पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU) में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र पाल सिंह और डॉ. डेनिस गैरेट्री के दौरे के दौरान Climate-Resilient Agriculture, Sustainable Farming Practices, Agroforestry और Natural Resource Management जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ। दोनों वैज्ञानिकों ने विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए बदलती जलवायु के बीच कृषि को अधिक टिकाऊ, लचीला और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की जरूरत पर जोर दिया।
यह दौरा ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब दुनिया के कृषि क्षेत्र के सामने Climate Change, Water Scarcity, Soil Degradation, Food Security और Sustainable Agriculture जैसी कई गंभीर चुनौतियां खड़ी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इन चुनौतियों का समाधान केवल पारंपरिक कृषि तकनीकों के माध्यम से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीकों, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना जरूरी है।
PAU के कुलपति से हुई महत्वपूर्ण चर्चा
अंतरराष्ट्रीय कृषि वैज्ञानिकों ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसाल से मुलाकात की। इस दौरान कृषि क्षेत्र में तेजी से बदलते परिदृश्य, Climate Change Adaptation, टिकाऊ कृषि प्रणालियों और भविष्य के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त शोध की संभावनाओं पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि कृषि अनुसंधान को किसानों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना होगा। जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में बदलाव, अनियमित वर्षा, जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव और कृषि लागत में वृद्धि जैसी समस्याएं किसानों के सामने नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं। ऐसे में Climate-Resilient Farming ऐसी कृषि प्रणालियों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, जो बदलती पर्यावरणीय परिस्थितियों के बावजूद उत्पादकता और किसानों की आय को बनाए रखने में सक्षम हों।
दोनों वैज्ञानिकों ने PAU की कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा में भूमिका की सराहना करते हुए विश्वविद्यालय के साथ भविष्य में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।
कृषि महाविद्यालय के डीन और कृषि विज्ञानियों से संवाद
डॉ. वीरेंद्र पाल सिंह और डॉ. डेनिस गैरेट्री ने College of Agriculture के डीन डॉ. सीएस औलख तथा Department of Agronomy के प्रमुख डॉ. हरि राम के साथ भी विस्तृत चर्चा की।
इस दौरान Sustainable Crop Production, Agroforestry, Natural Resource Management और Climate-Resilient Agriculture से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया। विशेषज्ञों ने कृषि उत्पादन को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ संतुलित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
विशेष रूप से Agroforestry को जलवायु परिवर्तन से निपटने की एक प्रभावी रणनीति के रूप में देखा गया। कृषि भूमि पर उपयुक्त वृक्षों और फसलों का संयोजन किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर देने के साथ-साथ मिट्टी के स्वास्थ्य, जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
बैठक में भविष्य के Agricultural Research Priorities पर भी विचार किया गया। वैज्ञानिकों ने कहा कि आने वाले समय में ऐसे शोध को प्राथमिकता देने की जरूरत है, जिनका सीधा लाभ किसानों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंच सके।
विद्यार्थियों से बोले अंतरराष्ट्रीय कृषि वैज्ञानिक
दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा PAU के विद्यार्थियों के साथ संवाद रहा। दोनों वैज्ञानिकों ने College of Agriculture के प्रथम वर्ष के स्नातक विद्यार्थियों तथा Department of Agronomy के स्नातकोत्तर विद्यार्थियों से बातचीत की।
उन्होंने अपने लंबे अंतरराष्ट्रीय शोध एवं कृषि क्षेत्र के अनुभव विद्यार्थियों के साथ साझा किए। युवा शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कृषि की मौजूदा चुनौतियों को केवल समस्याओं के रूप में देखने के बजाय उन्हें नए शोध और नवाचार के अवसरों के रूप में लेने का आह्वान किया।
वैज्ञानिकों ने विद्यार्थियों को Food Security और Environmental Sustainability के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए वैज्ञानिक सोच विकसित करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि भविष्य की कृषि केवल अधिक उत्पादन पर आधारित नहीं हो सकती। इसमें संसाधनों का संरक्षण, पर्यावरण की सुरक्षा और किसानों की आर्थिक स्थिरता भी समान रूप से महत्वपूर्ण होगी।
विद्यार्थियों के साथ बातचीत के दौरान Innovative Agricultural Solutions, Climate Adaptation और Sustainable Food Systems जैसे विषयों पर भी विचार साझा किए गए।
कौन हैं डॉ. वीरेंद्र पाल सिंह?
