क्षेत्र के भविष्य को आकार देने वाला एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा, जो देश को वैश्विक स्वास्थ्य नवाचार और विनिर्माण में अग्रणी बनाने की दिशा में आगे बढ़ाएगा।