डॉ. वीरेंद्र पाल सिंह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध Agronomist हैं और उन्हें Rice Research, Crop Management, Agroforestry तथा Climate-Resilient Agriculture के क्षेत्र में व्यापक अनुभव है।
उन्होंने लगभग तीन दशकों तक International Rice Research Institute (IRRI) के साथ काम किया। इसके बाद उन्होंने लगभग 17 वर्षों तक International Centre for Research in Agroforestry (ICRAF) के साथ कार्य किया, जो वर्तमान में CIFOR-ICRAF का हिस्सा है।
धान अनुसंधान और फसल प्रबंधन के क्षेत्र में उनका लंबा अनुभव एशिया सहित विभिन्न कृषि क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप कृषि प्रणालियों के विकास पर भी काम किया है।
वर्तमान में डॉ. सिंह Solar Radiation Management (SRM) से संबंधित पहलों से भी जुड़े हुए हैं। ये पहल जलवायु परिवर्तन के संभावित समाधान और Climate Intervention Strategies से जुड़े वैज्ञानिक अनुसंधान पर केंद्रित हैं।
डॉ. डेनिस गैरेट्री का PAU से पुराना संबंध
डॉ. डेनिस गैरेट्री कृषि विज्ञान और विशेष रूप से Agroforestry और Ecosystem Restoration के क्षेत्र में विश्व स्तर पर सम्मानित वैज्ञानिक हैं। वह ICRAF के पूर्व Director General भी रह चुके हैं।
PAU के साथ उनका संबंध भी काफी पुराना है। उन्होंने पहली बार वर्ष 1971 में एक छात्र विनिमय कार्यक्रम के तहत पंजाब कृषि विश्वविद्यालय का दौरा किया था। उस समय वह The Ohio State University से जुड़े छात्र विनिमय कार्यक्रम के तहत PAU आए थे।
कृषि एवं पर्यावरण क्षेत्र में लंबे अनुभव के दौरान उन्होंने Agroforestry, Ecosystem Restoration और Climate Resilience को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने EverGreen Agriculture Partnership की स्थापना भी की।
वर्तमान में वह Healthy Planet Action Coalition के Board Chair के रूप में कार्य कर रहे हैं। इसके अलावा वे Climate Resilience और Solar Radiation Management से संबंधित अंतरराष्ट्रीय पहलों में भी योगदान दे रहे हैं।
उनका PAU का वर्तमान दौरा विश्वविद्यालय और उनके लंबे अकादमिक संबंधों को भी दर्शाता है।
Green Revolution से Climate-Resilient Agriculture तक PAU की यात्रा
दौरे के दौरान दोनों अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों ने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न महत्वपूर्ण संग्रहालयों का भी भ्रमण किया। इनमें Rural Museum, Green Revolution Museum और Water Resources Museum शामिल रहे।
इन संग्रहालयों के माध्यम से वैज्ञानिकों को पंजाब के कृषि इतिहास, ग्रामीण जीवन, हरित क्रांति और जल संसाधन प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं को करीब से देखने का अवसर मिला।
वैज्ञानिकों ने PAU के इन प्रयासों की सराहना की। उन्होंने माना कि कृषि विरासत का संरक्षण केवल इतिहास को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों को कृषि विकास की यात्रा और उससे जुड़े अनुभवों को समझने का अवसर भी देता है।
Green Revolution ने भारत को खाद्य उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहीं वर्तमान समय की चुनौती यह है कि कृषि उत्पादन को बनाए रखते हुए प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण की भी रक्षा की जाए। ऐसे में Climate-Resilient Agriculture और Sustainable Farming भविष्य की कृषि व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।
किसानों तक वैज्ञानिक ज्ञान पहुंचाने पर जोर
दौरे के दौरान किसानों तक वैज्ञानिक तकनीकी जानकारी पहुंचाने के विषय पर भी चर्चा हुई। PAU के Additional Director Communication डॉ. टीएस रियार ने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित विभिन्न Agricultural Extension Channels के बारे में जानकारी साझा की।
उन्होंने बताया कि कृषि अनुसंधान से प्राप्त तकनीकी ज्ञान को किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना कृषि विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वैज्ञानिक अनुसंधान तभी प्रभावी माना जा सकता है, जब उसका लाभ खेत और किसान तक पहुंचे।
PAU लंबे समय से Agricultural Extension, Farmer Training, Technology Transfer और Knowledge Dissemination के माध्यम से किसानों तक नई कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक जानकारी पहुंचाने का कार्य कर रहा है।
दौरे के समन्वय में डॉ. जगविंदर जोधा, संपादक पंजाबी, की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जलवायु परिवर्तन के दौर में बदलनी होगी कृषि रणनीति
विशेषज्ञों के इस दौरे से यह संदेश भी सामने आया कि भविष्य की कृषि रणनीति में Climate Change Adaptation को केंद्र में रखना होगा। पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए यह विषय विशेष महत्व रखता है, जहां फसल उत्पादन के साथ-साथ भूजल, मिट्टी और अन्य प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी जरूरी है।
Climate-Smart Agriculture के अंतर्गत ऐसी तकनीकों और कृषि प्रणालियों को बढ़ावा दिया जाता है, जो बदलती जलवायु परिस्थितियों के प्रभाव को कम करने, कृषि उत्पादकता बनाए रखने और किसानों की आय को सुरक्षित करने में मदद कर सकें।
इस दिशा में Crop Diversification, Water Management, Soil Health Management, Agroforestry, Natural Resource Management और Sustainable Crop Production जैसे उपाय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
PAU जैसे कृषि विश्वविद्यालयों की भूमिका इस मामले में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि विश्वविद्यालय शोध, शिक्षा और Agricultural Extension के माध्यम से वैज्ञानिक समाधान विकसित करने के साथ उन्हें किसानों तक पहुंचाने का काम भी करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से कृषि अनुसंधान को मिलेगी नई दिशा
डॉ. वीरेंद्र पाल सिंह और डॉ. डेनिस गैरेट्री का PAU दौरा विश्वविद्यालय के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
कृषि की चुनौतियां अब किसी एक देश या क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। Climate Change, Food Security, Water Scarcity और Environmental Sustainability जैसी समस्याएं वैश्विक स्तर पर कृषि को प्रभावित कर रही हैं। इसलिए इनके समाधान के लिए विभिन्न देशों के वैज्ञानिकों और कृषि संस्थानों के बीच सहयोग आवश्यक है।
PAU में हुई चर्चा ने International Agricultural Research Collaboration के लिए नए अवसरों की संभावनाओं को भी रेखांकित किया। इससे विद्यार्थियों और युवा शोधकर्ताओं को वैश्विक कृषि अनुसंधान से जुड़ने तथा नई तकनीकों और विचारों को समझने के अवसर मिल सकते हैं।
PAU का संदेश—कृषि विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी
अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों का यह दौरा इस बात को रेखांकित करता है कि कृषि का भविष्य केवल उत्पादन बढ़ाने में नहीं, बल्कि Productivity, Profitability और Sustainability के बीच संतुलन स्थापित करने में है।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा अंतरराष्ट्रीय कृषि वैज्ञानिकों के साथ संवाद, विद्यार्थियों से बातचीत और कृषि विरासत से परिचय कराने की पहल ने कृषि शिक्षा, शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को सामने रखा।
दौरे के अंत में यह स्पष्ट संदेश उभरकर आया कि Climate-Resilient Farming और Sustainable Agriculture भविष्य की खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान, किसानों का अनुभव, आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मिलकर ऐसी कृषि व्यवस्था का निर्माण कर सकते हैं, जो जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच भी किसानों और पर्यावरण दोनों के हितों की रक्षा कर सके।

